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बच्चों और युवाओं में राष्ट्रहित की भावना जगाएं: ह्रदय नारायण कौशल


अमृत महोत्सव हमारे जीवन का उत्सव बने, यही महत्व की बात:यतीन्द्र

 

लखनऊ

Updated: August 14, 2021 08:20:25 pm

लखनऊ, महापुरुषों ने अपने समय में परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुरूप संघर्ष किया और सफलता प्राप्त की। हमें उन महापुरुषों के गुणों को अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही देश का प्रत्येक नागरिक अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट और सर्वोच्च विकास के लिए प्रयासरत रहे। वास्तव में यही राष्ट्रहित है। उक्त बातें मुख्य अतिथि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद उ.प्र. के अध्यक्ष मेजर जनरल नरेंद्र बहादुर सिंह ने शनिवार को विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत "राष्ट्रहित सर्वोपरि" नामक महाअभियान के शुभारम्भ पर कही। इस कार्यक्रम के तहत वर्षभर 52 अंकों का आयोजन किया जाएगा। जिसका सजीव प्रसारण सरस्वती कुंज निरालानगर स्थित प्रो. रज्जू भैया सूचना संवाद केंद्र से किया जाएगा।
बच्चों और युवाओं में राष्ट्रहित की भावना जगाएं: ह्रदय नारायण कौशल
बच्चों और युवाओं में राष्ट्रहित की भावना जगाएं: ह्रदय नारायण कौशल
विद्या भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीराम अरावकर के अनुसार, विद्या भारती के मार्गदर्शन में कार्यरत सभी विद्यालयों में भारतीय स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव को आयोजित किया जाएगा। जिसके तहत केंद्र द्वारा निर्धारित देशभक्ति का गीत सामूहिक रूप से गया जाएगा। राष्ट्रभक्ति के भाव से भरे मासिक गीतों का प्रतिदिन गायन होगा। स्वाधीनता संग्राम के बाल बलिदानियों की गाथाएं और पद्म पुरस्कार, परमवीर चक्र प्राप्त लोगों की जानकारी संग्रह कर प्रस्तुतियां तैयार की जाएंगी। देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों के संबंध में जानकारी का संकलन किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थी अपने जिले की कृषि, सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई, उद्योग आदि क्षेत्र में अपने जिले की विकास यात्रा की तथ्यात्मक जानकारियों का संकलन किया जाएगा।
मुख्य अतिथि मेजर जनरल नरेंद्र बहादुर सिंह ने राष्ट्रहित के लिए व्यक्तिगत विकास को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के विकास की बुनियाद उसके नागरिक होते हैं, जिनकी सोच और क्षमता पर ही देश का विकास निर्भर है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता पश्चात हमारा देश उतना विकास नहीं कर सका, जितना होना चाहिए था। इसके लिए हमें आत्मावलोकन की जरूरत है। उन्होंने उचित नेतृत्व की कमी को देश के विकास में सबसे बड़ी रुकावट बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के विकास पर समाज का विकास और समाज के विकास पर देश का विकास निर्भर करता है। ऐसे में हमें अपने कार्य क्षेत्र में उत्कृष्ट और सर्वोच्च विकास के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। किसी क्षेत्र में नेतृत्व के लिए कार्य क्षेत्र का सम्पूर्ण ज्ञान और दक्षता सबसे आवश्यक है। साथ ही नेतृत्वकर्ता में निर्णय लेने की क्षमता, निष्पक्षता, साहस, निष्ठा आदि गुण होने चाहिए। नेतृत्वकर्ता को समय-समय पर आत्मावलोकन करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद उ.प्र. के मंत्री कर्नल ह्रदय नारायण कौशल जी ने कहा कि जहां से हमारी शिक्षा की शुरूआत होती है, वहीं से देश प्रेम की भावना, हिन्दू संस्कृति का ज्ञान कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सनातन धर्म के बारे में बताएं, क्योंकि यही ऐसा धर्म है जो किसी अन्य धर्म का अनादर करना नहीं सिखाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं में राष्ट्रहित की भावना जगाएं और उन्हें मजबूत व प्रभावी बनाएं, जिससे हमारी तीनों सेनाएं और मजबूत हो सकें। विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद उ.प्र. के पूर्व मंत्री जेडब्लूओ प्रह्लाद सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से सेना में बहुत से परिवर्तन हुए हैं। आज हमारी सेनाएं आधुनिक तकनीक से दक्ष हैं। इसलिए तकनीकि का ज्ञान होना आवश्यक है। सेनाओं में तकनीकि ज्ञान के अतिरिक्त सबसे महत्वपूर्ण है इच्छाशक्ति। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी इच्छाशक्ति मजबूत नहीं होगी, तब तक हम कुछ नहीं कर सकते हैं।
कार्यक्रम अध्यक्ष विद्या भारती के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव पूरे वर्ष देशभर में मनाया जाएगा, लेकिन यह हमारे जीवन का उत्सव बने, यही महत्त्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वाधीनता के लिए 90 वर्षों के लिए अनेकों लोगों ने कष्ट सहे और बलिदान दिया, जिसे हमें हमेशा याद रखने की जरूरत है और आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि देश की स्वतंत्रता और अखंडता अक्षुण्य बनी रहे। उन्होंने कहा कि देश के विकास की निरंतरता बनी रहे, ये चुनौती आज के समय में युवा पीढ़ी के समक्ष है।

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