गोवंश के लिए भूसा बैंक बनाएगी योगी सरकार, शहरों से हटेंगी अवैध डेयरी

गोवंश के लिए भूसा बैंक बनाएगी योगी सरकार, शहरों से हटेंगी अवैध डेयरी

Neeraj Patel | Publish: Jun, 12 2019 10:04:48 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निराश्रित गोवंश की सुरक्षा के लिए अहम फैसला लिया है।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निराश्रित गोवंश की सुरक्षा के लिए अहम फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश की सुरक्षा के लिए जहां पर निराश्रित गोवंश आश्रय केंद्र निर्माण नहीं हो पाया है उन स्थानों पर जल्दी ही निर्माण कराए जाने और इसके साथ ही उन स्थानों पर निराश्रित गोवंश के खाने के लिए भूसा बैंक भी बनवाने के लिए योगी सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं। जिससे निराश्रित गोवंश के खाने के लिए चारा उपलब्ध कराया जा सके। सीएम योगी ने ये बोला कि जिन शहरों में अवैध डेयरियां चलाई जा रही हैं उनको भी हटाया जाए। यूपी के जिन शहरों में अवैध रूप से संचालित डेयरी पाई जाती हैं उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन शहरों में अवैध रूप से कैटल कालोनिया चल रही है उनको तुरंत हटाया जाए और निराश्रित गोवंशों को आश्रय केंद्र में शिफ्ट कराया जाए। यूपी में निराश्रित गोवंश की सुरक्षा के लिए बनाए गए गोवंश आश्रय केंद्र के लिए जो कमेटियां बनाई गई है उनके द्वारा कोई भी लापरवाही सामने नहीं आनी चाहिए नहीं तो उन पर राज्य सरकार द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी के अनुसार सभी जिलों के अधिकारियों को 15 जून से जमीन स्तर पर बड़ी योजनाओं की जानकारियों के लिए मैदान में उतरना होगा। सभी जिलों के अधिकारियों को 20 जून तक अपनी-अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे के पास भेजनी होगी। इसके बाद यूपी सीएम योगी सभी जिलों का दौरा शुरू करेंगे।

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यूपी के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को जनता की समस्याओं के लिए अब रोज एक घंटा अनिवार्य रूप से देना होगा और क्षेत्र में ही निवास करना होगा। क्षेत्र अधिकारियों थाना प्रभारी स्तर के अधिकारियों को जहां उनकी तैनाती होगी। अब सभी अधिकारियों को गंभीरता से निर्देश दिए गए कि प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्रामीण और शहरी आवास योजना में गतिशीलता लाई जाए। इसके साथ ही जिलाधिकारी स्तर पर 102 और 108 एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए और वह उनके सुचारू रूप से संचालन में भी रेगुलर निगरानी कर समीक्षा की जाए। हर दिन किसी न किसी अस्पताल में आकस्मिक निरीक्षण भी करें।

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