इन चार डॉक्टरों को भी मिला यश भारती, जानिये मेडिकल क्षेत्र में इनका अचीवमेंट

इन चार डॉक्टरों को भी मिला यश भारती, जानिये मेडिकल क्षेत्र में इनका अचीवमेंट

आयुर्वेद में अद्वितीय योगदान देने वाले डॉ. टी प्रभाकर का जन्म 20 जुलाई 1947 को हुआ। वर्तमान समय में डॉ. प्रभाकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान में कार्यरत हैं।

लखनऊ। सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार यश भारती से प्रदेश की 46 विभूतियों को सम्मानित किया गया। चिकित्सा क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले चार डॉक्टर भी इसमें शामिल थे। आइये इन चार डॉक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र में इनकी उपलब्धियों के बारे में जानते हैं।

प्रो. रविकांत

RAVIKANT


डॉ. (प्रो.) रविकांत लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के उपकुलपति हैं। वह लब्ध प्रतिष्ठ शिक्षाविद एवं ओंकोसर्जन हैं। डॉ. रविकांत का जन्म 14 सितम्बर 1956 को फैजाबाद में हुआ। इन्होंने केजीएमयू से वर्ष 1977 में एमबीबीएस और एमएस 1982 में पास किया। डॉ. रविकांत ने भारत में ही नहीं विश्व के अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में काम किया है, जिसमे एंडोक्राइन सर्जरी विभाग एम्स नई दिल्ली, पीजीआई रोहतक, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली तथा लन्दन विश्वविद्यालय यूके उल्लेखनीय है।

इन्होंने क्लीनिकल असिस्टेंट/रिसर्च फेलो /विजिटिंग फेलो के रूप में विश्व की प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे नेशनल मेडिकल लेजर सेंटर (लंदन यूनिवर्सिटी ), मिडिलेक्स हॉस्पिटल लंदन, मेयो क्लीनिक राक्स्टर मिनिसोटा, यूएसए तथा नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ कैंसर मिलान, इटली में कार्य किया है। सर्जरी के क्षेत्र में इनके 275 व्याख्यान का प्रकाशन हो चुका है। इनका ब्रेस्ट कैंसर के क्षेत्र में मॉलिक्यूलर शोध चिकित्सा के क्षेत्र में एक अभिनव खोज है। जो कैंसर चिकित्सा में मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है। डॉ. रविकांत ने आधुनिक चिकित्सा का पाठ्यक्रम निर्धारित किया जिसमें शिक्षकों का प्रशिक्षण, शल्य चिकित्सा कौशल, ब्लू प्रिंटिंग एमसीक्यू लेखन को  शामिल किया गया। इनके नेतृत्व में केजीएमयू में पहला अंग प्रत्यर्पण किया गया। डॉ. रविकांत को जापान यंग सोसाइटी का यंग सर्जन सम्मान (1993), अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ लेजर मेडिसिन का बेस्ट पेपर सम्मान (1992), यूके का कॉमनवेल्थ फेलोशिप सम्मान (1991), डब्ल्यूएचओ फेलोशिप सम्मान (2000), दिल्ली राज्य का दिल्ली राज्य सम्मान वर्ष (2004) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
 

डॉ. नरेश त्रेहन

NARESH

डॉ. नरेश त्रेहन का जन्म 12 अगस्त 1946 को हुआ था। डॉ. त्रेहन ने एमबीबीएस की परीक्षा साल 1968 में केजीएमयू से उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 1971 वह न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के मैनहाटन मेडिकल सेंटर यूएसए गये। जहाँ से इन्होंने अमेरिकन बोर्ड ऑफ़ सर्जरी और अमेरिकन बोर्ड ऑफ़ कार्डियोथेरोसिक सर्जरी में डिप्लोमा किया। इसके बाद वह अमेरिका में 1987 तक काम करते रहे। डॉ. त्रेहन इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी मिनियापोलिस यूएसए (2004-2005) के अध्यक्ष रहे तथा तीन प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की मानद उपाधियाँ प्राप्त की। वर्तमान समय में डॉ. त्रेहन मेदांता-मेडिसिटी तथा मेदांता हार्ट इंस्टिट्यूट के चेयरमैन तथा मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वह साल 2007 से 2009 तक सीनियर कंसल्टेंट कार्डियो वैस्कुलर सर्जन इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल नई दिल्ली, वर्ष 1988 से 2007 तक फाउंडर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंड चीफ कार्डियो एंड वैस्कुलर सर्जन एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर नई दिल्ली में कार्यरत रहे। इसके आलावा चिकित्सा विज्ञान में अध्यापन कार्य करते हुए वर्ष 1981 से 1988 तक असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ़ सर्जरी (न्यूयॉर्क मेडिकल यूनिवर्सिटी ), वर्ष 1971 से 1974 तक क्लीनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर इन सर्जरी (न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर यूएसए ) और टीचिंग अस्सिटेंट इन सर्जरी (न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर यूएसए ) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। डॉ. त्रेहन ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के नंबर वन ह्रदय रोग विशेषज्ञों में से एक हैं।

