अधिकारियों की नाकामी छुपाने के लिए एस्मा का सहारा: महासंघ

कर्मचारियों ने रखी अपनी मांग

By: Ritesh Singh

Updated: 29 May 2020, 08:43 PM IST

लखनऊ, उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों पर एस्मा लगाए जाने का तीव्र विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि सरकार ने अधिकारियों की नाकामी छूपाने के लिए एस्मा का सहारा लिया है। उन्होंने कहा कि शासनादेश और परम्परा के अनुसार अगर विभागीय एवं राज्य स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण आला अफसर द्विपक्षीय वार्ता के आधार पर कर दे तो कर्मचारियों को आन्दोलन की नौबत ही न आए।

कर्मचारियों ने रखी अपनी मांग

उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों पर एस्मा लगाया जाना किसी भी दिशा में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं से संगठनों द्वारा अवगत कराया जाता है, समय समय कर्मचारी संघों के प्रतिनिधि मण्डल कर्मचारियों को होने वाली समस्याएं सरकार को तक पहुंचाने के लिए आला अफसरों का सहारा लेते है लेकिन उच्च अधिकारी कर्मचारियों की समस्या को सुलझाने के बजाय भूल जाते है और सरकार को उच्च अधिकारी गुमराह करते है।

उन्होंने कहा कि एक तो संक्रमण का दौर चल रहा है दूसरी तरफ राज्य के हर संवर्ग के कर्मचारी ने इस आपदा घड़ी में अपनी जान जोखिम में डालकर सरकार और जन सेवा में अपनी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ अपनी शक्ति अनुरूप आर्थिक सहयोग भी सरकार के खाते में जमा किया है। इसके बावजूद बिना किसी पूछ परख के भत्तों की समाप्ति के निर्णय से कर्मचारी संवर्ग आहत है। ऐसे में अगर वह अपना विरोध सरकार के समझ दर्ज कराता है तो उसके दमन के लिए सरकार एस्मा का सहारा ले रही है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है।

सरकार से की अपील

उन्होंने कहा कि सरकार को इस सम्बंध में पहले राज्य के सभी कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ता करने के उपरान्त सहमति बनानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर थी तो भत्ता को कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता था लेकिन इनकी समाप्ति का निर्णय लेना सीधे सीधे सरकार की मनमानी है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में ही 4.30 लाख पद चतुर्थ श्रेणी के स्वीकृत पर रिक्त है यदि सरकार चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों को भर दिया जाए तो 4.30 लाख युवाओं को पक्की नौकरी मिल सकती है।

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