14 साल के हर्षवर्धन ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए बनाया कमाल का ड्रोन, 5 करोड़ देगी सरकार

मैनेजमेंट मंत्र
14 साल के हर्षवर्धन ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए बनाया कमाल का ड्रोन, 5 करोड़ देगी सरकार

14 साल के एक किशोर हर्षवर्धन जाला ने अपनी प्रजेंटेशन से सब का ध्यान खींचा, सरकार के साथ 5 करोड़ रुपए का समझौता

नई दिल्ली। वाइब्रेंट समिट में 14 साल के एक किशोर हर्षवर्धन जाला ने अपनी प्रजेंटेशन से सबका ध्यान खींचा। जाला ने एक ड्रोन का डिजाइन किया है, जिसके प्रॉडक्शन के लिए उन्होंने सरकार के साथ 5 करोड़ रुपए के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि ने जाला को चर्चा में ला दिया।

हर्षवर्धन ने गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ ऐसे ड्रोन तैयार करने के लिए करार किया है जिसकी मदद से युद्ध के मैदानों में लगे लैंड माइंस का पता लगाया जा सकेगा और ड्रोन की मदद से ही उनको निष्क्रिय भी किया जा सकेगा।10वीं के छात्र हर्षवर्धन उम्र के उस पड़ाव में अपने बिजनस प्लान पर काम कर रहे हैं और ड्रोन के तीन  नमूने बनाए हैं, जब उनकी उम्र के बच्चे बोर्ड एग्जाम को लेकर चिंतित हैं। हर्षवर्धन का कहना है कि उन्होंने लैंडमाइन का पता लगाने वाले ड्रोन के नमूने पर 2016 में ही काम शुरू कर दिया था और बिजनस प्लान भी बनाया था।

सैनिकों की सुरक्षा के लिए बनाया ड्रोन
उनको यह ड्रोन बनाने का आइडिया कैसे आया, इस बारे में हर्षवर्धन का कहना है कि उन्हें ड्रोन बनाने का आइडिया उस समय आया जब वे टेलिविजन देख रहा थे और पता चला कि हाथ से लैंडमाइन को निष्क्रिय करते वक्त बड़ी संख्या में सैनिक जख्मी होकर दम तोड़ देते हैं। इसके बाद उन्होंने मौजूदा माइन डिटेक्टर पर रिसर्च किया तो पता चला की अभी जो माइन डिटेक्टर बारूदी सुरंग को जांचने के लिए इस्तेमाल किए जाते है वो सुरक्षित नहीं है और न ही वह सही तरीके से काम करते हैं।

5 लाख रूपए किए खर्च
उन्होंने अब तक ड्रोन के नमूने पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किया है। पहले दो ड्रोन के लिए उनके अभिभावक ने करीब 2 लाख रुपए खर्च किया जबकि तीसरे नमूने के लिए राज्य सरकार की ओर से 3 लाख रुपए का अनुदान स्वीकृत किया गया है। हर्षवर्धन का दावा है कि उन्होंने ड्रोन बनाने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया है वो उनकी ख़ुद की बनाई हुई है।

क्या है ड्रोन की खासियत
हर्षवर्धन ने बताया कि ड्रोन में मकैनिकल शटर वाला 21 मेगापिक्सल के कैमरे के साथ इंफ्रारेड, आरजीबी सेंसर और थर्मल मीटर लगा है। कैमरा हाई रिजॉलूशन की तस्वीरें भी ले सकता है। ड्रोन जमीन से दो फीट ऊपर उड़ते हुए आठ वर्ग मीटर क्षेत्र में तरंगें भेजेगा। ये तरंगें लैंड माइंस का पता लगाएंगी और बेस स्टेशन को उनका स्थान बताएंगी। ड्रोन लैंडमाइन को तबाह करने के लिए 50 ग्राम वजन का बम भी अपने साथ ढो सकता है।


6 बार हुए नाकाम पर नहीं मानी हार

हर्षवर्धन कहना है कि इस ड्रोन को बनाने में वे छह बार नाकाम रहे लेकिन सातवीं बार की कोशिश सफल हुई। पिछले साल फरवरी-मार्च में इसे बनाने में मुझे कामयाबी मिली है, लेकिन इस साल अप्रैल-मई तक पूरी तरह से विकसित किया जाएगा। इसमें अभी और भी ख़ूबियां डालने वाले हैं।


गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमुख नरोत्तम साहू का कहना है कि डेमो देखने के बाद हमें हर्षवर्धन के प्रस्ताव में संभावनाएं नजर आई हैं इसलिए हमने उनकी योजना पर काम करने का फ़ैसला लिया है। उनका यह ड्रोन 100 मीटर के दायरे में 50 फ़ुट की ऊंचाई से बारूदी सुरंग का पता लगाने में सक्षम होगा।

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