उत्तर प्रदेश से चीन को बड़ा झटका, डिफेंस इंडस्ट्री से ड्रैगन का पत्ता साफ

कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी और फिर चीन के साथ सीमा पर उठे विवाद को लेकर भारत के लोगों में चीन के खिलाफ गुस्सा है। लोगों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। इसका नतीजा अब ये भी देखने को मिल रहा है कि डिफेंस एक्सपो (Defence Expo) में देश के प्रमुख व प्रदेश के सबसे गढ़ कानपुर ने चीन का पत्ता साफ कर दिया है

By: Karishma Lalwani

Updated: 26 Jun 2020, 01:32 PM IST

लखनऊ. कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी और फिर चीन के साथ सीमा पर उठे विवाद को लेकर भारत के लोगों में चीन के खिलाफ गुस्सा है। लोगों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। इसका नतीजा अब ये भी देखने को मिल रहा है कि डिफेंस एक्सपो (Defence Expo) में देश के प्रमुख व प्रदेश के सबसे गढ़ कानपुर ने चीन का पत्ता साफ कर दिया है। कानपुर में बनने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट और बुलेट प्रूफ हेलमेट में चीन से जुड़ी कोई चीज इस्तेमाल में नहीं लाई गई है। उद्यमी अब किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं इसलिए सामान महंगा होने के बावजूद अमेरिका और यूरोप की दिग्गज कंपनियों से उत्पाद खरीदे जाते हैं। उद्यमियों का कहना है कि ये जैकेट और हेलमेट बहुत जरूरी हैं। इन्हें तैयार करने के लिए अमेरिका व यूरोप से मंगाए गए उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है क्योंकि इनकी कंपनियां भरोसेमंद हैं। चीन ने बेहद सस्ते कच्चे माल के लगातार ऑफर दिए लेकिन शहर के उद्यमी उनके झांसे में नहीं आए।

इस तरह किया गया तैयार

बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए सबसे पहले फाइबर या फिलामेंट का निर्माण किया जाता है जो वजन में हल्के लेकिन मजबूत होते हैं। पैरा-अरैमिड सिंथेटिक फाइबर जैकेट के निर्माण में बहुत जरूरी है। इसके अलावा डायनीमा फाइबर भी इस्तेमाल किया जाता है। केवलर मैटेरियल के अलावा वेकट्रैन मैटेरियल से भी बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट बनाए जाते हैं। बुलेटप्रूफ जैकेट में दो परतें होती हैं। इसमें ऊपर सेरेमिक परत और उसके बाद नीचे के स्तर पर बैलेस्टिक परत होती है। गोली सबसे पहले सेरेमिक परत से टकराती है। इसके आगे का नुकीला सिरा चूर-चूर हो जाता है और गोली की ताकत कम हो जाती है। सेरेमिक परत से टकराने पर गोली टूट जाती है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे बैलेस्टिक परत अवशोषित यानी कि अब्सॉर्ब कर लेती है। इस बुलेटप्रूफ जैकेट को पहनने वाले सैनिक सुरक्षित रहते हैं और खतरे का आभास उनके लिए बहुत कम हो जाता है।

नाइट विजन डिवाइस निर्यात को तैयार

निर्यात के लिए नाइट विजन डिवाइस भी तैयार है। एमकेयू ने इसे कानपुर में ही बनाया है। लोकल इन वोकल फिर वोकल इन ग्लोबल के नारे को कानपुर की डिफेंस उत्पाद कंपनियां पहले ही साकार कर चुकी हैं। एमकेयू लिमिटेड से राजेश गुप्ता का कहना है, 'बुलेट प्रूफ जैकेट और बुलेट प्रूफ हेलमेट के उत्पादन में हमारी रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम का अहम योगदान है। जरूरी रॉ मैटेरियल के लिए हम कभी चीन पर निर्भर नहीं रहे। यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियों से हमारे कारोबारी संबंध हैं। क्वालिटी के दम पर तमाम देशों को एक्सपोर्ट कर रहे हैं।'

एनसीएपडी से एमडी मयंक श्रीवास्तव ने कहा है, 'चीन पर हम कभी भरोसा नहीं करते। खास तौर पर डिफेंस जैसे संवेदनशील सेक्टर में तो कभी नहीं। इसीलिए बुलेट प्रूफ जैकेट से लेकर अन्य उत्पादों के लिए डेनमार्क और अमेरिका की कंपनियों से रॉ मैटेरियल की खरीद करते हैं।'

ये भी पढ़ें: परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए जाने को लेकर छात्रों ने Highcourt में दी चुनौती, कहा Covid-19 संक्रमण की स्थिति को देखे बगैर परीक्षा कार्यक्रम घोषित

Karishma Lalwani
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned