‘साथ’ से सरकारी अस्पतालों की सूरत बदलेगी

रिक्त पदों पर भर्ती, दवाओं की शृंखला बढ़ाने और निजी क्षेत्र का सहयोग लेने पर नीति आयोग से रजामंदी हुई है।

By: आलोक पाण्डेय

Published: 11 Sep 2017, 04:05 PM IST

लखनऊ. गोरखपुर, फिर फर्रुखाबाद... बच्चों की मौत के बाद उठे बवंडर के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने का खाका तैयार किया है। जल्द ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों की सूरत बदली-बदली नजर आएगी। सेहत के मामले में संजीदा हुई सरकार ने ‘साथ’ प्रोजेक्ट को यूपी में भी लागू करने का इरादा बनाया है। इसके अतिरिक्त रिक्त पदों पर भर्ती, दवाओं की शृंखला बढ़ाने और निजी क्षेत्र का सहयोग लेने पर नीति आयोग से रजामंदी हुई है। एक अन्य फैसले के मुताबिक इंसेफेलाइटिस से लडऩे के लिए तय किया गया है कि अमेरिका के काबिल डाक्टर्स अब यूपी के डाक्टर्स को प्रशिक्षण देंगे।

एक साल के अंदर रिक्त पदों पर होंगी भर्तियां

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे को दुरुस्त किया जाएगा। इस संदर्भ में बीते दिवस नीति आयोग तथा यूपी सरकार के संयुक्त कार्यदल की बैठक में तय किया गया कि अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को दुरुस्त किया जाएगा। मैराथन बैठक में अपर मुख्य सचिव संजीव सरन, प्रमुख सचिव(स्वास्थ्य) प्रशांत त्रिवेदी के साथ नीति आयोग के सलाहकार आलोक कुमार भी मौजूद थे। बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अति आधुनिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएंगी। इसी क्रम में रिक्त पदों पर भर्तियां जल्द शुरू होंगी। आलोक कुमार ने बताया कि भर्तियों के साथ-साथ उपलब्ध दवाओं की सूची को विस्तार दिया जाएगा एवं लंबित भुगतान के लिए फंड जारी होगा। उन्होंने कहाकि सबसे महत्वपूर्ण है चिकित्सा सेवा को सुधारने के लिए निजी क्षेत्र से सहयोग लेने पर रजामंदी हुई है। इसके अतिरिक्त सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की किल्लत को खत्म करने के लिए लोकल परचेज का सहारा लिया जाए।

‘साथ’ के सहारे सेहत के इंतजाम दुरुस्त होंगे

नीति आयोग के साथ बैठक में असम और कर्नाटक की तरह यूपी को ‘साथ’ यानी सुस्टानेबिल एक्शन फॉर ट्रांसफार्मिंग ह्यूमन कैपिटेल) प्रोजेक्ट में शामिल करने का फैसला किया गया है। इस प्रोजेक्ट में नीति आयोग की निगरानी में एक तंत्र विकसित किया जाना है, जोकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, सिस्टम की निगरानी और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने की दिशा में काम करेगा। इस प्रोजेक्ट से जुडऩे के लिए 16 प्रदेशों ने रुचि दिखाई है, लेकिन नीति आयोग ने अभी सिर्फ असम और कर्नाटक का चयन किया है। इस प्रकार अब यूपी इस प्रोजेक्ट का तीसरा प्रांत होगा।

12 सितंबर को आएंगे अमेरिका के नामचीन डाक्टर्स

स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की दिशा में एक और फैसला किया गया है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के मुताबिक, गोरखपुर समेत पूर्वांचल के तमाम जिलों में चार दशक से खौफ का पर्याय बने इंसेफेलाइटिस से निबटने के लिए अमेरिका के डाक्टर्स को बुलाया गया है। अमेरिकी डाक्टर्स की टीम 12 सितंबर को लखनऊ पहुंचकर सरकारी डाक्टर्स को इंसेफेलाइटिस के इलाज और रोकथाम के तौर-तरीके समझाएगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्वांचल के साथ-साथ ऐसे जिलों के डाक्टर्स भी शामिल रहेंगे, जहां भविष्य में इंसेफेलाइटिस फैलने की आशंका है। सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहाकि, अब सरकार ने तय कर लिया है कि मौत एक हो दस, उन्होंने बताया कि सरकार की कोशिश है कि इंसेफेलाइटिस के मरीजों का प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही समुचित इलाज किया जाए।

आलोक पाण्डेय
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