इस साल चौपट रहेगी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई !

प्रदेश बेसिक शिक्षा के बाद अब माध्यमिक शिक्षा में भी समायोजन और ट्रांसफर पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।

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Updated: 11 Sep 2017, 03:39 PM IST

लखनऊ. प्रदेश बेसिक शिक्षा के बाद अब माध्यमिक शिक्षा में भी समायोजन और ट्रांसफर पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। ऐसे में इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ना भी तय माना जा रहा है। खास तौर पर जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई पर असर पड़ेगा। बेसिक शिक्षा में एक तरफ शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया है दूसरी तरफ ट्रांसपर पर भी रोक लग गई। यही हाल अब माध्यमिक शिक्षा का है। ऐसे में प्राथमिक स्कूल, परिषदीय स्कूल, जूनियर हाई-स्कूल व इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी होने वाली है जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी होगा।

समायोजन हुआ रद्द

बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जून में तबादला नीति जारी की थी। दोनों विभागों ने समायोजन एवं तबादले में न्यायिक प्रक्रिया से बचने के लिए पारदर्शिता और नियमों के पालन का दावा किया था।कोर्ट के इस आदेश से जहां कुछ स्कूलों में शिक्षक सरप्लस हो गये हैं। वहीं शिक्षण सत्र के दो महीने से ज्यादा बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में स्कूलों में पद खाली रह गये हैं।बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में ग्रामीण विद्यालयों में 65 हजार शिक्षक सरप्लस बताते हुए तबादला नीति 2017 के तहत समायोजन प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रिक्त पदों पर सरप्लस शिक्षकों को तैनात किया जाना था।

बीएसए स्तर पर की जा रही समायोजन प्रक्रिया को सहायक अध्यापकों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती जिसके बाद जुलाई में इस पर रोक लगा दी गई। अब विभाग ने जिलों के अंदर ही तबादले की प्रक्रिया शुरू की है।

शिक्षकों के कई हजार पद खाली

प्रदेश में 1,12,747 प्राथमिक और 45,649 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के 86,560 पद हैं। इनमें से 72,171 प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। जबकि 14389 पद खाली हैं। इसी तरह सहायक अध्यापक के 3,14,131 पद सृजित हैं। इनमें 2,81,960 सहायक अध्यापक कार्यरत हैं और 32,171 पद खाली हैं। वहीं कुल शिक्षकों के 46,560 पद अभी रिक्त हैं। इन पर 12,540 सहायक अध्यापक, 4000 उर्दू शिक्षक, 6500 प्रशिक्षु शिक्षकों की तैनाती की कार्रवाई चल रही है। इनके अलावा 1064 प्रशिक्षु शिक्षकों को मौलिक नियुक्ति के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं।सरकार ने सरप्लस शिक्षकों को ट्रांसफर कर इन जगहों को भरने का फैसला किया था।

आंकड़ों पर नजर डालें-

कुल प्राइमरी स्कूल- 1.58 हजार
कुल छात्र- 8.5 लाख (लगभग)
कुल एकल विद्यालय-17,602
सरप्लस शिक्षक- 65 हजार ( कोर्ट के आदेश से पहले)
प्रदेश के इंटर कॉलेजों में लगभग 40000 शिक्षकों की कमी

15 जिलों में शिक्षकों की ज्यादा कमी

संतकबीर नगर, मऊ, शामली, गाजियाबाद, रायबरेली में सृजित पदों से ज्यादा शिक्षक तैनात हैं। संतकबीर नगर ऐसा जिला है जहां 900 शिक्षक सरप्लस हैं। मऊ और रायबरेली में 500 से ज्यादा शिक्षक सरप्लस हैं। वहीं 15 जिले ऐसे हैं जहां शिक्षकों की ज्यादा कमी है। इनमें गाजीपुर, बांदा, सुलतानपुर, महाराजगंज, रामपुर, सोनभद्र, बहराइच, बलरामपुर, हरदोई, कुशीनगर, लखीमपुर, गोण्डा, जौनपुर, बदायूं, सीतापुर ऐसे जिले हैं जहां शिक्षकों की ज्यादा कमी है। सीतापुर में 3 हजार से ज्यादा शिक्षकों की कमी है। वहीं बदायूं और जौनपुर में 2 हजार से ज्यादा शिक्षक कम हैं। आपको बता दें कि पिछली भर्तियों में सीतापुर और लखीमपुर में 6-6 हजार पद थे, इसके बावजूद अब भी यहां शिक्षकों की कमी है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। इसको देखते हुए तबादलों के दौरान विभाग सरप्लस शिक्षकों को शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में समायोजित करने वाला था जो कि अब संभव वहीं दिख रहा।

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