बाजार से आधे कीमत पर क्रय केंद्रों पर किसान क्यों दें अपना आलू, सपा नेता का बयान

सरकार की मंशा चिप्स और सब्जी बाजार से जुड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने की तो नहीं

By: ज्योति मिनी

Updated: 16 Mar 2018, 06:47 PM IST

Mahrajganj, Uttar Pradesh, India

यशोदा श्रीवास्तव

महराजगंज. सरकारी आलू खरीद नीति कॉरपोरेट जगत के लिए है या किसानों के लिए इस पर बहस शुरू हो गई है। आलू खरीद की सरकारी नीति के तहत किसान अपना आलू खरीद केंद्रों पर क्यों दें यह भी एक सवाल है। सरकार की यह योजना सवालों के घेरे में है। आलू खरीद की बेढब नीति के चलते ही सरकारी आलू खरीद केंद्र के खुले दो सप्ताह बीत गए लेकिन दो किलो आलू भी नहीं खरीदा गया।


फरेंदा के पूर्व सपा विधायक विनोद तिवारी कहते हैं कि, सूबे की चाहे योगी सरकार हो या केंद्र की मोदी सरकार। दोनों ही केवल पूुजीपतियों के हित रक्षक हैं। दोनों सरकारों की नजर में सवा अरब की जनता चंद उद्योगपतियों के घराने में सिमटी हुई है। इसीलिए ये सरकारें आम जनता की छोड़ औद्यागिक घरानों की ही चिंता करती है। सरकार की आलू खरीद नीति भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

कहते हैं कि, आज सब्जी का बाजार भी औद्योगिक घरानों के हाथ में आ गया है। यही वजह है कि, आलू की सरकारी समर्थन मूल्य 549 रूपये प्रति क्विंटल है। जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 900 रूपये से एक हजार रूपये प्रति क्विंटल है। अब बताइए कि, किसान आपनी उपज वहां देगा जहां उसे दूना रेट मिल रहा है या वहां देगा जहां आधे से भी रेट मिल रहा है।

पूर्व विधायक ने कहा कि, इतना ही नहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर कसानों का आलू खरीदने के लिए बाकयदे उसकी छंटाई होगी। अपेक्षाकृत बड़े साइज की आलू की ही खरीद होगी अन्यथा नहीं। जाहिर है कि, आूल खरीद की सरकारी नीति किसानों के हित के लिए अप्रत्यक्ष रूप से सब्जी बाजार में कूदे बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहंुचाने के लिए।


जो भी सरकार की आूल खरीद नीति जिले में फ्लाप है। उद्यान विभाग द्वारा पहली मार्च से आनंदनगर कोल्ड स्टोरेज मे इसके लिए क्रय केंद्र खोला गया है जहां अभी तक दो किलो आलू की खरीद नहीं हो पाई है। पूरे प्रदेश में दो लाख एमटी आलू की खरीद होनी है। जिले में इसकी हिस्सेदारी बहुत निराशा जनक है।


जिला उद्यान अधिकारी भूषण प्रसाद सिंह कर कहना है कि, समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर होने के नाते किसान अपना आलू क्रय केंद्र पर नहीं ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि, जिले के चारों मंडियों में आलू 900 से 1000 रूपये प्रति क्विटल बिक रहा है। ऐसे में किसान अपना आलू 549 रूपये प्रति क्विंटल बेंचने क्यों लाए?

दो साल से जिले के कोल्ड स्टोरेजों को उनकी क्षमता अनुसार नहीं मिल रहा है आलू है। उद्यान विभाग के सूत्रों के अनुसार इस साल करीब ढाई हजार किसान आलू की खेती किए हैं। इससे संभावित उत्पादन करीब 50 हजार एमटी आंका गया है। जिले में आठ कोल्ड स्टोरेज है जिनकी भडारण क्षमता करीब 35 हजार एमटी है। पिछले दो साल से कोल्ड स्टोरेजों को उनकी क्षमता के अनुसार आलू नही मिला। वर्ष 2016 में 15864 एमटी और 2017 में 18059 एमटी आलू का ही भंडारण हो सका था।

 

pm modi
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