अगले दो-तीन दिन तक होगी जमकर बारिश, कई जिलों में मकान गिरने से दर्जनभर मौतें

अगले दो-तीन दिन तक होगी जमकर बारिश, कई जिलों में मकान गिरने से दर्जनभर मौतें

Mahendra Pratap Singh | Publish: Sep, 03 2018 12:47:54 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 01:25:12 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

भारी बारिश के कारण कई जिलों में कच्चे व जर्जर मकान गिर गए

लखनऊ. यूपी में कई जिलों में आफत की बारिश हुई है। भारी बारिश के कारण कई जिलों में कच्चे व जर्जर मकान गिर गए। मौसम विभाग के निदेशक जे पी गुप्ता के मुताबिक यूपी में अगले दो-तीन दिनों तक बारिश होगी। हालांकि, यह बारिश पश्चिम यूपी में कम और पूर्वी यूपी में ज्यादा होगी।

 

बारिश हुई जानलेवा

 

यूपी के ज्यादातर जिलों में रुक-रुक कर लगातार बारिश हुई। वहीं कई जिले बाढ़ की चपेट में आ गए। बात अगर कल से लेकर अब तक की करें, तो आकाशीय बिजली व बाढ़ से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है।वहीं इस हफ्ते हुई बारिश में सबसे ज्यादा मौत शाहजहांपुर में हुई, जहां भारी बारिश से 6 लोगों ने जान गंवा दी। वहीं अमेठी, उन्नाव और औरैया में 2-2 लोगों की और सीतापुर में 3 लोगों की मौत हुई। इसी के साथ ललितपुर में स्थित तालबेहट तहसील गांव रविवार को अचानक आई बाढ़ के पानी से घिर गया जिससे कि लोग फंसे रहे। इसके लिए ग्रामीणों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर व रेस्क्यू ऑपरेशन टीम भेजी गयी। वहीं बेतवा नदी के तटवर्ती ग्राम वर्मा बिहार के आसपास के क्षेत्रों में भी अचानक पानी भर गया जहां नाव के जरिए ग्रामीणों को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने का प्रयास किया गया। ऐसी ही थाना बालाबेहट के पास सोंर नदी का पुल पार करते समय बाढ़ के पानी में एक बस वहकर नदी में गिर गई। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बस में सवार सभी यात्रियों को निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

नदियां उफान पर

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बारिश के चलते अधिकतर नदियां उफनाई हुई हैं। लखीमपुर खीरी के पलियाकलां में शारदा का जलस्तर 1 मीटर 80 सेमी ऊपर है तो वहीं घाघरा अयोध्या में खतरे के निशान से 40 सेमी, बाराबंकी के एल्गिनब्रिज पर 66 सेमी ऊपर बह रही है।

बाढ़ के पानी से वाहनों का आवागमन प्रभावित

फर्रूखाबाद में बदायूं मार्ग पर बाढ़ का पानी बहने से छोटे वाहनों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
खुद को सुरक्षित करने के लिए ग्रामीणों ने ट्रैक्टर-ट्रौली या किसी अन्य ऊंचे स्थान पर बसेरा बनाया। गंगा व रामगंगा की बाढ़ के पानी से तटवर्ती गांव की अधिकांश भूमि जलमग्न हो गई है और खेत में खड़ी फसलें कई दिनों से बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं। जिससे फसलें खराब हो गई हैं।

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