सीजीएल सहित 35 से ज्यादा परीक्षाओं में हुए फेल, फिर ऐसे पाई UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता

सीजीएल सहित 35 से ज्यादा परीक्षाओं में हुए फेल, फिर ऐसे पाई UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफलता

Deovrat Singh | Updated: 14 Jul 2019, 05:41:04 PM (IST) मैनेजमेंट मंत्र

Success Story: देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास करना हर एक युवा का सपना होता है। लेकिन उसके लिए कितनी तैयारी और...

Success Story: देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास करना हर एक युवा का सपना होता है। लेकिन उसके लिए कितनी तैयारी और त्याग करना पड़ता है ये तो सिर्फ वो ही जानते हैं। कुछ चुनिंदा ही होते हैं जिन्हे पहली ही बार में सफलता मिल जाती है। बहुत से ऐसे भी हैं जो सरकारी नौकरी या लाखों की प्राइवेट जॉब छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करते हैं। ऐसे ही शख्स हैं विजय वर्धन, जिन्होंने 2018 में यूपीएससी की सिविल सर्विस की परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल की। विजय वर्धन को सफलता का स्वाद चखने के लिए कई उतार चढ़ावों से सामना करना पड़ा। विजय 35 से भी ज्यादा परीक्षाओं में फेल हुए थे, लेकिन हार नहीं मानी।

हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले विजय वर्धन ने सिविल सर्विस की परीक्षा से पहले 35 से ज्यादा कॉम्पेटेटिव एग्जाम में विफलता का मुंह देखना पड़ा। ये सभी परीक्षाएं ए और बी लेवल की परीक्षा थी। साल 2019 से पहले विजय वर्धन चार सिविल सेवा परीक्षा के चार अटेंप्ट दे चुके थे। रिश्तेदारों और करीबियों ने तो परीक्षा देने से मना कर दिया था, लेकिन विजय ने हार स्वीकार नहीं की। आखिरकार विजय को पांचवे अटेंप्ट में मंजिल मिल ही गई।

कोचिंग के लिए दिल्ली को चुना
विजय कोचिंग के लिए 2013 में दिल्ली चले गए। साल 2014 में विजय ने आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेन्स की परीक्षा दी। हालांकि, वह असफल रहे। वहीं, 2015 में फिर मेन्स की परीक्षा में असफल रहे। साल 2016 में विजय वर्धन ने मेन्स की परीक्षा क्वालिफाई कर इंटरव्यू के चरण में प्रवेश किया। इस साल वह छह अंकों से रह गए थे। साल 2017 में भी इंटरव्यू स्टेज में पहुंचने के बाद विफलता मिली। विजय राजस्थान सिविल सर्विस, हरियाणा सिविल सर्विस, यूपी सिविल सर्विस, एसससी सीजीएल में भी फेल हो चुके हैं।

फेल होने के कारणों को देख रह जाते हैरान
विजय काफी क्लोज मार्जिन से परीक्षा में फेल हो जाते थे। अगर परीक्षा में पास भी हो जाता तो कभी मेडिकल स्टैंडर्ड तो कभी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के कारण रह जाता था। ऐसे में अजीब -अजीब ख्याला आना स्वाभाविक है कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है। लेकिन 2018 में 104वीं रैंक के साथ सफलता हासिल कर, जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे एहसास होता है कि वह सभी असफलताएं मेरी लिए मील का पत्थर साबित हुई। इन्हीं असफलताओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। परीक्षा में फेल होना और फिर सफल होना किसी मैडल से कम नहीं होता।

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