खाने को रोटी नहीं.. पुलिस डंडे मारती है.. अब नहीं आएंगे पंजाब

झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश के प्रवासी मजदूरों की दर्दभरी कहानी

लुधियाना के गांव सानेवाल होकर वापस जा रहे मजदूरों को पुलिस ने दौड़ाकर पीटा

By: Bhanu Pratap

Published: 22 May 2020, 12:14 PM IST

लुधियाना/अमृतसर। चेहरे पर मासूमियत। आंखों में दर्द। खाली पेट। जमाना बेदर्द। हर राह चलने वाले से फरियाद। घर जाने की ललक। गिड़गिड़ा रहे। ये हैं मजदूर। कहते हैं- न खाने को रोटी न सोने को बिस्तर। अब नहीं आएंगे पंजाब। यहां की पुलिस तो बात करने पर भी मारती है। हम चले जाएंगे यहां से। हमारा जाने का इंतजाम करवा दो। 20 दिन से सड़क पर हैं। घर जाने के लिए ट्रेन कब मिलेगी, पता नहीं। जब पुलिस वालों से पूछो तो वह डंडे मारते हैं। पुलिस वालों को पर्ची दिखाते हैं कि हमारा तो मेडिकल भी हो गया है, ट्रेन कब मिलेगी तो मारते हैं। लुधियाना के सानेवाल गांव में पुलिस ने क्रूरता की हदें पार कर दीं। मजदूरों को बुरी तरह पीटा। उनकी साइकिलें सड़क और खेतों में पड़ी रह गईं। टूटी चप्पलों ने भी पुलिस की अमानवयती की चुगली कर दी।

चुलबुल सिंह का दर्द

यह सारा दर्द उन लोगों का है जो पंजाब छोड़कर अपने अपने घर जा रहे हैं। कोई झारखंड से है, कोई यूपी से है, कोई बिहार से है, कोई मध्य प्रदेश से है तो कोई उड़ीसा से। सबका अपना-अपना तर्क है और सबकी अपनी अपनी मजबूरी। अमृतसर के राम तलाई चौक पर बैठे चुलबुल सिंह कहते हैं कि 5 दिन हो गए मेडिकल की पर्ची कटवाए, जब स्टेशन जाते हैं तो पुलिस डंडे मारकर भगा देती है। जेब में पैसा नहीं। खाने को रोटी नहीं। अब तो हालत यह है कि पैदल भी नहीं जा सकते अपने घर तक।

बिहार के लालचंद का दर्द

बिहार के लालचंद भी पुलिस की बद्तमीजी का शिकार हो चुके हैं। वह कहते हैं कि उनका मेडिकल 10 दिन पहले हो गया था। जब वह ट्रेन में चढ़ने के लिए अपने साथियों सहित रेलवे स्टेशन पहुंचे तो पुलिस वालों ने उन्हें डंडे मारकर वहां से भगा दिया। जब वह इसकी शिकायत करने थाना कंटोनमेंट में गए तो वहां भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। यही नहीं जब हमारे साथी साइकिलों पर यहां से न्यू अमृतसर की तरफ निकले तब भी वहां मौजूद पुलिस वालों ने डंडे मारकर हमें वापस भगा दिया। हमारा सामान और साइकिलें छीन लीं। हम अपना दर्द किस से कहें और कहां के हैं समझ नहीं आता। पंजाब पुलिस की बद्तमीजी इतनी हद पार कर चुकी है कि वह अपने आप को खुदा मानने लगे हैं।

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