तीन साल से एक ही जगह तैनात कर्मचारी हटाए जाएंगे, पति-पत्नी के सरकारी नौकरी में होने पर एक जिले में मिलेगी तैनाती

UP Government decision employees posted for 3 years will be removed-योगी सरकार नए सिरे से तबादला नीति (Transfer) लागू करने जा रही है। योगी सरकार की जारी नई ट्रांसफर नीति के मुताबिक तीन साल से एक ही जगह पर तैनात कर्मचारी अब हटाए जाएंगे।

By: Karishma Lalwani

Published: 16 Jun 2021, 01:05 PM IST

लखनऊ. UP Government decision employees posted for 3 years will be removed. योगी सरकार नए सिरे से तबादला नीति (Transfer) लागू करने जा रही है। योगी सरकार की जारी नई ट्रांसफर नीति के मुताबिक तीन साल से एक ही जगह पर तैनात कर्मचारी अब हटाए जाएंगे। मसलन, समूह ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ व ‘घ’ वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला उनके विभागाध्यक्ष 30 दिन के अंदर अपने मंत्री से अनुमति लेकर 15 जुलाई, 2021 तक कर सकेंगे। सचिवालय के कर्मचारी इस दायरे में नहीं आएंगे। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने तबादला नीति संबंधी शासनादेश जारी किया है।

जारी किए गए शासनादेश के अनुसार, नए सत्र 2020-21 के लिए विभागाध्यक्षों को 20 मार्च 2018 में निर्धारित नीति के आधार पर तबादला करने का अधिकार दिया गया है। पिछले वर्ष कोविड को देखते हुए कई प्रतिबंध लगाए गए थे। तबादले भी रोक दिए गए थे। मगर अब यूपी विधानसभा को देखते हुए सालों से जमे कर्मियों को स्थानांतरित किए जाने का फैसला किया गया है। इसके तहत समूह ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ व ‘घ’ वर्ग के अधिकारियों का तबादला किया जाएगा।

इस तरह होगा तबादला

समूह ‘क’ एवं ‘ख’ के जो अधिकारी तीन साल पूरा कर चुके हैं, उन्हें जिले के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। मंडल में सात वर्ष की सेवा पूरी करने वाले दूसरे मंडलों में स्थानांतरित किए जाएंगे। मंडलीय व विभागाध्यक्ष कार्यालयों की तैनातियों को इसके दायरे में नहीं माना जाएगा। कार्यालयों में विभागाध्यक्ष को छोड़ कर अन्य अधिकारियों के समक्ष पद मुख्यालय के बाहर होने पर एक विभाग में तीन साल पूरा करने वालों को स्थानांतरित किया जाएगा। जिले और मंडलों में तैनाती अवधि और विभाध्यक्ष में तैनाती की अवधि को अलग माना जाएगा। कुल 20 फीसदी तबादले ही किए जाएंगे। समूह ‘क’ और ‘ख’ मामले में मुख्यमंत्री से अनुमति लेने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगी। इसी तरह समूह ‘ग’ और ‘घ’ में विभागीय मंत्री से अनुमति ली जाएगी। समूह ‘ख’ के कर्मियों के स्थानांतरण संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों द्वारा किए जाएंगे। समूह ‘ख’ के कर्मियों के स्थानांतरण के लिए विभागीय मंत्री का अनुमोदन लिया जाएगा।

समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों को गृह मंडल में नहीं मिलेगी तैनाती

समूह ‘क’ व ‘ख’ के अधिकारियों को उनके गृह मंडल में तैनात नहीं किया जाएगा। यह प्रतिबंध केवल जिला स्तरीय विभागों व कार्यालयों में लागू होगा। इसके अलावा संदिग्ध कर्मियों की तैनाती संवेदनशील पदों पर नहीं की जाएगी। मंदित बच्चों के माता-पिता की तैनाती अधिकृत सरकारी चिकित्सक के प्रमाण पत्र के आधार पर विकल्प प्राप्त कर ऐसे स्थान पर की जाएगी, जहां बच्चे के इलाज की व्यवस्था आसानी से मिल सके। पति-पत्नी के सरकारी नौकरी में होने पर एक ही जिले में तैनाती होगी। दिव्यांग कर्मियों का तबादला इस नीति से बाहर रखा गया है। जिनके आश्रित परिवारीजन दिव्यांग हैं, वह भी इस दायरे से बाहर रखे गए हैं। ऐसे कर्मियों का तबादला गंभीर शिकायत या फिर अपरिहार्य कारणों से ही किया जाएगा।

आठ जिलों को पहले प्राथमिकता

केंद्र सरकार द्वारा घोषित यूपी के आठ महत्वाकांक्षी जिलों चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती व बहराइच में सभी विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर पदों को भरा जाएगा। इन जिलों में तैनात कर्मियों को दो साल बाद विकल्प प्राप्त कर स्थानांतरित किया जाएगा। दो वर्ष में सेवानिवृत्त होने वाले समूह ‘ग’ के कर्मियों को उनके गृह जिले में तैनाती मिलेगी। बुंदेलखंड में तैनात कर्मियों को उनके नियंत्रक अधिकारी द्वारा उनका तबादला तब तक नहीं किया जाएगा जब तक उनके स्थान पर कोई दूसरा कर्मचारी नहीं आ जाता है। यह प्रतिबंध आईएएस, आईपीएस, पीसीएस व पीपीएस अधिकारियों पर लागू नहीं होगा। इसमें सरकारी विभाग के मान्यता प्राप्त संघों के अध्यक्ष, सचिव और जिला शाखा के अध्यक्ष व सचिव को भी राहत मिली है। इनका स्थांनतरण पद ग्रहण करने की तिथि से दो साल तक नहीं किया जाएगा।

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