तीन वर्षों से पालक कर रहे शिक्षक की मांग, बीईओ ने की एक शिक्षक की व्यवस्था तो स्कूल में जड़ा ताला

तीन वर्षों से पालक कर रहे शिक्षक की मांग, बीईओ ने की एक शिक्षक की व्यवस्था तो स्कूल में जड़ा ताला

Deepak Sahu | Publish: Sep, 02 2018 10:00:00 PM (IST) Mahasamund, Chhattisgarh, India

शिक्षक पदस्थापना की मांग को लेकर पालकों ने को माध्यमिक शाला में ताला जड़ दिया।

महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के ग्राम भदरसी में शिक्षक पदस्थापना की मांग को लेकर पालकों ने शनिवार को पूर्व माध्यमिक शाला में ताला जड़ दिया। सूचना मिलने के बाद बीईओ पहुंचे। तत्काल एक शिक्षक की व्यवस्था करने के बाद आंदोलन समाप्त हो गया। बागबाहरा ब्लॉक में स्कूल में ताला जडऩे की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व ग्राम पोटिया में भी शिक्षक की मांग को लेकर स्कूल में ताला जड़ दिया
गया था।

जानकारी के मुताबिक ग्राम भदरसी स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में 81 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक प्रधानपाठक और एक गणित के शिक्षक पर है। अन्य विषयों की पढ़ाई ठप है। तीन वर्षों से पालक व शाला विकास समिति के सदस्य शिक्षक व्यवस्था की मांग करते आ रहे हैं। इसी वजह से शनिवार को आक्रोशित पालकों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। तालाबंदी की सूचना मिलते ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी एआर ध्रुव ग्राम भदरसी पहुंचे। ग्रामीणों ने उनसे शिक्षक पदस्थापना किए जाने की मांग की। ध्रुव ने तत्काल गांजर स्कूल के एक शिक्षक की पदस्थापना भदरसी माध्यमिक शाला में की।

इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और स्कूल का ताला खुला। इधर, जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि पहले इस स्कूल में गांव के ही प्राइमरी स्कूल के एक शिक्षक की पदस्थापना की गई थी, लेकिन शाला विकास समिति के सदस्यों ने स्थायी शिक्षक की मांग करते हुए व्यवस्था में भेजे गए शिक्षक को लौटा दिया। अब फिर शिक्षक की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ज्ञात हो कि जिले की हायर, हाई, पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। आए दिन कही न कही शिक्षकों की मांग को लेकर स्कूलों में ताला जडऩे की घटना सामने आती है। एक महीने के अंदर तीन बार स्कूली बच्चों एवं पालकों ने शिक्षक की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महासमुंद ब्लॉक के ग्राम रूमेकेल में भी शिक्षक की कमी के चलते प्रधानपाठक के नेतृत्व में बच्चों ने फोरलेन जाम कर दिया था।

103 स्कूलें एक शिक्षकीय
जिले में करीब 103 एक शिक्षकीय स्कूल है । 10 स्कूल ऐसे हैं, जहां व्यवस्था के शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा, यह बड़ा सवाल है। जिले में 1285 प्राथमिक, 490 माध्यमिक, 50 हाई एवं 111 हायर सेकंडरी स्कूल है । शिक्षक की कमी को लेकर आए दिन विरोध का सामना शिक्षा विभाग को करना पड़ता है।

दर्ज संख्या में आ रही गिरावट
शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में दर्ज संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। पिछले चार सालों में करीब 61 हजार 406 की कमी दर्ज की गई है। इसकी वजह शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाओं को माना जा रहा है। विभाग के अनुसार 12 वीं तक 1729 शासकीय स्कूलों के लिए 10 हजार 534 शिक्षक के पद स्वीकृत हैं, जिनके विरुद्ध 7665 पदस्थ हैं। प्राचार्य, हेडमास्टर, यूडीटी, सहायक शिक्षक, शिक्षक व्याख्याता पंचायत, सहायक ग्रेड-३ एवं भृत्य मिलाकर 2869 पद वर्षों से रिक्त है। इसकी वजह से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में कैसे शिक्षा गुणवत्ता आएगी।

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