कृषि क्षेत्र के तीन ऑर्डिनेंस पर पंजाब के सीएम चिन्तित, पीएम को चिट्टी लिख की ये मांग

किसानों के हित में संघीय ढांचे की भावना के मुताबिक पुन: विचारने करने की अपील

किसानों में डर है कि केंद्र सरकार अनाज की गारंटीशुदा खरीद से हाथ खींच रही है

By: Bhanu Pratap

Published: 15 Jun 2020, 07:23 PM IST

चंडीगढ़। भारत सरकार द्वारा हाल ही में कृषि क्षेत्र में किये नये संशोधनों पर पंजाब की चिंता प्रकट करते राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने तीन नये ऑर्डिनेंस की समीक्षा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसानों के बड़े हितों को ध्यान में रखते हुये संघीय ढांचे की भावना के अंतर्गत केंद्र सरकार अपने फैसले पर पुन: विचार करे। मुख्यमंत्री ने प्रधा मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि तीन ऑर्डिनेंस के अनुसार ए.पी.एम.सी. एक्ट के अंतर्गत कृषि मंडीकरण की निर्धारित भौतिक सीमाओं से बाहर जाकर कृषि उत्पादों के व्यापार की आज्ञा देनी, ज़रूरी वस्तुएँ एक्ट के अंतर्गत पाबंदियों को सरल करना और कंट्रेक्ट कृषि को सुविधा देना है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए इन ऑर्डिनेंस पर पुन: विचार किया जाना चाहिए।
कृषि राज्य के अधिकारों का विषय

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की अनाज सुरक्षा यकीनी बनाने के लिए पंजाब देश का अग्रणी राज्य है। गेहूँ और धान के उत्पादन की तकनीकी के विकास के साथ-साथ इसके प्रसार से एफ.सी.आई. द्वारा नोटीफाई मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी ने ही बफर स्टॉक तैयार करने और देश को अनाज सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इस नीति के नतीजे के तौर पर ही हालिया समय में कोविड-19 महामारी के अनिर्धारित संकट के बावजूद देश को किसी किस्म के अनाज संकट और भुखमरी का सामना नहीं करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं के अनुसार कृषि राज्य के अधिकारों का विषय है, जिसको प्रांतीय लिस्ट में इंदराज 14 पर रखा गया है। दूसरी तरफ़ व्यापार और वाणिज्य को समवर्ती सूची में इंदराज 33 पर रखा है जिसके अंतर्गत केंद्र और राज्य दोनों ही इस विषय पर कानून बना सकते हैं बशर्ते प्रांतीय विधानसभा का कानून केंद्र के कानून का उल्लंघन न करे।

पंजाब में कृषि उत्पादन मंडीकरण सिस्टम अच्छा काम कर रहा
विशेष ऑर्डिनेंस का हवाला देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कृषि उत्पादन मंडीकरण सिस्टम लम्बे समय से परखा हुआ है। राज्य और देश की पिछले 60 साल से सेवा कर रहा है। यह भी सच्चाई है कि हरित क्रांति की सफलता में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा कि इसने जहाँ एक देश को अनाज भंडारण के मामले पर आत्म-निर्भर किया वहीं इससे लाखों किसानों और खेत मज़दूरों की रोज़ी रोटी भी सुरक्षित की। उन्होंने कहा कि पंजाब में इस समय पर खुली मंडी और उत्पादन के भंडारण दोनों का ही ज़बरदस्त बुनियादी ढांचा तैयार है। खेतों से मंडी और गोदाम तक निर्विघ्न आवाजाही की सुविधा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से आधुनिक कृषि और कृषि के मंडीकरण को और बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को और मज़बूत करने की प्रक्रिया चल रही है।

किसानों में डर
उन्होंने कहा कि 5 जून, 2020 के ऑर्डिनेंस के अनुसार कृषि मंडीकरण सिस्टम के बदलाव से राज्य के किसानों में यह डर पैदा हो गए हैं कि केंद्र सरकार अनाज की गारंटीशुदा खरीद से हाथ खींच रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए एक और अंदेशा है कि किसानों के लिए प्रस्तावित पाबंदी मुक्त राष्ट्रीय स्तर की मंडी वास्तव में व्यापारियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की मंडी होगी जिससे पहले ही कर्जे से परेशान किसानों को और नुकसान होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड -19 के मुश्किल भरे हालातों पर आते हुये कि इससे राज्य के किसानों के दरमियान सामाजिक -आर्थिक तनाव और बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह उस क्षेत्र की शान्ति और विकास के लिए किसी भी तरह उपयुक्त नहीं जो गतिशील अंतर-राष्ट्रीय सरहद के कारण सार्वजनिक व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा हो।

