कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच प्रदेश में वेंटिलेटर की कमी, सरकार के सामने बड़ी चुनौती

प्रदेश के अस्पतालों में फिलहाल आवश्यकता के मुताबिक वेंटिलेटर नहीं हैं। राजधानी लखनऊ की ही अगर बात करें तो यहां के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर बेहद सीमित संख्या में हैं...

लकनऊ. कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सेवाएं तेज कर दी गई हैं। जगह जगह अस्पतालों में इसके लिए आइसोलेश वार्ड बने हैं। लेकिन प्रदेश में कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या के चलते वेंटिलेटर के साथ ही दूसरे जरूरी उपकरणों की कमी देखने को मिल रही है। दरअसल कोविड-19 से संक्रमित छह में से एक मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसे वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। कोरोना संक्रमाण की वजह से अक्सर मरीज के फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं। ऐसे में वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। लेकिन प्रदेश के अस्पतालों में फिलहाल आवश्यकता के मुताबिक वेंटिलेटर नहीं हैं। राजधानी लखनऊ की ही अगर बात करें तो यहां के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर बेहद सीमित संख्या में हैं। जिसके चलते वेंटिलेटर की कमी को पूरा करना प्रदेश सरकार के लिए डेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ऐसे हालाताें को देखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर आगे आया है और पोर्टेबल वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों की तकनीक विकसित करने पर काम शुरू कर दिया है। नोएडा की कंपनी भी पोर्टेबल डिजाइन वेंटिलेटर बना रही है। इसके साथ ही आईआईटी रुड़की ने वेंटिलेटर बनाया है।

 

आईआईटी कानपुर का सस्ता वेंटिलेटर

आईआईटी कानपुर के इनक्यूबेटर नोका रोबोटिक्स में सस्ता वेंटिलेटर बनाया जा रहा है। वहां के इनोवेटर्स की टीम ने वेंटिलेटर का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। यह फिलहाल टेस्टिंग के दौर में है। वेंटिलेटर की लागत पहले से मौजूद वेंटिलेटर के मुकाबले बहुत कम है। इसकी कीमत करीब 70 हजार रुपये होगी, जबकि अभी मौजूद वेटिलेटर का बाजार मूल्य 4 लाख रुपये के आसपास है।

 

नोएडा की कंपनी भी बना रही वेंटिलेटर

सरकार ने नोएडा की निजी कंपनी अग्वा हैल्थकेयर को एक सप्ताह के अंदर 10 हजार वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर दिया है। एजीवीए ने वेंटिलेटर का उत्पादन बढ़ा दिया है। इस कंपनी को केंद्र सरकार से 10 हजार व छह हजार अन्य वेंटिलेटर का ऑर्डर मिला है। एक वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ लाख रुपए है। एजीवीए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिवाकर ने बताया कि, मांग में वृद्धि के कारण वेंटिलेटर का उत्पादन शुरू किया गया है। मारुति सुजुकी कंपनी इसके लिए सहयोग दे रही है। कंपनी ने प्रति माह 200-300 से बढ़ाकर 20,000 उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

 

आईआईटी रुड़की ने बनाया वेंटिलेटर

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने कोविड 19 से निपटने के लिए पोर्टेबल वेंटिलेटर बनाया है। आईआईटी रुड़की की एक टीम ने प्राण वायु के नाम से इस क्लोज्ड लूप वेंटिलेटर को एम्स ऋषिकेश के सहयोग से विकसित किया। वही वेंटिलेटर को जरूरत की मात्रा में हवा पहुचाने के लिए प्राइम मूवर का नियंत्रण ऑपरेशन पर आधारित होगा। यह वेंटिलेटर सभी आयु वर्ग के रोगियों के लिए फायदेमंद है, लेकिन खास तौर पर बुजुर्गों के लिए जियादा लाभदायक सिद्ध होगा। वही इस पोर्टेबल वेंटिलेटर को काम करने के लिए कंप्रेस्ड हवा की जरूरत भी नही होगी। यह अस्पताल के किसी भी वार्ड में या खुले मे लगाया जा सकता है। यह कम लागत वाला, सुरक्षित और विश्वसनीय मॉडल है और इसका निर्माण तेजी से किया जा सकता है।

 

आईआईटी बीएचयू ने बनाया हाई क्वालिटी सैनिटाइजर

लगातार सैनिटाइजर की कमी को देखते हुए आईआईटी बीएचयू ने हाई क्वालिटी सैनिटाइजर तैयार किया है। जो शहर के तमाम विभागों में बांटा जा रहा है। एक सप्ताह के भीतर सैकडों लीटर हाई क़्वालिटी का सैनिटाइजर तैयार कराकर जिलाधिकारी, डीआईजी और सीआरपीएफ कार्यालयों और बीएचयू परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों को वितरित कराया गया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी प्रयासों की सराहना की। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने भी इसे बेहतर माना है और सेनिटाइजर बनाने की विधि भी मांगी, ताकि प्रशासन इसे कम दामों में तैयार कराकर आम जनता को पहुंचा सके।

 

कोरोना से लड़ने के लिए राजधानी में तैयारी

अस्पताल-----वेंटिलेटर
माल----------00
मलिहाबाद----00
केजीएमयू-----32
पीजीआई-----80
बलरामपुर----12
सिविल-------06
लोकबंधु------05
माल----------00
टीबी हॉस्पिटल-00
लोहिया-------10

 

सरकार ने तेज की कोशिश

कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए सरकार ने प्रदेश के सभी 51 सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए कि जरूरत के अनुसार फटाफट आइसोलेशन बेड व वेंटीलेटर बढ़ाए जाएं। सरकार ने दावा किया कि वेंटीलेटर खरीद की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा, ताकि जरूरत के अनुसार अधिक से अधिक वेंटिलेटर खरीदे जा सके। इसके साथ ही भर्ती होने वाले मरीजों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जाए।

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नितिन श्रीवास्तव Desk/Reporting
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