घर पर फ्री-टाइम में इन थैरेपीज से दूर करें स्ट्रेस, दिमाग भी तेज होगा

इन दिनों ज्यादातर लोग घरों में फ्री हैं, ऐसे में वे कुछ थैरेपीज से घर में न सिर्फ सकारात्मकता ला सकते हैं, बल्कि फिटनेस भी बढ़ा सकते हैं। ऐसी कई थैरेपीज हैं, जो वाकई में कारगर भी हैं और समय का सदुपयोग भी करती हैं।

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लोग घरों से बाहर न निकलकर सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे में घर में रहकर भी वो समय को प्रोडक्टिव बना सकते हैं। इन दिनों ज्यादातर लोग घरों में फ्री हैं, ऐसे में वे कुछ थैरेपीज से घर में न सिर्फ सकारात्मकता ला सकते हैं, बल्कि फिटनेस भी बढ़ा सकते हैं। ऐसी कई थैरेपीज हैं, जो वाकई में कारगर भी हैं और समय का सदुपयोग भी करती हैं।

हॉर्टिकल्चर थैरेपी
हॉर्टिकल्चर थैरेपी का सकारात्मक असर सिर्फ व्यक्ति पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति पर भी देखने को मिलता है। आप बगीचे को वैसा रूप दे सकते हैं, जो समय के अभाव में नहीं दे पा रहे थे। पौधों की सफाई, कटिंग, पानी देना और कुछ समय उनके साथ बिताना आपको सकारात्मक ऊर्जा देगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार घर में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और बागवानी में जुटे रहने से मन को शांति और ताजगी मिलती है।

आर्ट थैरेपी
एक आर्टिस्ट से पूछिए कि एक पेटिंग उन्हें कितना सुकून देती हैं। यदि आपको स्ट्रेस फील होता है, तो कलर कीजिए। ऐसी कई आर्ट फॉर्म हैं, जो एकाग्रता बढ़ाते हैं। तो फिर यदि आप वर्किंग हैं, तो घर में रखे बच्चों के कलर से कुछ न कुछ क्रिएटिव कीजिए।

बिब्लियो थैरेपी
बिब्लियो थैरेपी का संबंध रीडिंग और स्टोरी टेलिंग से है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 12वीं सदी से बिब्लियो थैरेपी चली आ रही है। इसे बुक और पोएट्री थैरेपी भी कहा जाता है। इस थैरेपी से डिप्रेशन दूर होता है। ऐसे में यदि आप घर में बोर हो रहे हैं तो कुछ नया पढ़िए और फैमिली मेम्बर्स को स्टोरीज पढ़कर सुनाइए।

म्यूजिक थैरेपी
म्यूजिक स्ट्रेस को भी दूर करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार संगीत की स्वर लहरियां तनाव और कई मानसिक विकारों को दूर करने में महत्वपूर्ण हैं। जैसे-जैसे व्यक्ति संगीत की स्वर लहरियों में खोता जाता है, उसका ध्यान दूसरी बातों से हटता है।

पैट थैरेपी
पैट थैरेपी मेंटल डिसऑर्डर के इलाज में भी काम आती है। ऐसे में यदि आपके घर में पैट हैं, तो उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। अब जब आप के पास समय ही समय हैं, तो इन पैट्स के साथ भी क्वालिटी टाइम बिताइए।

ये सभी थैरेपीज पॉजिटिविटी पर बेस्ड हैं। इससे मेंटल फिटनेस भी बढ़ती है। खासकर यदि हम सकारात्मक बुक्स पढ़ते हैं, तो हमारी सोच भी सकारात्मक होती है। ये बुक्स की क्वालिटी पर डिपेंड करता है, ऐसे में सकारात्मक बुक्स पढ़नी चाहिए। वहीं आर्ट थैरेपी गुस्से पर भी कंट्रोल करती हैं। इस समय जब सभी लोग अपने घरों में हैं, तो अपनी हॉबीज को एन्जॉय करते हुए हम अच्छा समय बिता सकते हैं।

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सुनील शर्मा Desk
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