हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पर्याप्त टैक्नीशियन नहीं, ग्रामीणों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना

Deepak Sahu

Publish: Apr, 17 2018 05:50:10 PM (IST)

Mahasamund, Chhattisgarh, India
हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पर्याप्त टैक्नीशियन नहीं, ग्रामीणों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना

हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पर्याप्त टैक्नीशियन नहीं होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा, प्रत्येक ब्लॉक में 5-5 टैक्नीशियन के पद स्वीक

महासमुंद. गर्मी शुरू होते ही जिले में जलसंकट गहरा गया है। भू-जल स्तर घटने से लगातार हैंडपंप खराब हो रहे हैं, पर इस समस्या से निबटने के लिए पीएचई के पास पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। हद तो यह है कि जिले में 11,550 हैंडपंपों की मरम्मत के लिए सिर्फ 15 टैक्नीशियन हैं। यही वजह है कि पीएचई के अफसर दिक्कतों का समाधान समय पर नहीं कर पा रहे हैं।


पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार जिले के 1100 सौ गांवों में 11,550 डपंप हैं। इसमें से 11,200 हैंडपंप चालू हालत में हैं। 250 हैंडपंप खराब हो गए हैं या फिर जलस्तर गिर चुका है। अब इन हैंडपंपों की मरम्मत के लिए पर्याप्त टैक्नीशियन नहीं होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रत्येक ब्लॉक में 5-5 टैक्नीशियन के पद स्वीकृत हैं, पर रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की गई है। पीएचई निजी कर्मचारियों की मदद से हैंडपंपों की मरम्मत करवा रहा है।

उल्लेखनीय है कि गर्मी बढऩे के साथ ही हैंडपंप लगातार बंद हो रहे हैं। पानी भी कम निकल रहा है। बागबाहरा, सरायपाली एवं बसना क्षेत्र के गांवों में पेजयल और निस्तारी की सबसे ज्यादा समस्या है। खबर यह भी है कि कई गांवों के लोग झरिया से पानी निकालकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में नल जल योजना की सुविधा तो है, लेकिन बोर का जलस्तर घटने से पानी नहीं निकल रहा है। इसलिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा बोर का भी जलस्तर घट चुका है। बोर बंद होने की शिकायतें मिल रही हैं। जहां भू-जलस्तर ज्यादा गिरा है। वहां दिक्कत और ज्यादा है। इस साल लोगों को इसलिए पेयजल और निस्तारी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जलस्तर पिछले साल की तुलना में 20 से 30 फीट और नीचे जा चुका है।


766 हैंडपंप के पीछे एक टैक्नीशियन
पीएचई के अफसर जिले में पेयजल संकट से निबटने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। 766 हैंडपंपों के पीछे एक टैक्नीशियन की नियुक्ति की गई है। समय पर हैंडपंपों के सुधार नहीं होने के कारण लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक कई गांवों के हैंडपंपों से लाल पानी निकलने की शिकायत पीएचई के पास आई है, लेकिन मरम्मत कार्य नहीं होने के कारण लोग हैंडपंपों के पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। राटापाली के ग्रामीण फ्लोराइडयुक्त पानी से परेशान हैं। ग्राम सुपेबेड़ा के कोना गांव में चार हैंडपंप हैं, चारों बंद हो गए हैं। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने पूर्व में भी कई बार दी है, लेकिन सुधार नहीं हुआ।


105 जलाशयों में भी पानी संकट
जल संसाधन विभाग के 105 जलाशयों में भी पानी का संकट गहरा गया है। जल संसाधन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना एवं सरायपाली के जलाशयों पानी कम है। महासमुंद ब्लॉक के कछारडीह जलाशय, बिजराभाठा, बिलाईडबरी, धनसूली, लमकेनी, बागबाहरा के हाथीगढ़, भीमखोज, पाली, नवाडीह, दाबपाली, पोटिया, पिथौरा के सोनासिल्ली, राजाडेरा, गोड़बहाल, ठाकुरदिया, सुखीपाली, अमोदीडीह, झारमुड़ा जलाशयों में नहीं के बराबर पानी है।


पीएचई के कार्यपालन अभियंता, आरके उरांव ने कहा टैक्नीशियन के 25 पद स्वीकृत हैं। 15 पदों पर भर्ती हुई है। कर्मचारियों की कमी है। जरूरत पडऩे पर निजी टैक्नीशियनों की मदद ली जाती है।

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

1
Ad Block is Banned