सोनौली बार्डर पर सुरक्षा में लापरवाही, वाहनों की चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति

सोनौली बार्डर पर न तो सुरक्षा एजेंसियां चौकस दिखी और न ही लग्जरी वाहनोें की जांच पड़ताल होती हुई दिखी ।

By: Akhilesh Tripathi

Published: 11 Sep 2017, 08:21 PM IST

महाराजगंज. खुफिया रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में छिपे चार आतंकी नेपाल की खुली सीमा और लचर सुरक्षा व्यवस्था के चलते कभी भी भारत में प्रवेश कर सकते हैं। इसके लिए आतंकी नेपाल- भारत सीमा के सोनौली बार्डर का इस्तेमाल कर सकते हैं। रिपोर्ट के बाद भी सोनौली बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आ रही है ।

 

 

 




 

 

नेपाल सीमा के वीरगंज के बाद सर्वाधिक व्यस्ततम मार्ग सोनौली है लेकिन यहां सुरक्षा व्यवस्था काफी लचर है। इस सीमा पर कई बार आतंकी भी पकड़े जा चुके है। अभी कुछ दिन पूर्व हिज्ब आतंकी नासिर इसी बार्डर पर पकड़ा गया जबकि 10 सितंबर को एक नीदरलैंड का नागरिक बिना दस्तावेज के भारत से नेपाल जाते वक्त पकड़ा गया। मुंबई बम कांड के याकूबमेनन और टाइगर मेनन घटना को अंजाम देने के बाद इसी रास्ते नेपाल भागा था जो बाद में पकड़ा गया। 1999 में काठमांडू से भारतीय विमान के अपहरण की घटना को अंजाम देने वाले आतंकी भी इसी रास्ते काठमांडू गए थे। ऐसे ही तमाम घटनाओं के कारण नेपाल का सोनौली बार्डर खूफिया रिपोर्टो में अति संवेदनशील की सूची में आ गया।

 

लेकिन इस संवेदनशील बार्डर को यहां तैनात सुरक्षा एजेंसियां शायद संवेदनशील नहीं मानती। तभी तो हाई अलर्ट जैसे आदेशों को भी वे हवा में लेते है। चाहे नेपाल में छिपे आतंकियों के भारत में प्रवेश की बात हो या हनीप्रीत के नेपाल सीमा के रास्ते नेपाल भाग जाने की बात हो, सोनौली की सुरक्षा एजेंसियां हल्के में ही लेती है। इसका खुलासा सोनौली में हाई अलर्ट की सच्चाई की तफ्तीश करने पर हुआ।

 

सोनौली बार्डर पर न तो सुरक्षा एजेंसियां चौकस दिखी और न ही लग्जरी वाहनोें की जांच पड़ताल होती हुई दिखी। यहां तक की देश विदेश से इस रास्ते नेपाल जा रहे पर्यटक वाहनों की भी जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती दिखी। ऐसे में यह सवाल अहम है कि इस संवेदनशील बार्डर पर यदि सुरक्षा की व्यवस्था ऐसे ही लचर रही तो भला नेपाल से आतंकियों को भारत प्रवेश पर कैसे रोका जा सकता है ।

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