सोने सी चमक जैसे लहलहाते खेत, बदल रही महासमुंद की तस्वीर

सोने सी चमक जैसे लहलहाते खेत, बदल रही महासमुंद की तस्वीर

Chandu Nirmalkar | Publish: Dec, 07 2017 04:42:28 PM (IST) Mahasamund, Chhattisgarh, India

फूलों की खेती अब महासमुंद जिले की तस्वीर बदल रही है।

महासमुंद. जिले के किसान फल, सब्जी, मसाला और फूलों की खेती के माध्यम से न केवल आधुनिक और उन्नत खेती को अपना रहे हैं, बल्कि इसे पूरी दक्षता और सफलता के साथ करते हुए अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। उद्यानिकी के इस विविध खेती ने उन्हें साल भर रोजगार देने और आमदनी बढ़ाने का श्रेष्ठ साधन दिया है। फूलों की खेती अब महासमुंद जिले की तस्वीर बदल रही है।

सहायक संचालक उद्यानिकी आरएस वर्मा ने बताया कि पिछले लगभग 14 वर्षों में जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा और उत्पादन बेहद तेज गति से बढ़ा है। वर्ष 2003 में जहां फलों का रकबा 162 हेक्टेयर था, वह वर्ष 2017 में बढ़कर 9474 हेक्टेयर हो गया। इसी तरह सब्जी का रकबा 2774 हेक्टेयर से बढ़कर 14 हजार 623 हेक्टेयर, मसाला का रकबा 479 हेक्टेयर से बढ़कर 5009 हेक्टेयर और फूलों का रकबा लगभग शून्य हेक्टेयर से बढ़कर 1129 हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह उत्पादन की दृष्टि से वर्ष 2003 में जहां 1987 मीट्रिक टन फल का उत्पादन होता था, वह 2017 में बढ़कर 1,42,629 मीट्रिक टन हो गया है। इसी तरह सब्जी का उत्पादन 45,708 मीट्रिक टन से बढ़कर 242670 मीट्रिक टन, मसाला का उत्पादन 276 मीट्रिक टन से बढ़कर 39256 मीट्रिक टन और फूलों का उत्पादन लगभग शून्य से बढ़कर 5757 मीट्रिक टन हो गया है। उद्यानिकी खेती करने वाले किसानों को राज्य शासन द्वारा अनेक सुविधाएं दी जाती हैं। किसानों को फूल पौधों के कंद और बीज नि:शुल्क दिए जाते हैं। इसके अलावा किसानों को फूलों की खेती का मागदर्शन भी दिया जाता है।

सोने सी चमक जैसे लहलहाते हैं तुषार के खेत
महासमुंद से तुमगांव के बीच गाड़ाघाट नाला के समीप तुषार चंद्राकर के खेत दूर से ही सोने सी चमक लिए हुए पीले रंगों के गेंदों से लदे कतारबद्ध पौधों से लहलहाते नजर आते हैं। तुषार ने अपने खेतों को केवल गेंदे की फसल तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ये खेत ग्लेडोलाइडर के विविध रंगों और रजनीगंधा के मनमोहक खुशबू से भी महकते नजर आते हैं। उन्होंने यहां पर पांच एकड़ की खेत में सिंचाई के लिए ड्रिप एरिकेशन का सहारा लिया है। उनके फूलों को हाथों-हाथ लिया जाता है। ये फूल को राजधानी रायपुर के अलावा दुर्ग , भिलाई, बिलासपुर भी जाते हैं। महासमुंद विकासखंड के ग्राम मोहंदी के रहने वाले चंद्राकर अपने गांव के साथ-साथ झालखम्हरिया और मोहंदी में भी फूलों की खेती कर रहे हैं। झालखम्हरिया में पॉली हाउस के माध्यम से गुलाब की खेती भी कर रहे हैं। यहां लाल और सफेद रंग के गुलाब के फूल और कलियां अपने स्वस्थ एवं बड़े आकार के कारण एकाएक आकर्षित कर लेती हंै।

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