अब नहीं लगाना पड़ेगा पटवारियों के चक्कर, घर बैठे ही देख सकते हैं जमीनों के सारे रिकॉर्ड

अब नहीं लगाना पड़ेगा पटवारियों के चक्कर, घर बैठे ही देख सकते हैं जमीनों के सारे रिकॉर्ड

Deepak Sahu | Publish: Sep, 03 2018 02:55:27 PM (IST) Mahasamund, Chhattisgarh, India

रजिस्ट्री आदि के लिए निकाले गए दस्तावेज को सत्यापित कराने पटवारियों के चक्कर काटने से पुरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

महासमुंद. छत्तीसगढ़ में अब जमीन की खरीद फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए अब जमीनों के रिकार्ड बी-1 खसरा का डिजिटलीकरण का किया जा रहा है। बी-1 खसरा के डिजिटल कॉपी में पटवारी के डिजिटल सिग्नेचर होंगे। इससे रजिस्ट्री आदि के लिए निकाले गए दस्तावेज को सत्यापित कराने पटवारियों के चक्कर काटने से पुरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।

नए डिजिटल कॉपी में अब आधार नंबर और मोबाइल नंबर भी अनिवार्य रूप से भी जोड़ा जा रहा है। आधार के साथ जमीन का रिकार्ड जोडऩे से फर्जीवाड़ा की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। भूस्वामी अब अपने जमीन का रिकार्ड सीधे भूईयां के वेबसाइट पर लॉगइन करके घर बैठे देख सकेंगे। राजस्व विभाग के हर दस्तावेज अब ऑनलाइन मिलने लगे है, बावजूद इसके फर्जीवाड़ा करने वाले लोग फर्जीवाड़ा कर ही ले रहे थे।

 

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जमीन के फर्जी दलालों पर अंकुश लगाने और जमीन के रिकार्ड और खरीदी- बिक्री को पारदर्शी करने के लिए ऑनलाइन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण का काम जिले में 86 प्रतिशत से ज्यादा का काम पूरा हो गया है। डिजिटलीकरण की कॉपी में आधार भी अनिवार्य रूप से लिंक करवाना है। दोनों काम पूरा हो जाने के बाद अगर किसी भूस्वामी के खाते में या खसरा में किसी भी तरह का परिवर्तन या कोई भी छेड़छाड़ किया जाएगा, तो इसकी जानकारी तुरंत भूमिस्वामी के मोबाइल में आ जाएगा, उसके खसरा नंबर में कोई परिवर्तन किया जा रहा है।

जबतक भूस्वामी रिकार्ड देखने के लिए अपना आधार और अंगूठे का निशान नहीं लगाएंगे तब तक वो रिकार्ड कोई दूसरा नहीं देख पाएगा। पटवारी नामांतरण दर्ज कर सारे दस्तावेजों की जांचकर डिजिटल सिंग्नेटर के माध्यम से दुरुस्त करेगा।

जोड़े जा रहे आधार नंबर
जिले में पांचों ब्लॉकों के तहसील कार्यालय में डि़जिटलीकरण का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ आधार नंबर भी दस्तावेजों में अनियार्य रूप से जोडऩे का काम हो रहा है। जिन जमीनों का डिजिटलीकरण नहीं हो पाया है, ऐसे जमीनों का फिलहाल खरीद-फरोख्त के बाद रजिस्ट्री नहीं किया जा रहा है।

फर्जी रजिस्ट्री से मिलेगी मुक्ति
मैनुअल रजिस्ट्री के दौरान फर्जी रजिस्ट्री की शिकायतें मिलती है। इसे ठीक कराने में लोगों को बार-बार राजस्व विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब डिजिटली करण के बाद जमीन की ई-रजिस्ट्री होने के बाद नामंतरण की प्रक्रिया के बाद सीधे पटवारी की आईडी मे संपूर्ण दस्तावेज स्थानांतरण हो जाएगा।

इसकी जानकारी क्रेता व विक्रेता को एसएमएस के माध्यम से मिल जाएगी। ई-रजिस्ट्री के बाद अब आगे होने वाली नामांतरण प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा। पंजीयक कार्यलायों के कम्प्यूटरों में सॉफ्टवेयर अपलोड करने का काम अतिंम चरण में है। इसके बाद इसकी जानकारी भूईयां कार्यक्रम की आईडी में डाल दिया जाएगा।

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