भीषण गर्मी में भूजल स्तर में आई रिकॉर्ड गिरावट, बढ़ा पीने के पानी का संकट

Anjalee Singh | Updated: 19 May 2019, 02:30:09 PM (IST) Mahasamund, Mahasamund, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ (Chhattisgar) में भीषण गर्मी से भूजल स्तर (Water Leval) में रिकार्ड गिरावट आ गई है। पेयजल के लिए शहर व गांवों में हाहाकार मचा है। कई लोग पेयजल समस्या से निपटने के लिए बोर खनन की अनुमति के लिए लगातार एसडीएम (SDM) दफ्तर पहुंच रहे हैं।

महासमुंद. छत्तीसगढ़ (Chhattisgar) में भीषण गर्मी से भूजल स्तर (Water Leval) में रिकार्ड गिरावट आ गई है। पेयजल के लिए शहर व गांवों में हाहाकार मचा है। कई लोग पेयजल समस्या से निपटने के लिए बोर खनन की अनुमति के लिए लगातार एसडीएम (SDM) दफ्तर पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि रोज पांच से सात आवेदन तहसील में आ रहे हैं।

स्थल निरीक्षण के बाद बोर खनन की अनुमति दी जा रही है। वहीं कई स्थानों पर बिना परमिशन के खनन करने की खबर है, पर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक भी प्रकरण सामने नहीं आया है। ज्ञात हो कि भू-जल स्तर में गिरावट के बाद बिना परमिशन के लिए बोर खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि बोर खनन करते हुए पकड़े गए तो जुर्माना का प्रावधान है। अनुविभागीय अधिकारी महासमुंद पीएचई के एमके ठाकुर ने बताया कि बोर खनन के लिए प्रतिदिन आवेदन एसडीएम कार्यालय पहुंच रहे हैं। वहीं स्थल व तकनीकी निरीक्षण के लिए ये आवेदन पीएचई कार्यालय आ रहे हैं। निरीक्षण के बाद यदि क्षेत्र में पेयजल की समस्या है, तो उनके आवेदनों पर स्वीकृति दी जा रही है। प्रतिबंध लगने के बाद से 50 से अधिक आवेदन पर स्वीकृति दी जा चुकी है। बताया जा रहा कई जगहों पर बिना अनुमति के बोर खनन किया जा रहा है। इस पर विभाग के अधिकारियों का ध्यान नहीं है।

695 हैडपंप के हलक सूखे
पीएचई से मिली जानकारी के अनुसार जिले के 1100 गांवों में 11,765 हैंडपंप हैं। तेज गर्मी होने से भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। हैडपंप खराब होने की संख्या 600 तक पहुंच चुकी है। 145 हैडपंपों की मरम्मत की जा रही है। वहीं पर्याप्त टैक्नीशियन नहीं होने समय पर हैंडपंपों को सुधारा नहीं जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रत्येक ब्लॉक में 5-5 टैक्नीशियन के पद स्वीकृत हैं, पर रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की गई है। पीएचई निजी कर्मचारियों की मदद से हैंडपंपों की मरम्मत करवा रहा है। पेयजल की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए व हैण्डपंपों के सतत् निगरानी एवं बिगड़े हैण्डपंपों के त्वरित सुधार के लिए विकासखंड व जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है।

सरायपाली, बागबाहरा व बसना क्षेत्र में अधिक समस्या
बागबाहरा, सरायपाली एवं बसना क्षेत्र के गांवों में पेजयल और निस्तारी की सबसे ज्यादा समस्या है। खबर यह भी है कि कई गांवों के लोग झरिया से पानी निकालकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। नलकूप का जलस्तर कम होने से नल जल योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है। इस साल लोगों को इसलिए पेयजल और निस्तारी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जलस्तर पिछले साल की तुलना में 20 से 30 फीट और नीचे जा चुका है। वहीं ग्रामीणों को पेयजल सुविधा प्रदान करने के लिए नल जल योजना की शुरुआत की गई है। जिले में वित्तीय वर्ष 2018-19 में 242 गांवों में नल जल योजना की स्वीकृत मिली थी। 202 गांव काम पूरा हो गया है। 14 जगहों पर कार्य प्रगति पर है।

स्वीकृति दी जा रही
बोर खनन के लिए प्रतिदिन आवेदन विभाग को मिल रहे हैं। एसडीएम कार्यालय से प्राप्त आवेदनों पर स्थल निरीक्षण कर जरुरत के आधार पर स्वीकृति दी जा रही है।
एमके ठाकुर, एसडीओ, पीएचई


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