मिशन 2019: अखिलेश के परंपरागत वोटों पर भाजपा की नजर, सपा का खेल बिगाडऩे के लिए बनाया बड़ा प्लान

मिशन 2019: अखिलेश के परंपरागत वोटों पर भाजपा की नजर, सपा का खेल बिगाडऩे के लिए बनाया बड़ा प्लान

Ashish Kumar Pandey | Publish: Sep, 09 2018 08:11:09 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

मिशन 2019 के लिए ओबीसी पर भाजपा का बड़ा दांव।

 

लखनऊ. भाजपा की नजरें इस समय 2019 के लोकसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं। 2014 के प्रदर्शन को दोहराने के लिए भाजपा बड़ी रणनीति बनाने में जुटी है। यूपी के 35 प्रतिशत ओबीसी वोटों पर वैसे तो सभी पार्टियों की नजरें हैं, लेकिन भाजपा इस वोट पर अभी से नजरें जमाए हुए है। यूपी में ओबीसी का वोट सपा का वोट माना जाता रहा है। बतादें कि यूपी में ओबीसी का सबसे बड़ा चेहरा अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव हैं। लेकिन भाजपा ने इस वर्ग के वोटों में सेंधमारी कर ली थी और 2014 के लोकसभा और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में इनका समर्थन पाया और केंद्र व यूपी में सरकार बनाने में सफल रही। अब फिर भाजपा की नजर अति पिछड़ी जातियों पर है। वे इन जातियों के लिए कई तरह की योजनाएं ला कर अपनी ओर खींचने के प्रयास में जुटी है। यूपी में पिछड़ी जातियों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। पार्टी अलग-अलग जातियों का अभी तक कई सम्मेलन आयोजित कर चुकी है।

यूपी की करीब दर्जन भर से अधिक अति पिछड़ी जातियों ने अक्टूबर में राजधानी में एक बड़ी रैली कर अमित शाह का अभिनंदन करने का फैसला किया है। इसके लिए रणनीति तैयार कर ली गई है। इसके पीछे जो मकसद है वह है यूपी के अति पिछड़ों की राजधानी लखनऊ में होने वाली रैली और इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अभिनंदन को यादगार बनाना। इसके साथ ही मकसद ओबीसी की इन कुछ विशेष जातियों को लुभाने का है ताकि उनका समर्थन २०१९ के लिए मिल सके।

सहसंयोजक बना कर तैयारी की जा रही है
इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए अतिपिछड़ी जातियों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को कार्यक्रम का संयोजक बनाया है। इसके साथ ही अति पिछड़ी जातियों में से अलग-अलग जातियों के 30 प्रतिनिधियों को सहसंयोजक बना कर तैयारी की जा रही है। अति पिछड़ी जाति से जुड़े निषाद समजा के एक समाजसेवी का कहना है कि यूपी की लोधी, मल्लाह, कश्यप, बिंद, निषाद, पथडिय़ा, मथुरिया, सनकत्ता, राजपूत, चंद्रवंशी, खडग़वंशी और रायकवाड़ जातियों में आपस में काफी करीबी रिश्ते रहते हैं। ये सभी जातियां अलग-अलग खेमों में बंटी हैं। भाजपा का मकसद इन जातियों को सियासी तौर पर एकजुट करना और उनका समर्थन पाना है।
सम्मेलन से जुड़े लोगों का दावा है कि आमतौर पर ओबीसी में केवल यादव जाति के लोग ही ज्यादा लाभांवित होते रहे हैं। अब पिछड़ा वर्ग आयोग को केन्द्र सरकार ने संवैधानिक दर्जा दिया है। ऐसे में अब सभी पिछड़ी जातियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
समय मिलने पर की जाएगी रैली की घोषणा
रैली के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से समय मिलने के बाद ही तारीख की घोषणा की जाएगी। सूत्रों की मानें तो अमित शाह को अक्टूबर में उनका अभिनंदन किए जाने की जानकारी दे दी गई है। अब उनसे समय मिलते ही कार्यक्रम के तारीख की घोषणा कर दी जाएगी।
राजधानी में होगी रैली
सूत्रों की मानें तो रैली राजधानी लखनऊ में आयोजित की जाएगी। इस रैली में लोधी, मल्लाह, कश्यप, बिन्द, निषाद, किसान, पथडिय़ा, मथुरिया, सनकत्ता, राजपूत, चन्द्रवंशी, खडग़वंशी तथा रायकवाड़ आदि जातियों के लोगों को बुलाया जाएगा। अगर भाजपा ने इन जातियों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली तो इसका लाभ पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में जरूर मिलेगा।

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