बड़ी खबर: यूपी के कई मंत्रियों के बदले जाएंगे विभाग, यह है बड़ी वजह

बड़ी खबर: यूपी के कई मंत्रियों के बदले जाएंगे विभाग, यह है बड़ी वजह
CM Yogi Adityanath

Shatrudhan Gupta | Publish: Dec, 08 2017 05:42:04 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

योगी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी को स्मार्ट और जवाबदेह बनाने के लिए एक-दूसरे से जुड़े विभागों के विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने विभागों में बड़ी कटौती की है। इसके तहत योगी सरकार ने 94 विभागों को घटाकर अब 37 विभाग कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो अब कई मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे। इसको लेकर मंथन भी शुरू हो गया है। मालूम हो कि नीति आयोग की अपेक्षा के मुताबिक प्रदेश की योगी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी को स्मार्ट और जवाबदेह बनाने के लिए एक-दूसरे से जुड़े विभागों के विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरकार और संगठन गंभीर

सीएम योगी आदित्यनाथ अब जल्द ही अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से शुरू हो रहा है। 22 दिसंबर तक इसके समाप्त होने की संभावना है। प्रदेश सरकार और भाजपा का सारा ध्यान लोकसभा चुनाव २०१९ पर है। ऐसे में अपने कार्य और प्रदर्शन को लेकर सरकार और संगठन दोनों गंभीर हैं।

लोकसभा चुनाव को देखते हुए होगा बदलाव

सूत्र बताते हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों को दायित्व सौंपेगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नौ महीने की अपनी सरकार में मंत्रियों की कार्यशैली और क्षमता से पूरी तरह परिचित हो चुके हैं। उनकी कसौटी पर कुछ बेहद खरे उतरे तो कई फिसड्डी भी साबित हुए हैं। नीति आयोग की अपेक्षा के अनुरूप विभागों के विलय होने पर कार्य का स्वरूप भी बदलेगा। सरकार ने स्वास्थ्य से संबंधित सभी विभागों को एक करने का फैसला किया है।

मंत्रियों के विभाग में होगा बदलाव

मालूम हो कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा विभाग आशुतोष टंडन संभालते हैं। सभी विभाग एक साथ हो जाने पर एक मंत्री को ही दायित्व मिलेगा। ऐसे में किसी एक का समायोजन दूसरे विभाग में होना तय है। यह भी संभव है कि नये सिरे से तय होने वाले विभागों के अनुरूप पहले मंत्रियों को दायित्व सौंप दिया जाए और फिर उनका विलय किया जाए। सूत्रों के अनुसार निकाय चुनाव में अच्छी परफार्मेस देने वाले मंत्री भाजपा और योगी की निगाह में हैं। मूल्यांकन के आधार पर ओहदा घटाया-बढ़ाया जा सकता है।

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