scriptLord Rama had a deep bond with Mithila, immense enthusiasm in Mithila | भगवान राम का मिथिला से रहा गहरा नाता, मिथिला में अपार उत्साह | Patrika News

भगवान राम का मिथिला से रहा गहरा नाता, मिथिला में अपार उत्साह

(Bihar News) भगवान राम (God Ram ) का मिथिला से गहरा नाता (God Ram relation with Mithila ) रहा है। ऐतिहासिक-पौरोणिक शास्त्रों (Mythological scriptures of Lord Ram in Mithila) में भगवान राम का मिथिला से अटूट संबंध होने के प्रमाण मिलते हैं। श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन पर पूरे मिथिला में खुशिया मनाई जा रही हैं।

मधुबनी

Published: August 05, 2020 04:55:02 pm

मधुबनी(बिहार): (Bihar News) भगवान राम (God Ram ) का मिथिला से गहरा नाता (God Ram relation with Mithila ) रहा है। ऐतिहासिक-पौरोणिक शास्त्रों (Mythological scriptures of Lord Ram in Mithila) में भगवान राम का मिथिला से अटूट संबंध होने के प्रमाण मिलते हैं। इसी वजह से अयोध्या में भव्य राममंदिर की नींव रखे जाने से मिथिलावासियों में जबरदस्त उत्साह है। श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन पर पूरे मिथिला में खुशिया मनाई जा रही हैं। मिथिलावासी अपने पाहुन के मंदिर के भूमि पूजन को लेकर और अधिक गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। रामायण काल को मानें तो यहां के कई ऐसे स्थल हैं, जिनका संबंध सीधे तौर पर भगवान राम व मां जानकी से है। इसमें हरलाखी के फुलहर, गिरिजा स्थान, कलानेश्वर, विश्वामित्र आश्रम इत्यादि प्रमुख स्थल हैं।

भगवान राम का मिथिला से रहा गहरा नाता, मिथिला में अपार उत्साह
भगवान राम का मिथिला से रहा गहरा नाता, मिथिला में अपार उत्साह

भगवान राम ने की थी मिथिला यात्रा
जनक के सुन्दर सदन की कथा प्रचलित है कि त्रेता युग में तारका, सुबाहु राक्षस के वध के बाद ॠषि विश्वामित्र ने दशरथ कुमार भगवान राम और लक्ष्मण के साथ राजा जनक के धनुष यज्ञ में शामिल होने के लिए जब मिथिला की यात्रा की थी। इनके आने की खबर सुन राजा जनक ने विशौल गांव में ठहरने का समुचित प्रबंध किए थे। जिसके कारण यह स्थान विश्वामित्र आश्रम के नाम से विख्यात हो गया। रामायण काल के अनुसार इसी जगह पर राम अपने भाई लक्ष्मण संग, गुरु विश्वामित्र के साथ आकर रुके थे और अपने गुरु के पूजा के लिये पुष्प वाटिका गये थे, जहां पर सीता के साथ उनका पहला मिलन हुआ था।

हरलाखी में है पुष्पवाटिका
रामायण के अनुसार राम सीता का पहला मिलन एक पुष्प वाटिका में हुआ था। यह बगीचा आज हरलाखी के फुलहर के नाम से जाना जाता है। अयोध्या मंदिर निर्माण के श्रीगणेश के मौके पर इसी वजह से इस इलाके के सभी वर्गों के लोगों में बेहद प्रसन्नता है। रामायाण काल में वर्णित इन पवित्रों स्थानों की सार-संभाल नहीं की गई। इससे इनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया। देख रेख व उचित संरक्षण नहीं मिल पाने की वजह से फुलहर में न तो वो पुष्प की वाटिका रही और न ही वह रमणीयता। इसके बावजूद लोगों में इस स्थल को लेकर श्रद्धा उसी प्रकार बरकरार है। आज भी लोग यहां की पवित्र माटी की पूजा किया करते हैं।

दीप प्रज्जवलित कर खुशी मनाएंगे
हरलाखी के लोगों में काफी खुशी है। प्रखंड के वीशौल गांव स्थित विश्वामित्र आश्रम सहित पूरे प्रखंड के लोगों में गजब का उत्साह है। इसलिए इस दिन को विशेष दिन के रूप में मनाने का लोगों ने संकल्प लिया है। विश्वामित्र आश्रम में सीताराम का धुन गूंजेंगी और शाम को दीप पूजनोत्सव मनाई जाएगी। आश्रम के महंत वृज मोहन दास ने बताया कि यह दिन हमारे जीवन का सबसे अहम दिन है। जिस प्रकार 14 वर्ष के बनवास को खत्म कर भगवान अयोध्या लौटे थे और अयोध्या में उनके स्वागत में लोगों ने दीप प्रज्जवलित कर भगवान की स्वागत व खुशियां मनाई थी। उसी प्रकार राम लला के मंदिर बनने के लिए हो रहे भूमि पूजन के अवसर पर विशौल में दीप प्रज्वलित कर खुशियाँ मनाएंगे।

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