प्रेम और प्यार की धरती में जज्बातों की जंग

प्रेम और प्यार की धरती में जज्बातों की जंग

Hariom Dwivedi | Publish: Apr, 17 2019 02:20:36 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 02:20:37 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

चुनावी मौसम में जज्बातों की जंग
अधिकतर सीटों पर लड़ाई गठबंधन बनाम भाजपा
फतेहपुर सीकरी और मथुरा में ग्लैमर का तड़का
यूपी में अपनी सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस


राज्य की तस्वीर
राउंड-2
महेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ. भगवान श्रीकृष्ण की धरती मथुरा और प्यार की अमिट निशानी ताजनगरी प्रेम और प्यार के प्रतीक हैं। लेकिन, चुनावी मौसम में यहां जज्बातों की जंग है। सभी दल एक दूसरे की जातीय अस्मिता से खेल रहे हैं। जातियों की गोलबंदी है। और जातियों को ही साधने पर जोर है। फतेहपुर सीकरी और कान्हा की नगरी मथुरा में ग्लैमर का तड़का जरूर है। लेकिन साधी जातियां ही जा रही हैं। मुसलमान, जाट और दलित इन तीनों की जुगलबंदी ही प्रत्याशियों के भाग्य को तय करेगी। 2014 में यहां की सभी आठों सीटों पर भाजपा का कब्जा था। लेकिन, इस बार उसे यहां अपनी साख बचाने की चुनौती है। एक-दो सीटों को छोड़ दें तो अधिकतर पर लड़ाई गठबंधन बनाम भाजपा है। कांग्रेस अपनी सियासी जमीन तलाश रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर फतेहपुर में भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इस बार स्टारडम का राजनीतिक कौशल यहां दांव पर है। राज बब्बर आगरा और फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं। लेकिन, भाजपा के राजकुमार चाहर को स्थानीय होने का लाभ मिल रहा है। बसपा से श्रीभगवान शर्मा गठबंधन प्रत्याशी हैं। दलितों की राजधानी आगरा से सटे होने की वजह से शर्मा को बसपा को परंपरागत वोटों का लाभ मिलना तय है।

कान्हा की धरती मथुरा में मौजूदा भाजपा सांसद हेमा मालिनी की गठबंधन प्रत्याशी राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार कुंवर नरेंद्र सिंह से सीधी टक्कर है। हेमा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे हैं। धर्मेद्र यहां जाटों को रिझाने के लिए आए। वह शोले के वीरू बनकर घूमे। तो नरेंद्र के लिए अजित और जयंत चौधरी ने जाति का हवाला देते हुए खूब पसीना बहाया है। कांग्रेस प्रत्याशीर महेश पाठक को मथुरा का स्थानीय निवासी होने का लाभ मिल रहा है। उन्हें परंपरागत वोटों की आस है।

न जूते की चर्चा न पेठे की
ताजनगरी में गठबंधन की परीक्षा होनी है। आगरा बसपा की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां का पेठा और जूता भी जग प्रसिद्ध है। लेकिन इस चुनाव में न तो जूते की चर्चा है न यहां के पेठे की। ताज को लेकर भी कोई बात नहीं हो रही। भाजपा ने योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल को उतारा है तो मनोज सैनी गठबंधन उम्मीदवार हैं। कांग्रेस से प्रीता हरित मैदान में हैं, जो हाल ही भी भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोडकऱ राजनीति मेें आयी हैं। अजा के लिए आरक्षित इस सीट पर चुनावी बिसात जातीय समीकरणों पर बिछी है। जो प्रत्याशी जातियों को साध लेगा वह संसद की डेहरी पहुंचेगा।

बिजनौर जिले की नगीना सीट भी सुरक्षित है। दुनियाभर में काष्ठकला और लकड़ी की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन मतों के धुवीकरण की कोशिश में यहां के मुद्दे गौण हैं। कोई उम्मीदवार यहां के कारीगरों की समस्याओं की बात नहीं कर रहे हैं। यहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक स्थिति में होंगे।

जाट वोटर बंद करेंगे किस्मत का ताला
तालों और तालीम की नगरी के रूप में ख्यात अलीगढ़ में इस बार मुकाबला रोचक है। यहां जाट मतदाताओं के ऊपर ही निर्भर है कि वह इस बार अपना सांसद किसे चुनेंगे। गठबंधन में यह सीट बसपा के पास है। बसपा और कांग्रेस दोनों ने ही यहां जाट प्रत्याशी पर दांव खेला है। ऐसे में भाजपा सांसद सतीश गौतम इस बार त्रिकोणीय लड़ाई में उलझ गए हैं।

अमरोहा और बुलंदशहर भाजपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन इस बार यहां उसे समीकरणों की लड़ाई में उलझना पड़ गया है। दोनों ही सीटों पर मुस्लिम-दलित समीकरण पर हार-जीत निर्भर करेगी। भाजपा को जाट और दलित वोटों का सहारा है। मुस्लिम वोटर शांत लेकिन एकजुट हैं। भाजपा को मोदी के नाम का सहारा है। दोनों ही सीटों पर जाट वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है। लेकिन इस बार सपा-बसपा के साथ रालोद के भी आ जाने से समीकरण गठबंधन के पक्ष में ज्यादा मजबूत है। ऐसे में मुस्लिम वोटर की भूमिका अहम हो गयी है। दूसरे चरण में पश्चिमी उप्र की आठ सीटों के लिए 18 अप्रेल को मतदान होगा।


ये दिग्गज मैदान में
मथुरा-सिने अभिनेत्री हेमा मालिनी,भाजपा
फतेहपुर सीकरी-फिल्म अभिनेता राज बब्बर, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
आगरा-एसपी सिंह बघेल, भाजपा, प्रदेश सरकार में मंत्री,चार बार सांसद
अमरोहा-दानिश अली,बसपा,कर्नाटक में जेडीएस सरकार बनवाने के सूत्रधार


18 अप्रैल को आठ सीटें
-मथुरा,हाथरस,आगरा, फतेहपुर सीकरी,अलीगढ़,नगीना,अमरोहा और बुलंदशहर


प्रमुख मुद्दे
-गन्ना किसानों का मूल्य भुगतान, चीनी मिलों की मनमानी
-भूमि अधिग्रहण अनियमितता, सिंचाई के लिए पानी
-उद्योगों की बदहाली और रोजगार के लिए पलायन
-जल प्रदूषण और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी की अनुपलब्धता
-पर्यटन का अपर्याप्त विकास और बढ़ती बेरोजगारी

 

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