पंजाब के लिए उलझनें
किसान पैदावार, व्यापार और वाणिज्य (तरक्की और सुविधा) ऑर्डिनेंस 2020 की तरफ प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह ए.पी.एम.सी के घेरे से बाहर नये बाजारी जऱीया को आज्ञा देता है और जिस कारण राज्य ख़ास कर पंजाब के लिए दूरगामी उलझनें पैदा होंगी। उन्होंने ज़ोर देते हुये कहा कि अकेले एकीकृत लायसेंस की सुविधा और किसानों से सीधी खरीद के लिए प्राइवेट मार्केट की स्थापित के लिए पंजाब पहले ही अपने ए.पी.एम.सी एक्ट 1961 में संशोधन कर चुका है। इससे भी आगे ए.पी.एम.सी एक्ट किसान और खरीददार के बीच हुए पहले आदान-प्रदान से सम्बन्ध रखता है और इसके अलावा व्यापार में किसी भी तरीके से दख़ल नहीं देता।

मंडी शुल्क से गांवों का विकास
उन्होंने कहा कि ए.पी.एम.सी द्वारा एकत्रित कर मंडियों के विकास पर प्रबंध, ग्रामीण क्षेत्रों में बाज़ार का निर्माण और बुनियादी ढांचे की मज़बूती के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानी और ग़ैर -किसानी भाईचारे के कल्याण के लिए ख़र्च की जाती है। यह आम समझ का हिस्सा है कि समवर्ती सूची के इंदराज 33 जिसमें व्यापार और वाणिज्य और पैदावार, सप्लाई और उत्पादों की बाँट केवल खाना पदार्थों जैसे कपास, जुट, तेलबीज़ आदि, जो औद्योगिक कच्चा माल हैं, पर लागू है न कि यह अनाज जैसे फलों और सब्जियों पर। इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि इस तरह ए.पी.एम.सी एक्ट या खासकर संविधान में दर्ज और समय की परख पर खरी उतरे संघीय ढांचा व्यवस्था को ढहाने के पीछे कोई तर्क दिखाई नहीं दे रहा।

लूट की आशंका बढ़ेगी
इससे आगे देश में लाखों छोटे और दर्मियाने किसान, जो फ़सल की कटाई के बाद पैदावार को बाज़ार के सुखद होने तक संभाल कर नहीं रख सकते और न ही आज़ाद बाज़ार में रचनात्मक कीमतें हासिल करने के लिए सौदे करने का हुनर रखते हैं, संबंधी बात करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे किसानों को संगठित व्यापार के तरस पर छोड़ देने से व्यापारियों के हाथों ऐसे किसानों की लूट की संभावनाएं ही बढ़ेंगी।

राज्यों को स्टाक की नहीं होगी जानकारी
ज़रूरी वस्तुएँ एक्ट के अंतर्गत खाद्य अनाजों के नियमों को सुखद करने संबंधी कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह जंग के कठोर हालातों, कुदरती संकटों, अकाल और कीमतों में ज़्यादा उछाल को छोड़ कर निर्यात कर्ताओं, प्रोसेसरों और व्यापारियों को बिना बाधा के किसानी पैदावार के बड़े स्टाक रखने की आज्ञा देता है। यह संशोधन निजी व्यापारियों के लिए फ़सल संभाल के सीजन जब आम तौर पर कीमतों कम होती हैं, के समय फसल की खरीद करने और बाद में जब कीमतों बढ़ती हैं तो बाज़ार में ले जाने के रास्ते खोलता है। उन्होंने कहा कि किसी नियमितता की ग़ैर -हाजिऱी में राज्यों के पास राज्य में ही वस्तुओं के स्टाक की उपलब्धता संबंधी जानकारी नहीं होगी।

किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) एग्रीमेंट 2020
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे कहा कि यकीनी कीमतें और फार्म सेवाओं ऑर्डिनेंस संबंधी किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) एग्रीमेंट 2020’ किसानों की प्रोसेसिंग कर्ताओं, निर्यात कर्ताओं और बड़े रिटेलरों के साथ फार्म सेवाओं और आपसी समझौते की सेवाओं के अनुसार लाभकारी कीमत पर भविष्य में पैदावार बेचने के लिए सम्पर्क मुहैया करवाता है परन्तु यह बड़े रूप में कांट्रेक्ट कृषि और सेवाओं के विकल्पों से सम्बन्धित है। क्योंकि यह सेवाओं और ठेके कृषि पैदावार से सम्बन्धित हैं, यह राज्य की सूची के इंदराज 14 समेत इंदराज 26 और 27 के अंतर्गत कवर होता है और इसको आम रूप में समवर्ती सूची के इंदराज 33 के अंतर्गत व्यापार और वाणिज्य के मसले के तौर पर नहीं लिया जा सकता।

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