यूपी में तीन दर्जन से अधिक अक्षम और भ्रष्ट अफसर जबरन होंगे रिटायर, अनिवार्य सेवानिवृत्त देने के लिए हो रही स्क्रीनिंग

- 50 साल से ज्यादा उम्र वाले भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर भी लटकी तलवार

By: Neeraj Patel

Updated: 12 Sep 2020, 07:24 PM IST

लखनऊ. योगी आदित्यनाथ सरकार यूपी के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को अक्षमता के आधार पर जबरन रिटायर करने जा रही है। ऐसे तीन दर्जन से अधिक अफसरों को चिन्हित किया गया है जिन्हें किसी भी समय अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। इसी के साथ सरकार ने पुलिस विभाग की छवि सुधारने के लिए ऐसे भ्रष्ट पुलिसकर्मियों जिनकी उम्र 50 साल है उनकी स्क्रीनिंग का फैसला किया है। डीजीपी मुख्यालय ने पुलिस की सभी इकाइयों के प्रमुखों, सभी आईजी रेंज और एडीजी जोन को नाकारा पुलिसवालों की सूची भेजने को कहा है। इसके तहत 31 मार्च 2020 को 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों की स्क्रीनिंग होगी।

31 जुलाई तक बनानी थी सूची

योगी सरकार 50 साल से अधिक आयु वाले सभी कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। किसी भी विभाग में अपेक्षित प्रदर्शन न करने वाले कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। मुख्य सचिव आरके तिवारी ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों और सचिवों से स्टाफ के कामकाज की समीक्षा करने का पत्र लिखा है। नकारा कर्मचारियों की 31 जुलाई तक सूची बनाने को कहा गया था।

तीन दर्जन से ज्यादा अफसर चिन्हित

सूची बनकर तैयार है। 30 ऐसे अफसरों को चिह्नित किया गया जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इसमें 17 समीक्षा अधिकारी, आठ अनुभाग अधिकारी, तीन अनुसचिव और दो उप सचिव शामिल हैं। इन सबके खिलाफ पूर्व में हुई जांचों, कार्रवाई और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है।

यह है नियम

ऐसी व्यवस्था है कि नियुक्ति प्राधिकारी किसी भी समय किसी सरकारी सेवक को (चाहे वह स्थाई हो या अस्थाई) नोटिस देकर बिना कोई कारण बताए उसके 50 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के बाद रिटायर कर सकता है। इसी नियम के तहत शासनादेश जारी करके नियुक्ति प्राधिकारियों से अक्षम कर्मचारियों को चिह्नित करके रिटायर करने को कहा जाता रहा है।

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