धान खरीदी केंद्रों में छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ हो रही ठगी, एेसे खुला राज

Ashish Gupta

Publish: Sep, 16 2017 06:05:39 PM (IST)

Mahasamund, Chhattisgarh, India
धान खरीदी केंद्रों में छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ हो रही ठगी, एेसे खुला राज

छत्तीसगढ़ में खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की मॉनिटरिंग के दावों की पोल उस वक्त खुल गई, जब ओडिशा के व्यक्ति से धान की खरीदी कर ली गई।

महासमुंद. खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की मॉनिटरिंग के दावों की पोल उस वक्त खुल गई, जब ओडिशा के व्यक्ति से धान की खरीदी कर ली गई। महासमुंद के एक स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद यह खुलासा हुआ। अब एफआईआर कराने की तैयारी है। वहीं, वर्ष 2013 से अब तक 11 समितियों के लोगों पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। कई आरोपियों को पुलिस पकड़ नहीं पाई है।
अफसरों की निगाह में समितियों में हर रोज अफरा-तफरी हो रही है। फर्जीवाड़े के केस सामने आ रहे हैं। यह सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि अधिकारी सही तरीके से धान खरीदी केंद्रों की मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं।

स्टेशन रोड स्थित हेमंत बोथरा ने लिखित शिकायत करते हुए बताया था कि खरियार रोड निवासी अशोक कुमार पिता राजमल द्वारा अवैध रूप से ग्रामीण सेवा सहकारी समिति बेलसोंडा में खरीफ वर्ष 2016-17 में कृषक के रूप में पंजीयन कराकर धान का विक्रय किया। अशोक के नाम से नांदगांव पटवारी हल्का नं 28 में 1.130 हेक्टेयर की भूमि पटवारी अभिलेख में दर्ज है। शिकायत के बाद जांच के लिए राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी मौके पर भेजा गया। जांच कर इसकी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी गई।

ओडिशा का व्यक्ति 31 दिसंबर 2016 को पंजीयन के आधार पर 41.60 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बिक्री भी किया है। समिति ने इसकी राशि कृषक के खाते में जमा करा दिया। जबकि जांच में पता चला कि उपरोक्त भूमि पर आवेदक हेमंत बोथरा का कास्ता कब्जा है। इधर, खाद्य विभाग द्वारा मामले की जांच कर जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी के पास एफआईआर के लिए भेज दिया है।

तीन साल में 11 समितियों में हुई गड़बड़ी
जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी प्रकाश बिबे ने बताया कि वर्ष 2013 से 2016 तक सोसाइटियों व धान खरीदी केंद्रों में हुए फर्जीवाड़े की जांच कर 11 समितियों के केंद्र प्रभारी, समिति अध्यक्ष, फड़ प्रभारी सहित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इन लोगों द्वारा धान खरीदी में अफरा-तफरी, फर्जी ऋण वितरण एवं धान खरीदी में फर्जीवाड़ा किया गया है। करीब 48 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इनमें उपार्जन केंद्र गढफ़ुलझर, ठुठापाली, कौहाकुड़ा, पथरला, अछोला, परसवानी, सरकंडा, बावनकेरा, बिरकोनी और आरंगी शामिल हैं। करीब तीन करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई है।

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