डॉ. (ब्रिगेडियर) टी प्रभाकर

T PRABHAKAR

आयुर्वेद में अद्वितीय योगदान देने वाले डॉ. टी प्रभाकर का जन्म 20 जुलाई 1947 को हुआ। वर्तमान समय में डॉ. प्रभाकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान कार्यरत हैं। इन्होंने साल 2006 में इस संस्थान के निदेशक पद पर ज्वाइन किया, जिसके बाद संस्थान ने कई महत्वपूर्ण कामों में असफलता प्राप्त की। डॉ. प्रभाकर ने वर्ष 2006 में 100 एमबीबीएस छात्रों की प्रवेश क्षमता हेतु एमसीआई के मानकाअनुसार फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं उपकरण आदि की कमी को पूर्ण किया। इसके बाद वर्ष 2011 में यहाँ पर पीजी कोर्स प्रारभ किये गए। वर्तमान में यहाँ 50 पीजी सीटें संचालित हैं। डॉ. टी प्रभाकर की ओर से प्रदेश का एकमात्र शासकीय पैरामेडिकल एवं फॉर्मेसी महाविद्यालय स्थापित किया गया। जिसमे 740 स्टूडेंट्स की प्रवेश क्षमता थी। वर्तमान में इस महाविद्यालय में 2 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। संस्थान की ओर से मरीजों को जागरूक किये जाने हेतु 100 से अधिक शिविरों का आयोजन किया गया है। इसके आलावा यहाँ पर लाखों ग्रामीण मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया है। इसके आलावा गरीब मरीजों को अब तक 2846 यूनिट ब्लड मुफ्त में उपलब्ध कराया गया है। इसके आलावा गरीब मरीजों के मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने हेतु नित्य अन्नदान ट्रस्ट का गठन किया गया है।

डॉ. सुभाष गुप्ता

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देवरिया उत्तर प्रदेश के डॉ. मुरारे लाल गुप्ता के पुत्र डॉ. सुभाष गुप्ता का जन्म 12 जून 1963 को हुआ। इन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई एम्स दिल्ली से की। इन्होंने करीब 6 साल यूके में प्रैक्टिस की, जिसके बाद गंगाराम हॉस्पिटल नई दिल्ली में लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में कार्य किया। अब तक डॉ. गुप्ता 1800 सफल लिवर ट्रांसप्लांट कर चुके हैं जोकि एक रिकॉर्ड है। भारत सहित एशिया महाद्वीप के देशों के लिए कम खर्च लिवर प्रत्यारोपण का कार्य आपके द्वारा उपलब्ध कराया गया। उन्होंने भारत की ओर से वर्ल्ड ट्रांसप्लांट कांग्रेस-2014 में  व्याख्यान दिया। ये बीएमजे इंडिया अवार्ड के लिए सर्जिकल टीम ऑफ़ द ईयर की कटेगरी में फाइनलिस्ट थे। लिवर की गंभीर बीमारी और लिवर प्रत्यारोपण के क्षेत्र में निर्देश तय करने वाली कमेटी के सदस्य रह चुके हैं। डॉ. गुप्ता की ओर से लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में तमाम पुस्तकें लिखी गयीं जो चिकित्सा जगत के छात्रों की पढ़ाई में प्रयोग की जाती हैं। अब तक इनकी ओर से लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में 30 शोध पत्र प्रकाशित किये जा चुके हैं।


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