पीएम के बाद देश को सर्वाधिक राज्यपाल देने वाला उत्तर प्रदेश, जानिए इनके बारे में खास बातें

पीएम के बाद देश को सर्वाधिक राज्यपाल देने वाला उत्तर प्रदेश, जानिए इनके बारे में खास बातें

Ruchi Sharma | Publish: Jul, 20 2019 05:07:22 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India


-यूपी की राज्यपाल बनीं आनंदी बेन पटेल
-देश में सबसे ज्यादा छह राज्यपाल उत्तर प्रदेश के

रुचि शर्मा
लखनऊ. देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाल उत्तर प्रदेश अब सबसे ज्यादा राज्यपाल देने वाले राज्य का भी एक रिकॉर्ड बना रहा है। पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता जो पिछले चार पांच दशक तक राजनीति में छाए रहे उनमें से कई अब गवर्नर बन गए हैं। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के छह नेता विभिन्न राज्यों में राज्यपाल की भूमिका में हैं। इनमें कल्याण सिंह, लालजी टंडन, फागू चौहान, सत्यपाल मलिक, कलराज मिश्रा व बेबी रानी मौर्य शामिल हैं। शनिवार को यूपी के लालजी टंडन और फागू चौहान को क्रमश: मध्यप्रदेश और बिहारी में राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई। वहीं आनंदीबेन पटेल को उत्तर प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त किया है।


कल्याण सिंह

कल्याण सिंह का जन्म पांच जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की अतरौली तहसील के मढ़ौली गांव में हुआ। उनकी पत्नी का नाम रामवती है। कल्याण सिंह के एक पुत्र एक पुत्री है। कल्य़ाण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह राजू भैया भारतीय जनता पार्टी के एटा से सांसद हैं। कल्याण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मौजूदा समय में वह राजस्थान के राज्यपाल हैं। कल्याण सिंह जून 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये 6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। कल्याण सिंह सितम्बर 1997 से नवम्बर 1999 तक पुनः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। कल्याण सिंह ने चार सितम्बर 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली।

लालजी टंडन

लालजी टंडन को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के तौर पर जाना जाता है। टंडन का जन्म 12 अप्रैल 1935 में हुआ है। लालजी टंडन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीबी रहे हैं। वाजपेयी के राजनीति से संन्यास लेने के बाद वर्ष 2009 में टंडन लखनऊ से लोकसभा का चुनाव लड़े और जीत दर्ज कर सांसद बने। लालजी टंडन उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों में मंत्री पद पर भी रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 1960 से की। टंडन दो बार विधान परिषद के सदस्य रहे। ३० सितंबर २०१७ को बिहारी के राज्यपाल बने थे। अब उन्हें मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है।

फागू चौहान


जनपद की घाेसी विधानसभा से छठीं बार विधायक और उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है।लंबे समय से भाजपा से जुड़े चौहान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। योगी सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग का चेयरमैन बनाया है। यह कैबिनेट मंत्री स्तर का पद होता है। विधायक के रूप में अभी चौहान का कम से कम तीन साल का कार्यकाल बाकी है। फागू चौहान को मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का बहुत करीबी माना जाता है। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में इनकी गिनती होती है।

सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी बिहार के मौजूदा गवर्नर सत्यपाल मलिक को दी गई है. जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन जारी है, इस लिहाज से बतौर राज्यपाल सत्यपाल मलिक की जिम्मेदारी काफी अहम हो जाती है। इसके अलावा ऐसा लगभग पांच दशक बाद हुआ है, जब घाटी के राज्यपाल की जिम्मेदारी किसी राजनेता को दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समुदाय से आने वाले सत्यपाल मलिक को रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद बिहार का राज्यपाल बनाया गया था। राज्यपाल बनने से पहले वह बीजेपी में किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे।

कलराज मिश्रा

केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को हिमाचल प्रदेश का गवर्नर नियुक्त किया है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के मौजूदा राज्यपाल आचार्य देवव्रत को गुजरात का नया राज्यपाल बनाया गया है। 78 वर्षीय कलराज मिश्र बीजेपी के बड़े नेता माने जाते हैं. मोदी सरकार की पहली पारी में उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया था। वे उत्तर प्रदेश के देवरिया लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे, हालांकि बाद में कलराज मिश्र से मंत्री पद ले लिया गया था. इस बार का लोकसभा चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा था।

बेबी रानी मौर्य

उत्तराखंड की नई राज्यपाल के रूप में नियुक्त की गई बेबी रानी मौर्या उत्तर प्रदेश के आगरा की रहनेवाली हैं। मौर्या साल 1995 से 2000 के बीच आगरा की मेयर रह चुकी हैं। पहले चुनाव में ही मेयर बनने के बाद मौर्या ने एत्मादपुर से 2007 में विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाया था लेकिन हार गईं। गैर राजनीतिक परिवार से आनेवाली बेबीरानी मौर्य के ससुर एक आईपीएस अधिकारी थे, जबकि पति पंजाब नैशनल बैंक में उच्च पद पर रह चुके हैं।

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