खूबसूरत वादियों के बीच गुफा में मौजूद है यह अद्भूत मंदिर, जहां माता के दर्शन करने कोसो दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

सुरम्य वादियों में बना मां चंपई का द्वार अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां माता एक गुफानुमा स्थान पर विराजित हैं।

महासमुंद. शहर के पास सुरम्य वादियों में बना मां चंपई का द्वार अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां माता एक गुफानुमा स्थान पर विराजित हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। नवरात्र में तो यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। अरंड-मोहंदी मार्ग पर शहर से करीब 12 किमी दूर इस पहाड़ी की छटा नवरात्र के दिनों में देखते ही बनती है। यहां मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है।

पिछले 25 वर्षों से शारदीय और चैत्र नवरात्र में ज्योत प्रज्जवलित की जा रही है। इस वर्ष 134 ज्योत प्रज्जवलित की गई है। इससे पूर्व यहां के लोग अक्ति पर्व में ही दीप जलाने पहुंचते थे। माता स्थापना के पीछे पहाड़ी पर भगवान द्वारपाल का प्रतिमा स्थापित है, जो बाहरी विपदाओं से मंदिर की रक्षा करते हैं। चंपई माता स्थापना परिसर में प्रतिवर्ष नवरात्रि पर धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। नौ दिनों तक माता की भक्ति सहित यज्ञ पूर्णाहुति व विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। चंपई माता सेवा समिति के सदस्य पूनम दीवान ने बताया कि पूर्व में पानी की समस्या के चलते भंडारा एक दिन का किया जाता था, लेकिन इस वर्ष बोर से ऊपर पहाड़ी पर पानी पहुंचाया जा रहा है।

खूबसूरत वादियों के बीच गुफा में मौजूद है यह अद्भूत मंदिर, जहां माता के दर्शन करने कोसो दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

पर्यटन स्थल के रूप में हो सकता है विकसित
चंपई पहाड़ी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। यदि शासन-प्रशासन इस ओर ध्यान दे तो। ऊपर पहाड़ी स्थित माता चंपई गुफा के पीछे 10 से 15 एकड़ में मैदानी इलाका है। जहां गार्डन, विश्राम भवन, ज्योत कक्ष आदि बनाए जा सकते हैं। जिला मुख्यालय के करीब होने के बाद भी यहां सुविधाओं का अभाव है। यहां विराजमान माता के लिए अब तक मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है।

रानीखोल व चंपई गुफा सुरंग मार्ग से जुड़ा
छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में से एक चंपई है। गौरखेड़ा से लोहारगांव तक यहां 3 भव्य पठार एवं 5 खौफनाक गुफाएं हैं। इन गुफाओं में से वर्तमान रानीखोल गुफा एवं चंपई माता गुफा सुरंग मार्ग से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार कलचुरी वंशज के राजा भीमसेन द्वितीय की राजधानी चंपापुर के नाम से विख्यात था। चंपापुर की नगर देवी चंपई देवी थी। चंपई देवी आज भी ब्रम्हागिरी पर्वत यानी महादेव पठार के एक गुफा में विराजमान है। आसपास के ग्रामीण वर्तमान में चंपई माता की पूजा-अर्चना बड़ी श्रद्धा से करते हैं। शारदीय नवरात्र एवं चैत्र नवरात्रि के समय यहां ग्रामीणों के सहयोग से ज्योति कलश प्रज्ज्वलित की जाती है। राजकीय उपेक्षा के चलते यह स्थान वर्तमान में विकसित नहीं हो पा रहा है।

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Akanksha Agrawal
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