कुओं को पुनर्जीवित करने की पहल...., बुंदेली समाज ने शुरू किया अभियान

पालिका के सहयोग से बुंदेली समाज के लोगों ने कुओं को पुनर्जीवित करने की पहल कर अभियान की शुरूआत की है।

By: Mahendra Pratap

Published: 25 May 2018, 02:50 PM IST

महोबा. बुंदेलखंड क्षेत्र हर वर्ष सूखे की मार झेलता चला आ रहा है। इस क्षेत्र का महोबा जनपद सबसे अधिक सूखे की मार को सह रहा है। नतीजन यहां के तालाब जहां सूखने लगे हैं तो वहीं प्राचीन कुओं ने भी जबाब दें दिया है। मगर समाज का एक तबका इस भीषण सूखे में भी अपनी लगन और मेहनत से जमींदोज हो चुके कुओं को फिर से गुलजार करने में जुटा है।

प्राचीन कुएं की सफाई में जुटा बुंदेली समाज

पालिका के सहयोग से बुंदेली समाज ऐसे ही एक प्राचीन कुएं की सफाई में जुटा है। सहयोग और परिश्रम से अब कुएं में पानी आने लगा है। सिर्फ सफाई से ही दूधिया कुएं में पानी आ गया इसका मतलब है कि धरती के अंदर जल स्त्रोत अभी सूखे नहीं वह पुन: जीवित हो सकते हैं। बुंदेलखंड में कुएं भूजल स्त्रोत के कितने महत्वपूर्ण साधन हैं, इसका मजबूत प्रमाण गोरखगिरि के नजदीक स्थित दूध वाले कुएं ने दे दिया। चार दिन पहले यह ऐतिहासिक कुआं ऊपर तक गंदगी से पटा हुआ था। लोगों ने उसमें पत्थर भर दिए थे लेकिन सफाई होते ही आज इसमें फिर से पानी आ गया। किसी को उम्मीद नहीं थी कि भीषण गर्मी व सूखे के हालात में कुएं के जल स्त्रोत खुल गए।

ल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करते हैं

अब इस कुएं को देखने वालों का तांता लगा हुआ है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि दूध वाले कुएं में पानी आना शुभ संकेत हैं। अगर इसी तरह बारिश से पहले नगर के सभी कुओं की सफाई हो जाती है तो बारिश के पानी को संचित करने में काफी मदद मिलेगी। कुओं को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चला रहे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि दूध वाले कुएं की तरह ही यदि बारिश से पहले नगर के सभी कुओं की सफाई हो जाती है तो बारिश के पानी को संचित करने में काफी मदद मिलेगी। थोड़ी-थोड़ी दूर पर लगे हैंडपंप सिर्फ भूजल दोहन की मशीन हैं जबकि कुएं, पोखर और तालाब भूजल स्तर को नीचे गिरने से रोकते हैं। जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करते हैं।

करीब 800 कुएं निष्प्रयोज्य हो चुके

राजस्व अभिलेखों के अनुसार महोबा जिले में कुल 1240 कुएं हैं जिनमें करीब 800 कुएं निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। हम बारिश से पूर्व जनसहयोग से इन कुओं की साफ सफाई करवाना चाहते हैं। शिवतांडव व जिलाधिकारी कार्यालय के मध्य स्थित दूध वाला कुआं पिछले आठ साल से निष्प्रयोज्य था। गंदगी से पट चुका था लेकिन बुंदेली समाज की पहल पर नगर पालिका परिषद ने कुओं को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया है। अब देखना यह है कि बरसात के पहले कितने कुओं को नया जीवन मिल पाता है। बुंदेली समाज की इस पहल का जनपदवासियों से खुले मन से सराहा है। यदि इसी तरह समाज का हर तबका पानी की अहमियत को समझे तो शायद पानी की कमी से निजात मिल सकती है।

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