यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षामित्रों और आंगनबाड़ी सहित इनकी उठाई आवाज, कहा- आंकड़ों की बाजीगरी है योगी का बजट

किसानों की आय दुगुनी करने की घोषणा मात्र छलावा, न लागत कम करने के लिए बजट में प्रावधान न ही बोनस की व्यवस्था : कांग्रेस

By: Hariom Dwivedi

Updated: 18 Feb 2020, 07:05 PM IST

लखनऊ. यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने योगी के बजट को प्रदेश के किसानों, युवाओं के साथ धोखा करार देते हुए इसे आंकड़ों की बाजीगरी बताया है। उन्होंने कहा कि 450 रूपये प्रति कुन्तल गन्ने का मूल्य देने की घोषणा करके सत्ता में आने वाली भाजपा तीन वर्षों में मात्र गन्ने के मूल्य में 10 रुपये की ही वृद्धि कर पायी है। पिछले दो वर्षों में युवा बेरोजगारों की तादात 12.5 लाख बढ़ गई है। 21 लाख 39 हजार 811 के मुकाबले 33 लाख 93 हजार 330 (सरकार द्वारा विधानसभा में की गयी घोषणा के मुताबिक) नये रोजगार देने के बजाए आज के बजट में रिटायर्ड शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में नौकरी देने की घोषणा बेरोजगार युवाओं के साथ विश्वासघात है। वहीं, कौशल विकास योजना भी छलावा साबित हुई है। बजट पूरी तरह प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के जले पर नमक छिड़कने जैसा है।

अजय लल्लू ने कहा कि शिक्षामित्र, आंगनबाड़ी, रसोइयां, आशा बहू, रोजगार सेवक, चौकीदार, होमगार्ड, अनुदेशक एवं मदरसा शिक्षकों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है जो अत्यन्त निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि 18 मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की घोषणा भी झूठ का पुलिन्दा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी द्वारा घोषित नवोदय विद्यालय को खत्म करने की साजिश है। क्योंकि न तो इसमें बजट ही बढ़ाया गया है उसके मुकाबले फीस वृद्धि और सुविधाएं घटायी गयी हैं।

किसानों के साथ क्रूर मजाक और धोखा
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कृषि पर लागत कम करने, खाद, बीज, पानी, कृषि यन्त्र, कीटनाशक, बिजली आदि के दामों में कमी का कोई प्रावधान बजट में नहीं किया गया है और न ही दूसरे राज्यों की भांति जैसे छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब आदि राज्यों में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित कृषि उत्पादित गेहूं, धान एवं तिलहन की फसलों के मूल्य पर प्रति कुंतल दो सौ रूपये से लेकर पन्द्रह सौ रूपये तक बोनस देने का प्रावधान है, इसे प्रदेश सरकार ने बजट में कोई महत्व नहीं दिया है, जबकि पिछले तीन वर्षों में इन अनिवार्य कृषि उपयोग की चीजों के दामों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। 3200 रुपये प्रति कुंतल गेहूं का मूल्य होना चाहिए था जो नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त किसान आयोग का गठन तथा खेतों में रखवाली करने वालों के लिए भत्ता का भी कोई प्राविधान नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों की आय दुगुनी करने की घोषणा किसानों के साथ क्रूर मजाक और धोखा है।

महिला सुरक्षा के लिए पर्याप्त बजट नहीं
शिक्षा बजट में ‘व्यापक कटौती’ पिछले बजट 2019-20 में कुल 48044 करोड़ की घोषणा हुयी थी जबकि इस बजट में 18633 करोड़ रुपये की घोषणा की गयी है, यह शिक्षा के बाजारीकरण का संकेत है। आयुष्मान येाजना में बजट का आवंटन न करना निजीकरण को बढ़ावा देने जैसा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए मात्र 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे पूरे प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा कैसे हो पायेगी। एसिड अटैक एवं रेप पीड़ित महिलाओं के लिए बजट में कोई सहायता राशि का प्रावधान नहीं है।

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