Motivational Story: छोटे से गांव से निकलकर यूं कमाया नाम व अथाह पैसा, जानिए कहानी

वर्ष 2005 में कानपुर से आइआइटी (Kanpur IIT) के बाद सार्स रोग के जीनोम कोड (Genome code of SARS disease) की खोज में सहयोग कर विश्व स्तर पर ख्याति हासिल की। इंजीनियर युवा उद्यमी (Engineer young entrepreneur) के तौर पर स्टार्टअप कम्पनी (Startup company) के जरिए रमाकांत शर्मा लोगों के आशियानों में कल्पनाओं को साकार कर रहे हैं।

हिण्डोन सिटी के छोटे से गांव कोटरा ढहर गांव के 38 वर्षीय रमाकांत शर्मा ने मेहनत से कॅरियर (career) को मनचाहा आसमां दिया है। वर्ष 2005 में कानपुर से आइआइटी के बाद सार्स रोग के जीनोम कोड की खोज में सहयोग कर विश्व स्तर पर ख्याति हासिल की। इंजीनियर युवा उद्यमी के तौर पर स्टार्टअप कम्पनी के जरिए लोगों के आशियानों में कल्पनाओं को साकार कर रहा है। वे वैज्ञानिक से युवा इंटरप्रेन्योर बन गए हैं। विदेशी मैग्जीन जीक्यू (Magazine gq) ने 2018 में उन्हें देश के 50 युवा प्रतिभाशाली भारतीयों (50 young talented Indians) में शामिल किया था। अब रमाकांत सौ करोड़ से अधिक के स्टार्टअप (Startup company) को बेंगलुरु और सिंगापुर (Bangalore and Singapore) में स्थापित करने के बाद अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने में जुटे हैं।
संदेश: मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान मेहनत के बूते कॅरियर को नया आसमां दे सकता है।
संघर्ष: गांव में सीमित संसाधनों के बीच रमाकांत ने 10वीं व हिण्डौन के हाईस्कूल से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की और बाद में आगे बढ़ते हुए यह मुकाम पाया।

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Jitendra Rangey Desk
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