जिले में बाढ़ से प्रभावित गांवों का सीएम योगी ने किया हवाई सर्वेक्षण, अधिकारियों के कंसे पेच

सीएम योगी ने कहा-बाढ़ पीड़ितों के प्रति नहीं हुए संवेदनशील तो होगी कार्यवाई.

By: Abhishek Gupta

Published: 18 Aug 2017, 07:10 PM IST

बलरामपुर. बाढ़ग्रस्त जिलों के निरीक्षण के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बलरामपुर पहुंचे। जिले के हवाई दौरे के बाद सीएम का हेलीकॉप्टर जिले के स्पोर्ट्स स्टेडियम में पहुंचा। स्टेडियम में ही आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचते ही सीएम ने डीएम बलरामपुर को बुलाकर जिले में बाढ़ से प्रभावित गांवों व लोगों और दिये जाने वाले राहत व बचाव कार्य की जानकारी ली। सीएम योगी ने मंच से बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री भी वितरित की। बाढ़ पीड़ितों को सम्बोधित करते हुए सीएम योगी आदित्नाथ ने कहा कि जिले के 289 गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। बाढ़ पीड़ितों को आश्वासन देते हुए कहा कि इस आपदा में हम सब को मिल जुलकर आगे आना चाहिए। सीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिला प्रशासन सुनिश्चित करे कि कोई भी अधिकारी बाढ़ के समय छुट्टी लेकर ना जाए।

सीएम ने कहा कि यदि कोई अधिकारी बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदनशील नहीं हुआ तो ऐसे लापरवाह व्यक्ति के खिलाफ शासन सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने आगे कहा कि नेपाल के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ वहां के छोड़े गये पानी के कारण आता है। उन्होनें जिला प्रशासन को बाढ़ से निपटने के लिए ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश भी दिये। बलरामपुर सदर विधानसभा के बाद सीएम ने उतरौला और तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा भी किया।

जिले में बाढ़ का कहर अभी जारी है। प्रशासन द्वारा दी जा रही मदद बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में नकाफी साबित हो रहे हैं। अभी दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां प्रशासनिक अमला अभी झांकने तक नहीं पहुंचा। सरकारी दावे हकिकत से बहुत अलग दिखाई पड़ रहे है। किसी भी सवाल के जवाब में नॉव की कमी बता कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आ रहे हैं।

बाढ से अभी भी सैकड़ो गांव प्रभावित हैं। दर्जनों गांव का मुख्यालय से संपर्क कट गया है। ग्रामीण अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए घुटने तक पानी में आने को मजबूर हैं। वहीं पशुओं के लिए चारा भी एक बड़ी समस्या है। जिला प्रशासन बाढ पीड़ितों की मदद करने का दावा कर रहा है। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। प्रशासन के मुताबिक 3150 लोगों का उपचार स्वास्थ्य टीम ने किया है। जबकि किसी भी गांव में स्वास्थ्य टीम देखने को नहीं मिली है। न ही किसी बाढ़ चैकी व शिविर पर कोई स्वास्थ्य कर्मी नजर आया।

वहीं पशुओं के चारे के लिए 25 कुन्तल भूसा बांटे जाने की बात प्रशासन कर रहा है। सच्चाई यह है कि मुख्यालय के आस पास के गांव में छिटपुट स्थानों पर भूसे दिए गए हैं। जबकि आवश्यकता दूर दराज के बाढ़ ग्रस्त लोगों को है।कोड़रीघाट पुल, बलरामपुर-तुलसीपुर बौद्ध परिपथ पर सिसई गांव सहित अन्य ऊंचे स्थानों पर लोगों ने अपने पशुओं के साथ शरण ले रखी है। जिम्मेदारों ने इन स्थानों पर भी पशुओं के चारे का इंतजाम करना मुनासिब नहीं समझा है।

बाढ़ की त्रासदी से गावों के अलावा अब उतरौला कस्बा भी चपेट में आ गया है। उतरौला कस्बे जे मोहल्ला आर्यनगर में स्थित मान्यवर कांशीराम कालोंनी निवासी कल्लू राम, सनी गुप्ता, फूल चंद्र गुलाब सिंह समेत तमाम लोंगों ने बताया कि घरो में तीन चार फीट पानी घुस गया है। जिसके चलते जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इंडिया मार्का नल भी डूब गए हैं जिससे लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। कालोंनी कस्बे से सटा होने के बावजूद किसी अधिकारी व जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने से लोंगों में आक्रोश व्याप्त है। बाढ़ के चलते दिन रात लोग चैकियों पर समय व्यतीत करते हैं। शुक्रवार को डीएम राकेश मिश्र, सांसद व चारों विधायकों ने एनडीआरएफ टीम के साथ अलग अलग स्थानों पर बाढ पीड़ितों को लंच पैकेट वितरित किया। सदर विधायक पल्टू राम ने बेलहा, मिर्जापुर, रसूलाबाद सहित दर्जनों गांव में राहत सामग्री पहुंचाई। उनके साथ एनडीआरएफ की टीम में मनीष चैबे, गनेश, राकेश, नरेन्द्र, सूर्यकान्त सहित अन्य लोग शामिल रहे।

Abhishek Gupta
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