समय पर ही होंगे पंचायत चुनाव, नेताओं की परीक्षा लेगा कोरोना

यूपी पंचायत चुनावों को लेकल बड़ी खबर...

लखनऊ. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन का समय हो या उससे पहले का। राजनीतिक दल किसी तरह की राजनीति करने से पीछे नहीं हटते। इसी क्रम में इन दिनों उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट भी सुनाई पड़ने लगी है। जैसे-जैसे लॉकडाउन में ढील बढ़ रही है उसी के साथ अब प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही करवाए जाने को लेकर भी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। अगर आने वाले दिनों में कोरोना को लेकर स्थिति काबू से बाहर न हुई तो योगी सरकार सरकार पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने के मूड में नहीं है। योगी आदित्यनाथ सरकार की कोशिश है कि पंचायत चुनावों को अपने समय से ही कराया जाए। वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी हो या फिर सपा-बसपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल सभी की नजर प्रवासियों पर है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो लॉकडाउन के बीच यूपी पहुंच रहे करीब 20 लाख प्रवासी श्रमिक ही आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों की तकदीर लिखेंगे। वह चाहे आगामी पंचायत चुनाव हो या फिर 2022 का विधानसभा चुनाव। शायद यही कारण है कि इस संकट की घड़ी में सभी दल आमजन के साथ खड़े हैं, यह दिखाना चाहते हैं।


कार्यकाल बढ़ाने की जरूरत नहीं

योगी सरकार में पंचायतीराज मंत्री चौधरी भूपेन्द्र सिंह ने भी इसको लेकर यही बात कही है। चौधरी भूपेन्द्र सिंह के मुताबिक मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 दिसम्बर तक है। फिलहाल पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। चुनाव की तैयारियों को लेकर मंत्री ने कहा कि पिछले पांच सालों में प्रदेश की करीब 1000 ग्राम सभाओं का शहरी क्षेत्र में विलय हुआ है। साथ ही राज्य के 48 जिलों की सीमा विस्तार से प्रभावित हुई हैं। यहां उतने क्षेत्र में ही परिसीमन होगा जो आंशिक रूप से पंचायत में शामिल हुई हैं। मुरादाबाद, संभल और गोण्डा में 2015 के चुनाव में परिसीमन नहीं हो सका था। इन कुल 51 जिलों में नए सिरे से वार्डों का परिसीमन किया जाना है।

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चुनाव के लिए काफी समय

पंचायतीराज मंत्री के मुताबिक नए वार्ड बनने के बाद मौजूदा वोटर लिस्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दी जाएगी, फिर आयोग इस वोटर लिस्ट का वृहद पुनरीक्षण का काम शुरू करवा देगा। मंत्री ने कहा कि क्षेत्र पंचायतों का अगले साल जनवरी के अंत तक और जिला पंचायतों का अगले साल मार्च तक कार्यकाल है। इसलिए अभी हमारे पास काफी समय है। उन्होंने कहा कि अगर जुलाई से भी चुनाव की तैयारियां शुरू होंगी तो सब कुछ ठीक समय से हो जाएगा।

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प्रवासी मजदूरों पर सभी दलों की नजर

भाजपा समेत सभी राजनीतिक दलों ने कोरोना संकट के चलते गांव लौटे प्रवासी मजदूरों की लामबंदी पर भी नजर गड़ा ली है। सभी का मानना है कि प्रवासी मजदूर पंचायत चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसीलिए सभी गांव में लौटे प्रवासी मजदूरों के भोजन-पानी व रोजगार की चिंता करने में लगे हैं। जिससे पंचायत चुनाव के समय इन सभी लोगों का साथ उनकी पार्टी के साथ ही रहे। अनुमान है कि देश भर में करीब 40 लाख लोग उत्तर प्रदेश के हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में श्रमिकों को सरकार वापस ला रही है। फिलहाल यह सभी गांवों और कस्बों में ही रहेंगे, आगामी चुनाव में इन्हीं के इर्द-गिर्द ही जीत का समीकरण बुना जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रवासियों का जिधर रुझान होगा, जीत उसी के कदम चूमेगी।

बीजेपी ने शुरू की तैयारियां

पंचायत चुनाव को लेकर अभी कोई तस्वीर भले ही साफ न हो, लेकिन भाजपा ने कोरोना संकट के मद्देनजर चलाए जा रहे सेवा कार्यों के साथ ही पंचायत चुनावों पर निशाना साध लिया है। बूथ अध्यक्षों से लेकर प्रभारियों तक को भाजपा को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पिछले दिनों मंडल अध्यक्षों से संवाद कर इस बारे में उन्हें दिशा निर्देश और अपने सुझाव दिए। उनसे कहा गया है कि वे सेवाकार्यों के साथ ही बूथ अध्यक्षों व बूथ कमेटियों के साथ बैठक कर पंचायत चुनाव के लिहाज से समीक्षा का काम जारी रखें।

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नितिन श्रीवास्तव Desk/Reporting
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