scriptWill medical students from Ukraine could complete studies in India | Russia Ukraine War: क्या भारत में पढ़ाई पूरी कर पाएंगे यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र? जानिए क्या कहता है नियम | Patrika News

Russia Ukraine War: क्या भारत में पढ़ाई पूरी कर पाएंगे यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र? जानिए क्या कहता है नियम

एक आँकड़ों के मुताबिक अलग-अलग देशों में एक लाख से ज्यादा भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले यूक्रेन में क़रीब 18 हजार बच्चे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के भी बहुत से बच्चे हैं जो वहाँ मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। नेशनल मेडिकल कमीशन यानि NMC ने अभी हाल में ही 4 मार्च को एक जारी सर्कुलर में FMGE परीक्षा पास करने वाले छात्रों को स्टाइपेंड देने की बात कही है।

लखनऊ

Published: March 07, 2022 01:05:42 pm

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस भारत लौटे क्या भारत में अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएंगे भी या नहीं? ये सवाल बच्चों से लेकर उनके माँ-बाप के मन में उमड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के हजारों बच्चे भी इनमें शामिल हैं जो यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गये थे। दरअसल, विदेश से मेडिकल की पढ़ाई ख़त्म करने के बाद बच्चों को भारत में फ़ॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्ज़ामिनेशन (FMGE) की परीक्षा देनी होती है। इसे पास करने के बाद ही भारत में डॉक्टर की मान्यता मिलती है तब जाकर आप प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है और फिर आप मेडिकल प्रैक्टिस कर सकते हैं। 300 नंबर की इस परीक्षा को पास करने के लिए 150 नंबर लाने पड़ते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ वेबसाइट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले सिर्फ पंद्रह प्रतिशत बच्चे ही भारत में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन पास कर पाते हैं।
Russia Ukraine War: क्या भारत में पढ़ाई पूरी कर पाएंगे यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र?
Russia Ukraine War: क्या भारत में पढ़ाई पूरी कर पाएंगे यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र?
एक आँकड़ों के मुताबिक अलग-अलग देशों में एक लाख से ज्यादा भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले यूक्रेन में क़रीब 18 हजार बच्चे हैं। ऐसे में ये संभव नहीं है कि उन्हें भारत में एडमिशन दे पाएँ। अगर यूक्रेन के हालात ज्यादा खराब होते हैं तो कोई दूसरी रणनीति बनाई जा सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सिर्फ सलाह दे सकता है लेकिन अभी प्राथमिकता वहां से बच्चों को निकालने की है। हालांकि मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि पोलैंड अपने विश्वविद्यालयों में यूक्रेन से बचाए गए मेडिकल छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए जगह देने के लिए राजी हो गया है।
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NMC ने जारी किया था सर्कुलर

आपको बता दें कि नेशनल मेडिकल कमीशन यानि NMC ने अभी हाल में ही 4 मार्च को एक जारी सर्कुलर में FMGE परीक्षा पास करने वाले छात्रों को स्टाइपेंड देने की बात कही है। NMC ने सर्कुलर में कहा है कि ऐसे और भी विदेशी मेडिकल छात्र हैं जिनकी इंटर्नशिप उन परिस्थितियों की वजह से पूरी नहीं हो पाई, जो उनके हाथ में नहीं हैं, जैसे कोविड-19 महामारी और युद्ध। इन विदेशी मेडिकल छात्रों की पीड़ा और तनाव को ध्यान में रखते हुए, भारत में इंटर्नशिप के बाकी हिस्से को पूरा करने के लिए उनके आवेदन को योग्य माना जाता है। इसी तरह, राज्य चिकित्सा परिषद इसे प्रोसेस कर सकते हैं, बशर्ते छात्रों ने भारत में इंटर्नशिप पूरा करने के लिए, आवेदन करने से पहले एफएमजीई क्लीयर कर लिया हो।
यूक्रेन से लौटे छात्रों पर लागू नहीं

लेकिन यह सर्कुलर यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के मामले में लागू नहीं होता। जानकारों की मानें तो इस सर्कुलर का उन मेडिकल छात्रों पर कोई असर नहीं पड़ता, जिन्हें भारत सरकार यूक्रेन से बचाकर लाई है। वजह यह कि इसमें कई छात्र ऐसे हैं जो तीसरे वर्ष में, दूसरे वर्ष में, या चौथे वर्ष में हैं। जिन्होंने अपनी डिग्री भी पूरी नहीं की है। स्टाइपेंड के लिए, किसी को भी पहले डिग्री पूरी करनी होती है, उसके बाद एग्ज़ाम पास करना होता है, फिर इंटर्नशिप मिलती है।
विदेश में पढ़े सभी बच्चे नहीं बन पाते डॉक्टर

आपको बता दें कि भारत में क़रीब 88 हज़ार एमबीबीएस की सीटें हैं जिसके लिए क़रीब आठ लाख बच्चे परीक्षा देते हैं। इन सीटों में पचास प्रतिशत सीटें प्राइवेट हैं. भारत में किसी भी प्राइवेट एमबीबीएस की सीट पर एडमिशन का खर्चा 70 लाख से 1 करोड़ रुपये है। ऐसे में हर साल हजारों भारतीय छात्र अलग-अलग देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाते हैं।
2015 से 2018 तक के आँकड़ों पर नज़र डालें तो पाएंगे इन तीन वर्षों में चीन, रूस यूक्रेन समेत तकरीबन 10 देशों में कुल 111384 छात्र पढ़ने गये थे जिनमें से मात्र 7613 छात्र ही ऐसे थे जिन्होंने फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट एग्जामिनेशन पास किया और डॉक्टर बने। यानि विदेश से मेडिकल की डिग्री के बाद भी सब बच्चे भारत में डॉक्टर नहीं बन पाते।
ये रहे आँकड़े -

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क्या है यूक्रेन में पढ़ाई का शेड्यूल?

यूक्रेन में पहले तीन साल तक थ्योरी पढ़ाई जाती है फिर चौथे साल से प्रैक्टिकल शुरू होते हैं। जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल जाकर डॉक्टरी का काम सीखना होता है। वहीं यूक्रेन से लौटे एक छात्र के मुताबिक रूस के हमले के बाद मेडिकल पढ़ाने वाले टीचर भी यूक्रेन छोड़कर भाग गए हैं। वहीं ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जो व्यवस्था थी वो भी रूसी हमलों में तहत-नहस हो गई है। इसके अलावा मेडिकल की पढ़ाई का मुख्य हिस्सा प्रैक्टिकल पर आधारित होता है। ऐसे में स्थिति सामान्य होने पर ऑन लाइन पढ़ाई का भी कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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