ODF घोषित होने के 2 साल बाद भी हितग्राहियों को नहीं मिला प्रोत्साहन राशि,अधिकारियों समेत सरपंच-सचिव ने साधी चुप्पी

- सरकार द्वारा प्रत्येक शौचालय निर्माण के लिए हितग्राहियों को 12 हजार रुपए देने का नियम।
- ग्रामीणों के पहल से दो साल पहले ही ओडीएफ बना ग्राम पंचायत लेकिन सरपंच- सचिव ने अभी तक नहीं किया राशि का भुगतान।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 30 Jun 2020, 04:36 PM IST

महासमुंद । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत का नारा है। प्रधानमंत्री के नारे को मूर्त रूप देने के लिए प्रशासन आए दिन समीक्षा भी करता रहा परंतु इसका असर निचले स्तर पर नहीं पड़ा। सरकार हर गरीबों के घरों में शौचालय बनाकर पंचायतों को खुले से शौच मुक्त कराना चाह रही है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता और मनमानी के चलते सरकारी प्रयास सिफर साबित होते हुए दिखाई देने लगे है। अधिकाश पंचायतों में सरपंच-सचिव ने हितग्राहियों को शौचालय बनाने के रूपये भी प्रदान नहीं किये है। ताजा मामला महासमुंद जिले के जनपद पंचायत बसना के ग्राम लोहड़ीपुर से सामने आया है।

बसना जनपद के रुबर्न क्लस्टर चयनित ग्राम पंचायत लोहड़ीपुर के ग्रामीणों ने विगत दो वर्षों पहले पंचायत के आदेश पर स्वयं की राशि से शौचालय निर्माण किया ताकि अंतिम पंक्ति का गांव भी ओडीएफ बन सके। ग्रामीणों के सहयोग से तो ग्राम पंचायत ओडीएफ बन गया लेकिन ग्रामीणों को मिलने वाला प्रोत्साहन राशि अब तक नहीं मिल पाया है।

जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि कुछ हितग्राहियों को इट, रेत या फिर सीमेंट जरूर दिया गया था लेकिन लेबर मिस्त्री की मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। शौचालय बनाते तक ग्राम पंचायत के द्वारा आश्वासन दिया जाता रहा कि ओडीएफ घोषित होने के बाद शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 12 हजार रुपये दे दिया जाएगा लेकिन साल भर बीतने के बाद भी कई ग्रामीणों को शासन से मिलने वाली राशि का एक रुपये भी नही मिल पाया है।

ग्रामीणों का कहना है ग्राम पंचायत को ओडीएफ बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा योजना के तहत शौचालय बनाने चयनित हितग्राहियों ने शासन से प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने पर कर्ज लेकर स्वयं की राशि से शौचालय बनाया है, कार्य पूर्ण कर ग्राम पंचायत को ओडीएफ भी कराया। ODF घोषणा के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने ओडीएफ के नाम पर वाहवाही भी लूट ली लेकिन प्रोत्साहन राशि देने के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं।

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