मानसून की दगाबाजी से किसान बेहाल, दस वर्षों में इस साल सबसे कम हुई बारिश

मानसून की दगाबाजी के कारण महासमुंद जिले में पिछले दस वर्षों में सबसे कम बारिश इस साल 2021 में हुई है। मुरझाती धान की फसल को बचाने की जद्दोजहद के बीच किसानों की निगाह आसमान पर है।

By: Ashish Gupta

Published: 03 Sep 2021, 10:52 PM IST

महासमुंद. मानसून की दगाबाजी के कारण महासमुंद जिले में पिछले दस वर्षों में सबसे कम बारिश इस साल 2021 में हुई है। मुरझाती धान की फसल को बचाने की जद्दोजहद के बीच किसानों की निगाह आसमान पर है, पर ललचाते बादल बिना बरसे ही आगे बढ़ जा रहे हैं। इसलिए किसानों की सामने विकट परिस्थिति निर्मित हो गई है।

इस वर्ष जिले में एक जून से अब तक 588 मिमी बारिश ही हुई है। जलाशय भी प्यासे हैं और तालाब भी नहीं भर पाए हैं। फसल को बचाने के लिए किसान अब बांधों से पानी की भी मांग कर रहे हैं। कोड़ार व अन्य जलाशय से पानी छोड़ा भी जा रहा है। मानसून ऐसा ही दगा देता रहा तो ठंड के मौसम में भी निस्तारी व पेयजल की समस्या हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सितंबर में अच्छी बारिश हो सकती है। राजस्व विभाग एवं आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 27 अगस्त तक की स्थिति में 2012 में 1146 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। 2013 में 934, 2014 में 1079 मिमी, 2015 में 721, 2016 में 641 मिमी, 2017 में 704, 2018 में 865, 2019 में 825, 2020 में 1035 बारिश हुई है। वहीं 2021 में अब तक महासमुंद विकासखंड में 695.6, सरायपाली में 536 मिमी, बसना में 629 मिमी, पिथौरा में 407 मिमी, बागबाहरा में 676 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है। जिले में सबसे कम बारिश पिथौरा विकासखंड में हुई है।

59 लघु जलाशयों में 25 फीसदी ही पानी
जिले में 100 लघु जलाशयों में केवल 4 में ही शत-प्रतिशत पानी भरा है और 59 लघु जलाशय ऐसे हैं जहां 0-25 फीसदी ही पानी है। वहीं बड़े जलाशय कोडार और केशवा बांध में क्रमश: 23 और 20 फीसदी पानी है। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बागबाहरा के कछारडीह, कसेकेरा और सरायपाली के भोखल और बसना के रसोड़ा गांव लघु जलाशय ही इस वर्ष शत-प्रतिशत भर पाए।

8 लघु जलाशय ऐसे हैं, जिसमें 51 से 75 फीसदी पानी है और 4 जलाशय में 76 से 99 फीसदी पानी है। सितंबर व अक्टूबर माह में किसानों को बांधों से पानी की जरूरत पड़ती थी, लेकिन इस बार अगस्त माह में ही पानी छोड़ा जा रहा है। कोडार शाखा के एसडीओ एमके मिश्रा ने बताया कि नहरों की साफ-सफाई की जा रही है, जिससे टेल एरिया में भी पानी पहुंच सके। जहां से पानी लीक हो रहा है, उसे ठीक कराया गया है।

सूखे का साया, परेशानी
पिछले वर्ष भी पिथौरा में कम बारिश दर्ज की गई थी। जिले में पिछले इसी समय तक 1035 मिमी बारिश हो चुकी थी। इस वर्ष मौसम विभाग ने 1192 मिमी बारिश का अनुमान जिले में लगाया था, लेकिन जिस तरह से मानसून रूठा हुआ है, उससे लगता है। इस बार जिले में कई क्षेत्र सूखे के चपेट में आ सकते हैं।

खेतों में पड़ी दरारें
बारिश नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ रही हैं। इससे किसान चिंतित हैं। जिन किसानों ने पंप के माध्यम से फसल ली है, उनकी फसलों में कीट का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस समय फसलों को बचाने के लिए पानी की ज्यादा जरूरत है। वैसे भी अल्पवर्षा के कारण इस साल खेती-किसानी का काम पिछड़ चुका है।

बारिश की स्थिति (27 अगस्त तक की स्थिति में)
विकासखंड 2017 2018 2019 2020 2021
महासमुंद 708 838 866 910 695
सरायपाली 679 833 934 1290 536
बसना 776 816 928 1205 629
पिथौरा 672 896 797 643 407
बागबाहरा 685 942 599 1126 676
कुल 704 865 825 1035 588 मिमी

Ashish Gupta
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