शादी के तीन दिन बाद जो हुआ उससे सुन पूरा गांव सन्न है.. पति और ससुर 72 घंटे में ही कर डाला...

हाथों में सुर्ख मेहंदी, आंखों में न जाने कितने सपने संजोए शादी के जोड़े में सजी दुल्हन सिसक-सिसक कर रोती रही

By: Ruchi Sharma

Updated: 04 Apr 2019, 06:04 PM IST

महोबा. हाथों में सुर्ख मेहंदी, आंखों में न जाने कितने सपने संजोए शादी के जोड़े में सजी दुल्हन सिसक-सिसक कर रोती रही। क्योंकि जिसके साथ जीने और मरने की कसमें खाईं, वहीं शादी के तीन दिन बाद ही उसे तीन तलाक दे कर भाग गया। कारण था सिर्फ एक लाख रुपये दहेज नहीं मिला। दुल्हन के हाथों की मेहंदी भी न छूटी थी कि उसकी जिन्दगी तलाक तलाक तलाक के इन तीन शब्दों से हमेशा के लिए वीरान हो गयी। तीन तलाक को लेकर सख्त कानून होने के बाबजूद भी तलाक के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पीड़िता दुल्हन और उसका परिवार अब न्याय के लिए कोतवाली की दहलीज पर गुहार लगा रहे है।

तीन तलाक पर रोक लगाने की पीएम ने कही थी बात

विधानसभा चुनाव के दौरान बुन्देलखण्ड के इसी महोबा में मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में पीएम मोदी ने तीन तलाक पर पाबन्दी लगाने की बात कही थी। एक बार फिर लोकसभा चुनाव है मगर तलाक नाम का दंश खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला समद नगर में घटित यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल तीन दिन पहले एक अप्रैल को याक़ूब ने अपनी बेटी आसमा का निक़ाह बाबुद्दीन के साथ किया था। पिता याक़ूब ने बड़े अरमानों के साथ बेटी का निक़ाह कराया साथ ही अपनी सामर्थ्य अनुसार दहेज और तीन लाख रुपया नगद इस ख्वाहिश से दिया कि बेटी का जीवन संवर जाएगा। मगर बाप को क्या पता था कि तीन दिन में ही तलाक का दंश उसकी ख़ुशियों पर पानी फेर देगा।

हाथ क मेंहदी देख रो रही दुल्हन

पिया के नाम की मेहंदी हाथों में लगाये आसमा भी ये नहीं जानती थी कि जिस बाबुद्दीन की वो शरीके हयात बनी है। वो तीन दिन में ही उसे मझधार में छोड़ देगा। मजबूर पिता बताता है कि दहेज में तीन लाख रुपये देने के बाद भी एक लाख रुपए की और मांग कर रहे थे। देने में असमर्थता जताई तो पति ने तीन तलाक़ देकर रिश्ता ही तोड़ डाला। हाथों की मेहंदी को देखकर सिसक रही दुल्हन आसमा बताती है कि पीएम मोदी हम मुस्लिम महिलाओं के हक़ की बात करते हैं। मगर ये कानून हमारे काम नहीं आ रहे तीन दिन में ही मुझे तलाक़ दे दी गयी और मेरा जीवन बर्बाद कर दिया मुझे न्याय की दरकार है।

Ruchi Sharma
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