बैंकों में हो रही है पैसे की किल्लत, स्वीकृति के बाद भी नहीं मिल रहा ऋण

जिला सहकारी बैंक में पहुंच रहे सैकड़ों किसान, स्वीकृति के बाद भी नहीं मिल रहा ऋण

सरायपाली. जिला सहकारी बैंक में रोजाना सैकड़ों किसान ऋण राशि प्राप्त करने पहुंच रहे हैं, मगर उन्हें खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ रहा हैसहकारी समितियों से जुड़े किसानों को ऋण प्राप्त करने में भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। जिन किसानों की ऋण स्वीकृति हो चुकी है अब उन्हें बैंक से नकदी प्राप्त करने के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है। बैंक प्रबंधन का कहना है जितने किसानों को ऋण स्वीकृत हो रहा है, उतनी राशि बैंक को नहीं मिल पा रही है।

ऋण राशि की सख्त जरूरत

इस साल खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसानों को ऋण राशि की सख्त जरूरत है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या. भंवरपुर के अंतर्गत भंवरपुर, लम्बर, बिछियां, बड़ेसाजापाली, उड़ेला, बाराडोली सहकारी समिति संचालित है। जहां करीब 7300 किसान पंजीकृत हैं। पिछले वर्ष किसानों को 20 करोड़ 81 लाख 22 हजार रुपए का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक सिर्फ 785 किसानों को ऋण स्वीकृति मिल पाई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।

38-50 पैसों वाले किसानों का ऋण एक वर्ष के लिए स्थगित

इस वर्ष सूखा प्रभावित होने के कारण किसानों का ऋण वसूली को स्थगित करा दिया गया है। ऋण राशि को परिवर्तन कर पुन: इस वर्ष उन किसानों का ऋण प्रकरण तैयार किया जा रहा है, जिस गांव की अनावरी रिपोर्ट 0-37 पैसा है। उन गांव के किसानों का तीन वर्ष के लिए परिवर्तन किया गया है। 38-50 पैसा वाले गांव के किसानों का ऋण एक वर्ष के लिए स्थगित किया गया है। ऋण राशि से ही खेतों की जुताई, कृषि उपकरण, खेत तैयार करने, मेड़ बंदी जैसे कार्यों के लिए नकदी की सख्त जरूरत पड़ रही है।

बैंक में हो रही है पैसे की किल्लत, किसान एटीएम से वंचित

जिस सहकारी बैंक के माध्यम से किसानों को ऋण राशि का वितरण किया जा रहा है वहां पैसे की किल्लत हो रही है। करीब 21 करोड़ रुपए की ऋण वितरण किया जाना है, जिसमें 50 प्रतिशत नकद एवं 50 प्रतिशत खाद बीज का वितरण किया जाना है। कुछ किसानों को एटीएम का भी वितरण किया गया है, मगर अभी भी कई किसान एटीएम से वंचित हैं।

अप्रैल से शुरू होगा खरीफ सीजन

नया खरीफ सीजन अप्रैल माह से प्रारंभ हो जाता है। बताया जा रहा है कि ऋण स्वीकृति के लिए जटिल प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ रहा है। छ: समितियों के 7300 किसानों के ऋण प्रकरण की जांच के लिए एक मात्र पर्यवेक्षक पदस्थ होने के कारण प्रकरण को जांच करने में विलंब हो रहा है। जिस कछुआ चाल से ऋण स्वीकृति की जा रही है, उससे तो ऐसा लग रहा है कि किसानों को समय पर ऋण मिल पाना मुश्किल है।

चंदू निर्मलकर Desk
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