60 जिलों में निर्दलीय ही बनाएंगे जिला पंचायत अध्यक्ष

यूपी में इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में निर्दलीय बड़ी भूमिका निभाएंगे। खरीद-फरोख्त के लिए तलाशे जा रहे धनाढ्य उम्मीदवार। 33 प्रतिशत ग्रेजुएट तो 23 पीएचडी धारक भी जीते।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के पहले जिला पंचायत की सीटों पर कब्जा करने के सत्ता पक्ष और विपक्ष के मंसूबे पर निर्दलीयों ने पानी फेर दिया है। इस बार बड़ी संख्या में जीते निर्दलीय किंग मेकर की भूमिका में हैं। यानी बिना निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने पाले में किये जिल पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचना नामुमकिन है। करीब 60 जिले तो ऐसे हैं जहां निर्दलीय ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनाएंगे। इन जिलो में वोटरों ने सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टियोंं के साथ ही बड़ी संख्या में निर्दलीयों पर भरोसा किया है। ऐसे में धनाढ्य उम्मीदवार तलाशे जा रहे हैं ताकि निर्दलीयों को हर तरह से साधकर अपने पाले में लाया जा सके।

 

इस बार त्रिस्तरीय प्रचायत चुनाव में सभी दलों ने जिला पंचायत की सीटों पर अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे और उन्हें जिताने के लिये जोर-शोर से जुटे रहे। सत्ताधारी बीजेपी, विपक्षी समाजवादी पार्टी, बसपा, कांग्रेस और यहां तक कि ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा, शिवपाल यादव की प्रसपा और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी गठबंधन कर अपने उम्मीदवार उतारे। पर 10 से भी कम ऐसे जिले हैं जहां कोई पार्टी अपने दम पर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना दावा कर सकती है। भाजपा, सपा और निर्दलीय करीब-करीब बराबर जीते हैं। कुछ पार्टियां तो सिर्फ खाता ही खोल पायी हैं।

 

अब तक कहा जाता था कि पंचायत चुनाव में सत्ताधारी दल ही अपना झंडा गाड़ते हैं, लेकिन इस बार वोटरों ने उन्हें आत्मनिर्भर नहीं बनाया है। सांसदों और विधायकों के परिवार वालों को टिकट न मिलने से हुई बगावत और भितरघात से बीजेपी को नुकसान पहुंचा है। राम नगरी अयोध्या, गोंडा, उन्नाव, अम्बेडकरनगर, मथुरा, जालौन, बलिया, वाराणसी समेत कई ऐसे जिलों में बीजेपी बहुमत से काफी दूर है। करीब 60 जिलों में निर्दलीय जिसका बल बनेंगे जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी उसी को मिलेगी। तस्वीर साफ होने के बाद अब निर्दलीयों को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। हालांकेि बीजेपी के साथ एक प्लस प्वाइंट ये भी है कि निर्दलीयों की झुकाव हमेशा सत्ता पक्ष की ओर देखा गया है। कहा जा रहा है कि जमकर खरीद फरोख्त हो सकती है और अध्यक्ष की कुर्सी के लिये एक-एक वोट के लिये लग्जरी गाड़ियां व रुपये तक देने में गुरेज नहीं होगा।

 

हालांकेि इस बार पढ़े लिखे उम्मीदवार भी काफी तदाद में हैं। करीब 33 प्रतिशत ग्रेजुएट जीते हैं तो 23 जिला पंचायत सदस्य पीएचडीधारक भी हैं। ऐसे में स्थिति पूरी भले न बदले पर कुछ तो बदलाव की उम्मीद की ही जा सकती है।

 

यूपी के निर्वाचित ग्राम प्रधान तैयार हो जाएं, 12 -14 मई को ले सकते हैं ग्राम प्रधान पद की शपथ
पंचायत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब गांव की सरकार जल्द ही अपना काम-काज संभाल सकती है। मतगणना पूरी होने के बाद अब नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों के शपथ ग्रहण की तैयारी है। कहा जा रहा है कि 12 से 14 मई तक प्रधानों का शपथ ग्रहण हो सकता है। इसके बाद 15 म्रइ को एक साथ नवगठित ग्राम सभा की पहली बैठक कराने का प्रस्ताव है। 29 मई तक जिला व क्षेत्र पंचायत अयक्ष का चुनाव निपटाये जाने का प्रस्ताव है। पहले जिला पंचात अध्यक्षों का चुनाव होगा उसके बाद ब्लाॅक प्रमुख चुने जाएंगे। ब्लाॅक प्रमुख चुनाव 14 से 17 मई के बीच कराने की तैयारी है।

रफतउद्दीन फरीद
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