बेअसर हुआ प्रियंका गांधी का करिश्मा, यूपी में कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार

बेअसर हुआ प्रियंका गांधी का करिश्मा, यूपी में कांग्रेस की अब तक की सबसे बड़ी हार

Ruchi Sharma | Publish: May, 23 2019 07:37:42 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले प्रियंका गांधी को कांग्रेस में जान फूंकने की जिम्मेदारी दी गई

लखनऊ. उत्तर प्रेदश में लोकसभा चुनाव में लंबे समय की अटकलों के बाद प्रियंका गांधी ने जब सक्रिय राजनीति में कदम रखा तो कांग्रेस कार्यकर्ताअों को उम्मीद थी कि प्रियंका का जादूई करिश्मा लोकसभा चुनाव में दिखेग, लेकिन एेसा नहीं हुआ प्रियंका का सियासी आगाज बेअसर हुआ। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हम अपनी हार का स्वीकारते हैं. इस जीत के लिए पीएम मोदी आर बीजेपी कार्यकर्ताओं को बधाई देती हूं। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले प्रियंका गांधी को कांग्रेस में जान फूंकने की जिम्मेदारी दी गई। प्रियंका ने उत्तर प्रदेश में कई जनसभाएं और रोडशो किए। उन्होंने राज्य से बाहर भी पार्टी के लिए पूरी ताकत झोंकी, लेकिन ऐसा लगता है कि जनता के बीच उनका वो करिश्मा नहीं चल पाया, जिसकी उम्मीद राहुल गांधी ने उनसे की थी। चुनाव के दौरान उनके वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की अटकलें चलीं, हालांकि बाद में पार्टी ने अजय राय को टिकट देकर इन अटकलों पर विराम लगा दिया।


चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका ने कई मौकों पर प्रधानमंत्री को सीधे निशाने पर लिया, हालांकि वह अखिलेश यादव और मायावती पर सीधी टिप्पणी करने से बचती रहीं। लंबे समय तक सियासी गलियारों में इस पर चर्चा होती रही कि आखिर प्रियंका सक्रिय राजनीति में कब कदम रखेंगी और कब पार्टी में बड़ी भूमिका निभाएंगी। उनके भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जनवरी महीने में बड़ा सियासी दांव खेलते हुए लोकसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले प्रियंका को कांग्रेस महासचिव और प्रभारी (उत्तर प्रदेश-पूर्व) नियुक्त किया और इसी के साथ सक्रिय राजनीति में प्रियंका के सफर का आगाज हो गया।


टॉय-टॉय फिस्स हुआ 72 हजार का नारा

कांग्रेस 'गरीबी पर वार, 72 हजार' के नारे के साथ चुनाव में उतरी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चौकीदार चोर का नारा भी खूब गूंजा लेकिन इन सबके बाद भी कांग्रेस उप्र में चारो खाने चित्त हो गयी। उप्र में कांग्रेस की 2014 से भी बुरी हार हुई। वह सिर्फ एक सीट बचा पायी। माना जा रहा था कि यूपी में कांग्रेस कम से कम 10 सीटें जीत लेगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। उप्र मेें अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में समूची पार्टी ने प्रचार अभियान प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रित रखा और राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए 'चौकीदार चोर है' का प्रचार अभियान चलाया जिसके जवाब में मोदी और भाजपा ने 'मैं भी चौकीदार' अभियान शुरू किया। राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे के अलावा 'न्यूनतम आय गारंटीज् (न्याय) योजना को मास्टरस्ट्रोक के तौर पर पेश किया। पार्टी को उम्मीद थी कि गरीबों को सालाना 72 हजार रुपये देने का उसका वादा भाजपा के राष्ट्रवाद वाले विमर्श की धार को कुंद कर देगा, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं हुआ। प्रचार अभियान के साथ पार्टी अथवा विपक्षी गठबंधन की तरफ से नेतृत्व का स्पष्ट नहीं होना कांगे्रस पर भारी पड़ा। कांग्रेस का यूपी में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा।

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