करने चली हैं राजनीति, पास हैं एमए, लेकिन नहीं चानतीं कौन जिले का डीएम-एसपी

प्राइमरी स्कूल के छात्रों से भी बदतर है प्रत्याशियों का ज्ञान।

 

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Published: 10 Nov 2017, 08:28 PM IST

महोबा. अब राजनीति में उतर आई हैं और उतर आए हैं। एमए पास हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं है कि हमारे जिले का डीएम और एसपी कौन है। अब ये जनता की सेवा की बात करती हैं, लेकिन जब इनका सामान्य ज्ञान ही लगभग जीरो है तो आगे यह कैसे काम करेंगी यह तो समय ही बताएगा। यहां पर कई ऐसे प्रत्याशी हैं काफी कम पढ़े लिखे हैं, उन्हें अपने क्षेत्र के बारे में भी न के बराबर जानकारी है, लेकिन अब वे जनता का प्रतिनिधि बनने के लिए मैदान में हैं। जितने के बाद ये जनता के लिए क्या करेंगे, उनकी समस्याओं को बैठकों में कैसे रखेंगे यह कहना मुश्किल है।

नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण में महोबा जनपद में मतदान होना है, जिसको लेकर नामांकन का दौर पूरे शबाब पर है। चारों प्रमुख दलों के अलावा निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान कई ऐसे प्रत्याशी देखने को मिले जिनका जरनल नॉलेज बेहद खराब था। चुनाव में किस्मत आजमाने वाले अधिकांश प्रत्याशियों का ज्ञान प्राइमरी स्कूलों के छात्रों से बदतर है। वहीं सभासद का पर्चा भरने आए अधिकांश प्रत्याशी अपने जिले के डीएम और एसपी तक का नाम नहीं जानते हैं। नगर पालिका में जनता का प्रतिनिधित्व करने की मंशा से चुनावी मैदान में उतरे अधिकांश उम्मीदवारों का सामान्य ज्ञान गड़बड़ है।

बुन्देलखण्ड के महोबा जनपद में दो नगर पालिका परिषद और तीन नगर पंचायत है, उसके लिए आगामी 29 नवम्बर को मतदान होना है, जिसके लिए 10 नवम्बर तक नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई। नगर पालिका महोबा के लिए तकरीबन 11 उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरे, जिनमें समाजवादी पार्टी से सुलोचना गुप्ता पत्नी राधारमण गुप्ता ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। बैंड बाजे और काफिले के साथ ये नामांकन करने आईं थीं। पूर्व छात्रसंघ जिलाध्यक्ष की पत्नी सुलोचना गुप्ता यूं तो एमए पास हैं, लेकिन इनका जनरल नॉलेज प्राइमरी से भी खराब है, इन्हें महोबा के डीएम तक का नाम नहीं पता है। यही नहीं इन्हें यह भी नहीं पता कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री कौन हैं। जब इनसे सामान्य ज्ञान के और सवाल किए गए तो ये जवाब दिए ही चली गई।

कभी नहीं गईं स्कूल अब कर रही हैं राजनीति
वहीं दूसरी ओर बीएसपी की उम्मीदवार अंजुम खातून ने भी नामांकन पत्र दाखिल किया। ये भी अपने भारी समर्थकों के हुजूम के साथ तहसील पहुंची थी। इनकी शिक्षा की बात करें तो ये आज तक स्कूल ही नहीं गईं। यही वजह है कि इनका सामान्य ज्ञान का स्तर जीरो है। इन्हें न तो महोबा के डीएम का नाम पता है और न ही इनके पास विकास की कोई रूपरेखा है। इसके अलावा कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता पाँच से आठ पास तक है। कॉग्रेस की उम्मीदवार अंजना सिंह इंटर पास हैं, जनशक्ति चेतना पार्टी की उम्मीदवार आठवीं पास हैं, इन्हें नगर पालिका की पूर्व चैयरमैन का नाम नहीं पता। निर्दलीय प्रत्याशी शीला भी आठवीं पास हैं। निर्दली प्रत्याशी नगमा बेगम पांचवीं पास हैं। संतोष प्रजापति आठवीं पास है।

कइयों को तो प्रदेश के राज्यपाल तक का नाम नहीं पता

कबरई क्षेत्र के लिए निर्दलीय प्रत्याशी कन्धीलाल हाई स्कुल पास हैं। सपा के नरेशचद्र बीए पास हैं। भारतीय शक्ति ? चेतना पार्टी के रामखिलावन कबरई नगर पंचायत के प्रतयाशी आठवीं पास हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे सभासद के उम्मीदवार थे जिनका सामान्य ज्ञान बेहद खराब है। कइयों को तो प्रदेश के राज्यपाल तक का नाम नहीं पता। कई उम्मीदवार जिले के डीएम और एसपी का नाम तक नहीं जानते, पालिका क्षेत्र में कितने वार्ड हैं। इन्हें ये भी नहीं पता ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि अल्पज्ञानी ये उम्मीदवार जीतने के बाद कैसे वार्ड की बैठक में जनता की समस्याएं रखेंगे।

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