श्रमिकों को क्वारेंटाइन करने से प्रशासन ने खड़े किए हाथ, नहीं हो पा रहा इंतजाम

(Bihar News ) प्रदेश में बड़ी संख्या में लगातार आ रहे श्रमिकों को संभालना (Shortge of Quarantine cetre ) सरकार और प्रशासन के लिए भारी पड़ ( Headache for administration ) रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिए क्वारेंटाइन केंन्द्रों के इंतजाम तक नहीं हैं। मामला मधुबनी के रहिका क्षेत्र का सामने आया है। इस क्षेत्र में बनाए गए सभी क्वारेंटाइन सेंटर भर चुके हैं।

By: Yogendra Yogi

Published: 19 May 2020, 12:13 AM IST

मधुबनी(बिहार): (Bihar News ) प्रदेश में बड़ी संख्या में लगातार आ रहे श्रमिकों को संभालना (Shortge of Quarantine cetre ) सरकार और प्रशासन के लिए भारी पड़ ( Headache for administration ) रहा है। हालात यह हो गई गए हैं कि दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिए क्वारेंटाइन केंन्द्रों के इंतजाम तक नहीं हैं। इससे श्रमिक ( No medical examination ) या तो सीधे अपने गांव-घरों को जा रहे हैं या फिर भर्ती होने के लिए हंगामा खड़ा कर रहे हैं। उनमें ऐसा ही एक मामला मधुबनी के रहिका क्षेत्र का सामने आया है। इस क्षेत्र में बनाए गए सभी क्वारेंटाइन सेंटर भर चुके हैं। यही वजह है कि कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मधुबनी में कोरोना पॉजिटिव के 20 नए मामले सामने आए हैं। श्रमिकों के लौटने से इनकी संख्या में ओर बढऩे के आसार हैं।

भर चुके क्वारेंटाइन केंद्र
जिले के रहिका कस्बे सतलखा गांव में सारे क्वारेंटाइन केंद्र संदिग्ध मरीजों से पूरे भर चुके हैं। इसी बीच करीब दो दर्जन मजूदर ओर पहुंच गए। जो श्रमिक स्पेशल श्रमिक ट्रेन से आए थे, उन्हें तो पूर्व में क्वारेंटाइन केंद्रों में जगह मिल गई, किन्तु जो अचानक ट्रक या दूसरे साधनों से बगैर सूचना के पहुंच रहे हैं, उनका इंतजाम करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं। श्रमिकों ने जब क्वारेंटाइन करने की बात कही तो इलाके के मुखिया ने सभी के भरे होने का हवाला देकर भर्ती करने से इंकार कर दिया।

अधिकारियों ने खड़े किए हाथ
अधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों को रहिका मुख्यालय पर आना होगा, तब ही इस पर विचार किया जा सकता है। जबकि श्रमिक और उनके परिजन चाहते थे कि उन्हें गांव में ही क्वारेंटाइन किया जाए। श्रमिकों और उनके परिवार के लोगों ने जब गांव में ही भर्ती होने का दवाब डाला तो उन्हे स्कूल का एक कमरा खुलवा कर क्वारेंटाइन किया गया। विद्यालय में प्रशासन की ओर से श्रमिकों के लिए कोई इंतजाम नहीं हो सका। ग्रामीणें ने ही क्वारेंटाइन हुए श्रमिकों के लिए नाश्ते-भोजन पानी का इंतजाम किया है, किन्तु उनके स्वास्थ्य की जांच नहीं हो सकी है। जिले में ज्यादातर आने वाले श्रमिक मुंबई में मजदूरी करते थे। इनमें से अधिकतर के सीधे गांवों में चले जाने के कारण कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

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