कौन हैं अजय मिश्रा जो दंगल करवाकर बनें देश के गृह राज्यमंत्री, सरकार किसी की हो जलवा सिर्फ महाराज का

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई किसानों के साथ हिंसा ने देश को झकझोरकर रख दिया है। इसमें अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। सरकार ने मृतकों को 45 लाख रु मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का ऐलान भी कर दिया। किसानों के मुद्दे पर पहले से बैकफुट पर चल रही सरकार के लिए ये मुश्किल समय है।

By: Dinesh Mishra

Updated: 05 Oct 2021, 01:07 AM IST

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सांसद बनकर मोदी कैबिनेट में गृह राज्य मंत्री बनने वाले अजय मिश्रा क्षेत्र में काफी दबंग नेता की पहचान रखते हैं। केंद्रीय मन्त्री अजय मिश्रा उर्फ़ टेनी कुश्ती वाले महाराज के नाम से मशहूर हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में उन्हें महाराज कहकर भी लोग सम्मान देते हैं।

कुश्ती और दंगल का शौक रखने वाले मंत्री अजय मिश्र कभी बतौर खिलाड़ी मैदान में नहीं उतरे। मंत्री अजय मिश्रा अपने पिता के नाम पर हर साल कुश्ती का आयोजन करवाते हैं। जिसमें देशभर से राजनितिक और खेल से जुड़े लोगों को सम्मानित किया जाता है.

सरकार किसी की हो क्षेत्र में जलवा सिर्फ महाराज का

हर साल कुश्ती का आयोजन करवाने और परिवार में कुश्ती भरा माहौल होने के बावजूद अजय मिश्रा का मन दंगल लड़ने से ज्यादा इसके आयोजन में लगता था। बस यहीं से राजनीती के दांव पेंच भी सीखते गए और 2007 की बसपा सरकार में भारी विरोध के बावजूद जिला पंचायत सीट पर बतौर सदस्य राजनीती में पहला कदम रखा था।

क्षेत्रीय राजनीती में दांव पेंच आजमा चुके अजय मिश्रा ने साल 2012 के विधानसभा चुनावों में सपा की तेज लहर तोड़ते हुए भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए। इसके बाद होने वाले जिला पंचायत और अन्य क्षेत्रीय चुनावों में भी महाराज का जलवा कायम रहा, जिसमें ज्यादातर उम्मीदवार उन्हीं के अघोषित समर्थन से जीते थे। जिसके बाद से इनका राजनीतिक कद बढ़ता ही गया।

2014 लोकसभा चुनावों में पहली बार भाजपा के सहारे अजय मिश्रा सांसद बने। 2019 की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में इन्हें शामिल करते हुए केन्द्रीय मंत्री बनाया गया. जिससे बाद से ही आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में अजय मिश्न को बड़े ब्राम्हण चेहरे के तौर पेश किया जा रहा है।

मुद्दा विहीन विपक्ष को हवा दे गया लखीमपुर खीरी कांड

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर मुद्दा विहीन विपक्ष को लखीमपुर खीरी कांड ने एक नया बड़ा मुद्दा दे दिया। जिसमें अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। ये मुद्दा भी ऐसा जिसमे भाजपा के ब्राम्हण चेहरे को ही टार्गेट कर दिया। जिसमें केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा पर एफआईआर दर्द हो चुकी है। हालांकि इस मामले को उपद्रवियों द्वारा हिंसा बताते हुए क्रॉस एफआईआर भी केंद्रीय मंत्री की तरफ से दर्ज कराई जा चुकी है।

कितना असर पड़ेगा 2022 विधानसभा चुनावों में

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी के गृह क्षेत्र में किसानों के प्रदर्शन से शुरू हुआ ये बवाल फिलहाल थमता नजर आ रहा है, लेकिन पहले से ही सरकार के लिए परेशानी बन चुके किसान आंदोलन को इस बवाल के बाद प्रदेश में क्षेत्रीय लोगों का समर्थन भी मिल रहा है. जिससे योगी आदित्यनाथ के लिए चुनावों से ठीक पहले समस्याएँ बढ़ा दी हैं।

साथ ही सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे किसानों के विडिओ को अब युवाओं का साथ मिल रहा है, जिसको देखते हुए सरकार ने लखीमपुर खीरी क्षेत्र में इन्टरनेट बंद कर दिया है, वहीं प्रदेश भर में पुलिस की कार्यशैली पर लगातार उगलियाँ उठ रही हैं, जिससे सरकार बैकफुट पर है।

गोरखपुर में पुलिस के द्वारा हुई व्यापारी की हत्या का मामला हो या अब मंत्री की गाड़ी से किसानों की मौत से शुरू हुआ बवाल, फिलहाल सभी घटनाओं ने क्षेत्र में भाजपा सरकार के प्रति आक्रोश को बढ़ाने का काम किया है। ऐसे में जनाधार खो चुके विपक्ष को एक बार फिर से एक बड़ा मौका मिल गया है। जिसका सीधा असर योगी सरकार के आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

Dinesh Mishra
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