यूपी के किसान अब बनेंगे उद्योगपति, योगी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, 17 विभाग मिलकर करेंगे ये काम

सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसानों की आय दुगुनी करने की दिशा में एक जरूरी कदम उठाया है।

लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ ने किसानों की आय दुगुनी करने की दिशा में एक जरूरी कदम उठाया है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब उन्हें सिखाया जाएगा कि वह किस प्रकार से उद्यमी बन सकते हैं और अपनी उपज को उत्पाद बनाकर बाजार में कैसे बेच सकते हैं। सीएम योगी के निर्देश पर फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाईजेशन (एफपीओ) की क्रियान्वयन नियमावली जारी कर दी गई है। सीएम योगी की पहल पर प्रदेश का यह पहला मौका है, जब 17 विभाग मिशन मोड में एक साथ किसानों के लिए काम करेंगे।

किसान बनेंगे आत्मनिर्भर

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति 2020 महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसकी मकसद प्रदेश के हर किसान परिवार को उद्यमी के रूप में संगठित कर खेती बाड़ी में स्थापित करते हुए पूरा आत्मनिर्भर बनाना है। नीति में एफपीओ के गठन के लिए कम से कम 10 किसान अलग-अलग परिवारों के होने चाहिए। इसके बाद रजिस्ट्रेशन और उससे संबंधित पहले साल की विधिक कार्रवाई पूरी करने के लिए करीब 36,500 रुपए का खर्च संभावित है। एफपीओ के रजिस्ट्रेशन के लिए राज्य स्तर पर कंपनी सेक्रेटरी का एक पैनल बनाया जाएगा, जो एफपीओ के प्रशासनिक, वित्तीय, वैधानिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन में आ रही परेशानियों को दूर करने में सहयोग करेगा। इसमें चयनित कंपनी सेक्रेटरी के अलग-अलग कामों के लिए फीस निर्धारित की जाएगी, जिनके माध्यम से इच्छुक एफपीओ अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।

इनकी होगी महत्वपूर्ण भूमिका

एफपीओ को क्रियाशील बनाने और शेयर होल्डर्स की संख्या बढ़ाने में राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन ईकाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया, योग्यता और उनकी जिम्मेदारियां निर्धारित कर दी गई हैं। इन विशेषज्ञों की ओर से अलग-अलग विभागों से समन्वय कर उनके द्वारा संचालित परियोजनाओं से कन्वर्जेंस सपोर्ट दिया जाएगा। इससे एफपीओ के व्यवसायिक काम शुरू हो जाएंगे। राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन ईकाई से संबद्ध चार्टर्ड अकाउटेंट या कंपनी सेक्रेटरी संबंधित एफपीओ के बैंक खाते और अन्य प्राप्तियों, खर्चों का विवरण और सभी आवश्यक विधिक, वित्तीय प्रपत्र, फार्म तैयार कराने में एफपीओ को परामर्श और सहयोग भी देंगे। एफपीओ गठन के तीन सालों तक यह काम राज्य स्तरीय परियोजना प्रबंधन ईकाई की ओर से किया जाएगा। सरकार की ओर से एफपीओ को रिवाल्विंग फंड की व्यवस्था में भी मदद की जाएगी। नीति के मुताबिक एफपीओ को पांच लाख तक के लोन पर ब्याज दर में से चार प्रतिशत का अनुदान देने की भी योजना है। एफपीओ से जुड़ी हर जानकारी के लिए एक पोर्टल भी बनाया जाएगा, जिस पर एफपीओ से जुड़ी सभी प्रकार की सूचनाएं उपलब्ध रहेंगी।

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नितिन श्रीवास्तव
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