सीएम योगी के लिए अग्नि परीक्षा साबित होंगे नगर निकाय चुनाव

सीएम योगी के लिए अग्नि परीक्षा साबित होंगे नगर निकाय चुनाव
CM Yogi Adityanath

Shatrudhan Gupta | Updated: 27 Oct 2017, 10:54:20 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

योगी के सामने वर्तमान सीट बचाने के साथ ही, अन्य सीटों पर कब्जा करने की होगी चुनौती।

लखनऊ. उप्र में भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए प्रदेश के नगर निकाय चुनाव अग्नि परीक्षा साबित होंगे। इस चुनाव में योगी को साबित करना होगा कि उनके सात माह के कार्यकाल से प्रदेश की जनता खुश है या नाखुश। सीएम योगी के लिए प्रदेश की उन नगर निगम सीटों को बचाने की भी चुनौती होगी, जहां वर्तमान में पार्टी का कब्जा है। साथ ही उन नगर निगम सीटों पर जीत हासिल करनी होगी, जहां पिछली बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।

मालूम हो कि 2012 के नगर निकाय चुनाव में उत्तर प्रदेश में 12 नगर निगम थे। इनमें से 10 नगर निगमों में भाजपा ने चुनाव जीता था। इलाहाबाद में भाजपा के मौजूदा मंत्री नंद गोपाल नंदी की पत्नी अभिलाषा नंदी निर्दल मेयर का चुनाव जीती थीं। इसी प्रकार बरेली से निर्दल उम्मीदवार के रूप में आईएस तोमर ने मेयर का चुनाव जीता था। दोनों ने बाद में सपा की सदस्यता ले ली थी। बाद में नंदी और उनकी पत्नी अभिलाषा भाजपा में शामिल हो गई थीं। इस बार नगर निगमों की संख्या बढ़ कर 16 हो गई है। अब ऐसी स्थिति में सीएम योगी आदित्यनाथ को अपने आपको साबित करने की अग्रि परीक्षा होगी। क्योंकि, भाजपा के सत्ता में आने के बाद यूपी में कोई पहला चुनाव होने जा रहा है।

भाजपा के सत्ता में आने के बाद यूपी में पहला चुनाव

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि जब से योगी यूपी के सीएम बने हैं, तब से यहां कोई ऐसा चुनाव नहीं हुआ, जिससे यह कहा जा सके कि योगी की मेहनत काम आई। पिछले सात महीने के कार्यकाल के दौरान यूपी में न विधानसभा चुनाव हुए और न ही लोकसभा। विधान परिषद चुनाव हुए, पर उनका सियासी तौर पर कोई महत्व नहीं है। अब नगर निगम और निकाय चुनाव को लेकर पहला मौका आया है, जब सीएम योगी के सामने अपने वजूद को साबित करने की चुनौती होगी।

चार नगर निगम में पहली बार होगी वोटिंग

प्रदेश की 16 में से चार नगर निगम चुनाव में मतदाता पहली बाद वोट डालेंगे। इन चार नगर निगमों में सहारनपुर, फिरोजाबाद, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन शामिल हैं। बताते चलें कि प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद अयोध्या और मथुरा-वृंदावन को नगर निगम का दर्जा दिया गया, जबकि सहारनपुर और फिरोजाबाद को समाजवादी पार्टी सरकार में नगर निगम का दर्जा दिया गया था, लेकिन वहां चुनाव नहीं हुए थे। यह पहला मौका होगा, जब इन चारों नगर निगम में मतदाता पहली बार महापौर चुनने के लिए वोट करेंगे।

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