भारतीय संस्कृति में शाकाहार दृणता और शक्ति का प्रतीक है- प्रो. अभय कुमार जैन

उ.प्र.जैन विद्या शोध संस्थान द्वारा ‘‘जैन दर्शन में नारी का स्थान’’ विषय पर वेबिनार का आयोजन

By: Ritesh Singh

Published: 13 Nov 2020, 05:00 PM IST

लखनऊ। उ.प्र.जैन विद्या शोध संस्थान, (संस्कृति विभाग, उ.प्र.) द्वारा मिशन शक्ति के अन्तर्गत जैन दर्शन में नारी का स्थान विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) अभय कुमार जैन और निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ शुरुआत की।

वेबिनार में अपने उद्गार व्यक्त करते हुये प्रो. अभय कुमार जैन ने कहा कि जैन धर्म में शक्ति स्वरूपा नारी बालकाल से किशोरावस्था तक शाकाहारी और संस्कारी बनाती है। भारतीय संस्कृति में शाकाहार दृणता और शक्ति का प्रतीक है। आज विश्व में अधिकांश लोग शाकाहार की ओर आकृष्ट हो रहे हैं। आज विशेष रूप से जम्बूद्वीप हस्तिनापुर से पीठाधीश्वर स्वामी रवीन्द्रकीर्ति और डॉ. जीवन प्रकाश भी जुड़े।

लखनऊ से त्रिशला जैन, डा राका जैन, बरेली से प्रो निवेदिता ,खतौली से डा ज्योति जैन, मेरठ से डा0 मीनाक्षी जैन, मैनपुरी से डा0 शिवानी जैन, मुरादाबाद से रिचा जैन, गोरखपुर से कमलेश जैन, मथुरा से मनीषा जैन ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि भारतीय जैन संस्कृति में माता की आन्तरिक शक्ति ही बच्चों को करुणा एवं प्रेम की भाषा सिखाकर क्षमा जैसे शस्त्र से सुसज्जित कर शक्तिशाली नागरिक बनाती है।

Ritesh Singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned