सीएए हिंसा मामला, 450 उपद्रवियों के खिलाफ योगी सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई, हड़कंप

फोटो और विडियो फुटेज के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान करके बड़ी कार्रवाई की गई है...

लखनऊ. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए जो रिकवरी नोटिस जारी हुए हैं, उसका जवाब देने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लोगों को सात दिनों का वक्त दिया है। प्रदेश के तमाम जिलों में हिंसा फैलाने के मामले में शामिल 450 से ज्यादा कथित उपद्रवियों को भेजे गए इन नोटिसों में सभी की निजी संपत्ति को जब्त करने की बात कही गई है। अगर कोई नुकसान की भरपाई करने में सक्षम नहीं होगा तो उसकी संपत्ति को जब्त करके उसकी नीलामी कराई जाएगी। इसमें लखनऊ जिले में सर्वाधिक 152 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। लखनऊ में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।


रिकवरी के लिये भेजा नोटिस

प्रदेश सरकार ने कहा कि जिनको नोटिस भेजी गई हैं अगर उन्होंने तय समय सीमा के अंदर नोटिस का जवाब नहीं दिा, या उनका जवाब संतोषजनक नहीं लगा सरकार आगे की कार्रवाई शुरू करेगी। दरअसल सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उपद्रवियों की पहचान करने के बाद उनकी संपत्ति जब्त करके नुकसान की भरपाई की जाएगी। सीएम योगी ने जिलेवार कमेटी बनाकर फोटो और विडियो फुटेज के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान करके नोटिस भेजने का निर्देश दिया था।


लखनऊ में 152 नोटिस

विभिन्न जिलों में भेजे गए नोटिसों में लखनऊ जिले में सर्वाधिक 152 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं। लखनऊ में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा मेरठ में 148, बिजनौर में 43 और मुजफ्फरनगर में 40 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।


हाईकोर्ट दे चुका है आदेश

योगी सरकार ने 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के आधार पर नोटिस भेजे हैं, जिसके मुताबिक विरोध प्रदर्शनों या दंगों के दौरान नष्ट की गई सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार दोषियों से वसूली की अनुमति देता है। हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान का आकलन किया जाएगा और संबंधित विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक निगम और संपत्ति के मालिक राजनीतिक दलों, व्यक्तियों से नुकसान के भरपाई की वसूली का दावा करेंगे।


नोटिस पर भी उठ रहे सवाल

वहीं कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जो पुलिसिया कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। एक मामले में पुलिस ने ऐसे शख्स को नोटिस भेज दिया, जिसकी मौत 6 साल पहले हो गई थी। दरअसल, यह शख्स हैं फिरोजाबाद के बन्ने खां, जिनका इंतकाल 6 साल पहले ही हो गया था। जब पुलिस का नोटिस उनके परिजनों को मिला तो यह मामला सामने आया। वहीं दूसरी तरफ संभल जिले में भी दो एफआईआर में पुलिस की कार्रवाई में अंतर नजर आता है।

CAA
नितिन श्रीवास्तव
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