SC/ST एक्ट पर बीजेपी का दांव पड़ सकता है उल्टा, इन सांसदों के लिये मुश्किल हुई राह

SC/ST एक्ट पर बीजेपी का दांव पड़ सकता है उल्टा, इन सांसदों के लिये मुश्किल हुई राह

Sarveshwari Mishra | Publish: Sep, 07 2018 03:30:08 PM (IST) Mahrajganj, Uttar Pradesh, India

दलित वोटरों पर डोरा डालने का दांव कहीं उल्टा न पड़ जाय

यशोदा श्रीवास्तव
महराजगंज. 6 सितंबर को एससी एसटी/एक्ट के खिलाफ सवर्णो द्वारा खोले गए मोर्चे से भाजपा को अंदाजा हो गया होगा कि 2019 में सवर्ण वोटरों की नाराजगी उस पर भारी पड़ने वाली है। भाजपा के इस फैसले का विरोध अंदर अंदर भाजपा खेमे में भी है। भाजपा के वे सांसद ज्यादा परेशान हैं जो सवर्ण नहीं हैं लेकिन उनकी जीत में सवर्ण वोटरों की भूमिका निर्णायक होती है। भाजपा के सवर्ण सांसदों को भी इस बार लोहेे के चने चबाने पड़ सकते हैं।


भाजपा के ही एक प्रतिवद्ध समर्थक कहते हैं कि 2019 करीब है। 2014 में बड़े बड़े दावे के साथ चुनाव जीते भाजपा के सांसद इस बार किस मुंह से चुनाव क्षेत्र में जाएंगे? आखिर वे कब तक वही पुराना राग अलापेंगे कि सारी गड़बड़ी यूपीय सरकार के कार्यकाल की है। बेरोजगारी, मंहगाई,रूपयों का अवमूल्यन,भ्रष्टाचार सब पूर्व की सरकारों के समय का है। आखिर इसे ही तो दूर करने के लिए जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत से दिल्ली भेजा था। भाजपा के इस समर्थक ने यह भी कहा कि ये केवल मेरा आक्रोश नहीं है। गांव इलाकों में काम कर रहे भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकार्तओं का भी यही आक्रोश है। हम जब सरकार के नाकामियों के लिए यूपीए अथवा कांग्रेस की सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं तो हमसे पूछा जाता है कि बिना बताए पीएम के पाकिस्तान जाने के पीछे भी यूपीए का हाथ रहा है? या राम मंदिर निमार्ण के लिए भी यूपीए ने रोक रखा है। एससी एसटी एक्ट की तो बड़ी जल्दी थी और राम मंदिर के लिए राम जानें। कहा कि जनता के सवालों का जवाब नहीं रहता हमारे पास। अपनी ही सरकार के प्रति यह प्रतिक्रिया एक भाजपा समर्थक की है जो हर हाल भाजपा का वोटर बना रहने का दावा करता है। वादे के अनुसार हम उसका नाम नहीं छाप रहे हैं।

 


यानी साफ है कि देखने में भले ही तस्वीर अभी धुंधली लग रही हो लेकिन सरकार के खिलाफ अंडर करेंट जर्बदस्त है। नोटबंदी से हुई तबाही से जनता उबर नहीं पाई है। समाजसेवी डा विजय कहते हैं कि इस महीने नौजवानों से गांव के गांव खाली हो जा रहे थे। वे सब मुंबई,पंजाब,गुजरात आदि दूसरे प्रांतो में रोजी रोजगार के लिए कूच कर जाते थे जहां उनकी कमाई से घरों में चूल्हें जलते थे, उनके बच्चे पढ़ाई लिखाई करते थे,बेटे बेटी की शादी आदि निपट जाता था। दो साल से ऐसे घरों में मुर्दनी छायी हुई है। नौजवान एक आशा के साथ अपने कर्मस्थली तक जाता है मगर कुछ ही दिन बाद निराशा का चादर ओढ़े वापस आ जाता है क्योंकि काम के अवसर अभी वापस नहीं आए। इन्हें रोजगार का भरोसा सरकार दे पाने में विफल थी ही कि एससी एसटी एक्ट का हथौड़ा चलाकर सवर्ण वोटरों को नाराज कर दिया। व्यापारी हरेकृष्ण कहते हैं कि हैरत है कि भाजपा के समर्थक अभी भी यह दावा करने से नहीं चूकते कि इस एक्ट का चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला लेकिन जिन्हें चुनाव मैदान में जाना है उनके दिल से पूछिय क्या गुजर रही है। गांवों में रात्रि विश्राम से लेकर गांव गांव चैपाल के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं का बखान किया जा रहा है लेकिन उसे सुनने के लिए भाड़े के स्रोता बुलाने पड़ रहे हैं।

 


भाजपा के कुछ नेताओं का तर्क है कि सवर्ण तो अभी चिल्ला रहे हैं बाद में उन्हें हमारे पास ही आना होगा। कहां जाएंगे? ऐसे लोगों को गोरखपुर फूलपुर तथा कैराना लोकसभा उप चुनाव का परिणाम नहीं दिखता जहां सवर्ण वोटरों के बाहर न निकलने की वजह से ही भाजपा को मुंहकी खानी पड़ी। यानी जरूरी नहीं कि सवर्ण वोटर भाजपा से नाराज होकर किसी दूसरे को वोट देकर ही इन्हें मजा चखाए। वह वोट देने न जाकर भी भाजपा को मजा चखा सकता है। और इधर एससीएसटी एक्ट के बहाने जिस दलित वोटरों का दिल जीतने की कोशिश भाजपा ने की है, वह दांव उसका उल्टा पड़ रहा है। दलित वोटर इनके पाले में आने से रहा,पिछड़ा वोट भी अब इनसे दूर जा रहा है। महराजगंज संसदीय सीट से पिछले पांच बार से पिछड़े वर्ग के पंकज चैधरी भाजपा के सांसद होते चले आ रहे हैं। वे कुर्मी हैं लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे कुर्मी वोटों के बदौलत ही चुनाव जीत रहे हैं। सवर्ण वोटरों का बड़ा वर्ग उन्हें वेाट देता है तब वे चुनाव जीतते हैं। अब सवर्ण वोटरों को अपने पाले में बनाए रखने के लिए वे क्या जुगत करते हैं यह देखने की बात होेगी। हालाकि भाजपा के जिलाध्यक्ष अरूण शुक्ल कहते हैं कि सवर्ण वोटर भाजपा को वेाट देगा। दलित एक्ट के जरिए भाजपा दलितों को सुरक्षा प्रदान कर रही है, इसमें किसी को नाराज अथवा भयग्रस्त होने की जरूरत नहीं है।

 

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